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तपती गर्मी और लू से देखिए कितने बड़े खतरे में हैं आप, 7 नुस्खे अपनाएं...खुद को बचाएं
सीमा एस आनंद/अमर उजाला, पंचकूला/चंडीगढ़
Updated Sun, 17 Jun 2018 09:49 AM IST
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चिलचिलाती धूप, तपती गर्मी और लू के थपेड़े। इस बार इतनी भीषण और जानलेवा गर्मी पड़ रही है कि बचाव ही उपाय है। पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ समेत पूरा देश तेज धूप और उमस से परेशान है। कई जगह तापमान 45 डिग्री के पार जा चुका है। इस चिलचिलाती गर्मी में सबसे बड़ी समस्या है लू लगना। अंग्रेजी भाषा में इसे हीट स्ट्रोक कहते हैं। ऐसे में उन लोगों के लिए तो और भी दिक्कत है जिनका सारा दिन बाहर धूप में ही निकलता है।
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- फोटो : amar ujala
इससे शरीर में गर्मी, खुश्की और थकावट महसूस होती है, शरीर में सूजन, हीट रैश, शरीर में अकड़न और बेहोशी आदि की समस्या भी सामने आती हैं। गर्मी में जब हम अधिक शारीरिक गतिविधि करते हैं और कम पानी पीते हैं तो लू लगने का खतरा सबसे ज्यादा मंडराता है। गर्मी में जब शरीर के अंदर के द्रव सूखने लगते हैं तो शरीर से पानी और नमक की कमी हो जाती है और लू लगने का खतरा बढ़ जाता है।
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डाक्टर के अनुसार लक्षण
वैसे तो हीट स्ट्रोक किसी को भी हो सकता है लेकिन धूप में काम करने वाले इसका ज्यादा शिकार होते हैं। गर्मी में आमतौर पर पसीना आने से कूलिंग हो जाती है लेकिन लू के मरीज की पहचान यह है कि उसे पसीना बिलकुल नहीं आता। नाड़ी की गति अधिक बढ़ जाने के कारण व्यक्ति के शरीर का तापमान 101-105 तक हो जाता है और शरीर तेज तपने लगता है जोकि लगातार रहता है, घटता नहीं। इससे सिर दर्द, चक्कर आना, जी मिचलाना, अचानक दौरा पड़ना, देखने में परेशानी होना, बेहोशी छाना, लो ब्लड प्रेशर, हार्ट बीट तेज होना लेकिन नाड़ी धीमी हो जाना जैसे लक्षण सामने आते हैं। कई बार तो बेहोशी तक भी आ जाती है।
- डॉ. अश्विनी, सेक्टर-6, पंचकूला
वैसे तो हीट स्ट्रोक किसी को भी हो सकता है लेकिन धूप में काम करने वाले इसका ज्यादा शिकार होते हैं। गर्मी में आमतौर पर पसीना आने से कूलिंग हो जाती है लेकिन लू के मरीज की पहचान यह है कि उसे पसीना बिलकुल नहीं आता। नाड़ी की गति अधिक बढ़ जाने के कारण व्यक्ति के शरीर का तापमान 101-105 तक हो जाता है और शरीर तेज तपने लगता है जोकि लगातार रहता है, घटता नहीं। इससे सिर दर्द, चक्कर आना, जी मिचलाना, अचानक दौरा पड़ना, देखने में परेशानी होना, बेहोशी छाना, लो ब्लड प्रेशर, हार्ट बीट तेज होना लेकिन नाड़ी धीमी हो जाना जैसे लक्षण सामने आते हैं। कई बार तो बेहोशी तक भी आ जाती है।
- डॉ. अश्विनी, सेक्टर-6, पंचकूला
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- फोटो : अमर उजाला
लू लगने पर प्राथमिक उपचार
डाक्टर के अनुसार कोशिश करें कि तेज धूप में न जाएं यदि बहुत जरूरी हो तो शरीर को ढककर और कैप लगाकर ही जाएं। फिर भी यदि लू लग जाए तो पीड़ित व्यक्ति को पहले किसी ठंडी व खुली जगह पर बैठा या लेटा दे, जिससे शरीर का तापमान सामान्य हो जाए। रोगी के शरीर को थोड़ी-थोड़ी देर के बाद गीले तौलिये से पोंछें। यदि लू की समस्या बहुत अधिक गंभीर हो चुकी हो तो रोगी के पूरे शरीर को ठंडे पानी से भीगी एक चादर से लपेटना चाहिए।
डाक्टर के अनुसार कोशिश करें कि तेज धूप में न जाएं यदि बहुत जरूरी हो तो शरीर को ढककर और कैप लगाकर ही जाएं। फिर भी यदि लू लग जाए तो पीड़ित व्यक्ति को पहले किसी ठंडी व खुली जगह पर बैठा या लेटा दे, जिससे शरीर का तापमान सामान्य हो जाए। रोगी के शरीर को थोड़ी-थोड़ी देर के बाद गीले तौलिये से पोंछें। यदि लू की समस्या बहुत अधिक गंभीर हो चुकी हो तो रोगी के पूरे शरीर को ठंडे पानी से भीगी एक चादर से लपेटना चाहिए।
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इनवार्यरमेंट एंड क्लाइमेंट चेंज विभाग के अनुसार
गर्मी तब होती है जब वातावरण में इनहाउस गैस की मात्रा ज्यादा हो जाती है। इससे बचने के लिए हमें ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगाने चाहिए। वातावरण को बचाने में आम आदमी का योगदान बहुत जरूरी है। हमें चाहिए कि यदि एक ही तरफ जा रहे हैं तो पूल सिस्टम अपनाएं और पब्लिक ट्रांसपोर्ट का ज्यादा इस्तेमाल करें। कोशिश करें कि आसपास जाने के लिए साइकिल का प्रयोग करें या फिर पैदल ही जाएं। हम जितना कम पेट्रोल का इस्तेमाल करेंगे उतना ही पर्यावरण में कम हीट होगी। घरों में जरूरत अनुसार ही लाइट जलाएं। अगर आप हर कमरे में बिना जरूरत लाइट जलती रखेंगे तो इससे भी गर्मी उत्पन्न होती है।
- डॉ. आर.के. चौहान, ज्वाइंट डायरेक्टर, इनवार्यरमेंट एंड क्लाइमेंट चेंज विभाग, हरियाणा
गर्मी तब होती है जब वातावरण में इनहाउस गैस की मात्रा ज्यादा हो जाती है। इससे बचने के लिए हमें ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगाने चाहिए। वातावरण को बचाने में आम आदमी का योगदान बहुत जरूरी है। हमें चाहिए कि यदि एक ही तरफ जा रहे हैं तो पूल सिस्टम अपनाएं और पब्लिक ट्रांसपोर्ट का ज्यादा इस्तेमाल करें। कोशिश करें कि आसपास जाने के लिए साइकिल का प्रयोग करें या फिर पैदल ही जाएं। हम जितना कम पेट्रोल का इस्तेमाल करेंगे उतना ही पर्यावरण में कम हीट होगी। घरों में जरूरत अनुसार ही लाइट जलाएं। अगर आप हर कमरे में बिना जरूरत लाइट जलती रखेंगे तो इससे भी गर्मी उत्पन्न होती है।
- डॉ. आर.के. चौहान, ज्वाइंट डायरेक्टर, इनवार्यरमेंट एंड क्लाइमेंट चेंज विभाग, हरियाणा