Breast Cancer Awareness Month 2023 Yoga Asanas: स्तन कैंसर जागरूकता माह अक्तूबर महीने में मनाया जाता है। स्तन कैंसर से संबंधित जागरूकता बढ़ाने और स्तन कैंसर की प्रतिरोधकता बढ़ाने के उद्देश्य से इस जागरूकता माह को मनाते हैं। इसका मुख्य उद्देश्य स्तन कैंसर की पहचान, जागरूकता, जांच, और उपचार के माध्यम से महिलाओं की स्वास्थ्य की देखभाल को प्रोत्साहित करना है।
Yoga Tips: स्तर कैंसर में इन योगासनों से मिल सकता है विशेष लाभ, आप भी कीजिए रोजाना अभ्यास
इस लेख में योग के कुछ विशेष आसन और प्राणायाम बताएं जा रहे हैं, जो स्तर कैंसर के खतरे को कम करने में मददगार हो सकते हैं।
बालासन
बालासन को चाइल्ड पोज के रूप में भी जाना जाता है। यह मुद्रा छाती की मांसपेशियों, कूल्हों, जांघों और पीठ को आराम देती है। स्तन कैंसर के रोगियों के लिए बालासन का अभ्यास लाभदायक हो सकता है। मस्तिष्क को शांत रखने के साथ ही थकान-तनाव से राहत दिलाने में बालासन का अभ्यास कर सकते हैं।
प्राणायाम
शोधकर्ताओं के मुताबिक, ब्रेस्ट कैंसर की समस्या में प्राणायाम के अभ्यास की आदत से लाभ मिल सकता है। रेडिएशन थेरेपी ले रहे स्तन कैंसर रोगियों के लिए प्राणायाम एक सहायक चिकित्सा के तौर पर उपयोगी है। कैंसर कोशिकाओं को बढ़ने से रोकने के अलावा मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने के लिए प्राणायाम के अभ्यास किया जा सकता है।
मत्स्यासन योग
मत्स्यासन योग को हार्ट ओपनर योग कहते हैं, इसका अर्थ है छाती, पसलियों, फेफड़े और पीठ के ऊपरी हिस्से को खोलना। यह स्तनों और पेक्स में लिंफेटिक ड्रेनेज को उत्तेजित करके ब्रेस्ट कैंसर के खतरे को कम करता है। योग विशेषज्ञों के मुताबिक इस योग के नियमित अभ्यास से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ सकती है, जो कैंसर को जोखिम को कम करने में सहायक है।
नोट: यह लेख योगगुरु के सुझावों के आधार पर तैयार किया गया है। आसन की सही स्थिति के बारे में जानने के लिए किसी योगगुरु से संपर्क कर सकते हैं।
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