अगर आप बच्चा प्लान कर रहे हैं तो महिलाओं को यह जानकारी जरूर पढ़नी चाहिए। प्रेग्नेंसी के दौरान उन्हें एक बीमारी हो सकती है, जो नवजात के लिए खतरनाक होगी।
हाल ही में पंजाब के लुधियाना में एक मामला सामने आया, जिसमें महिला के जुड़वां बच्चे उनके गर्भ में ही मर गए। महिला की जान पर भी बन आई थी। 8 महीने का गर्भ होने पर उनका दिल 25 फीसदी काम कर रहा था। वह सांस भी सही ढंग से नहीं ले पा रही थी। जिस कारण उसे सिजेरियन के लिए भी जिंदा रख पाना एक बड़ी चुनौती थी।
मौत के करीब पहुंची चुकी महिला की हालत देखते हुए परिजन उसे लेकर नर्सिंग होम पहुंचे। जांच की गई तो पता चला कि उसके पेट में जुड़वां बच्चे तीन दिन पहले ही मर चुके थे। उसका पीएच (पोटेंशियल हाइड्रोजन ) 6.9 था, जबकि 7 पीएच पर ब्रेन डेड मान लिया जाता है। नार्मल तौर पर यह कम से कम 7.35 पीएच होना चाहिए।
ऐसा हुआ, क्योंकि महिला प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली दुर्लभ बीमारी डायलेटेड कार्डियोमायोपैथी से ग्रस्त थी। कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. रवनिंदर सिंह कूका ने उसका चेकअप किया तो ऐसा लगा कि उसे सीजेरियन के लिए जीवित रख पाना भी बड़ी चुनौती थी, लेकिन अस्पताल की गाइनोकोलॉजिस्ट डॉ. गुरसिमरन कौर ने चुनौती को स्वीकार करते हुए तुरंत सिजेरियन की तैयारी की।
सिजेरियन के दौरान एनासिथिस्ट डॉ. नरेश आनंद लगातार उसकी कंडीशन पर निगरानी रख रहे थे। जब उसे सीजेरियन के बाद आईसीयू में शिफ्ट किया गया तो यहां डॉ. समता गोयल ने मरीज की कंडीशन पर नजर रखी। कम समय में सिजेरियन करके और लगातार उसकी स्थिति पर नजर रखकर डॉक्टरों ने उसकी कंडीशन में रिकीवरी को तेज किया और महिला की जान बच गई।