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World Heritage Day: ऐतिहासिक धरोहरों में शामिल इस जगह पर कभी दुनियाभर से शिक्षा लेने पहुंचते थे लोग, अब सन्नाटा

Sat, 18 Apr 2020 10:42 AM IST
नवनीत राठौर लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: नवनीत राठौर Updated Sat, 18 Apr 2020 10:42 AM IST
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World Heritage Day know about nalanda university world's largest learning center
प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय - फोटो : फाइल फोटो

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की ओर से प्रत्येक वर्ष 18 अप्रैल को विश्व धरोहर दिवस मनाया जाता है। धरोहर दिवस आयोजित करने का मकसद देश में स्थित राष्ट्रीय स्मारकों को संरक्षित करने के साथ ही आने वाली पीढ़ी को समर्पित करना है। यूं कहा जाए तो 18 अप्रैल वो खास दिन है, जो इस बात को याद दिलाता है कि हमें अपने आने वाली पीढ़ियों के लिए ऐतिहासिक और प्राकृतिक धरोहरों को बचाए रखने की कोशिश करते रहना चाहिए। विश्व धरोहर दिवस के खास अवसर पर आज हम आपको  विश्व धरोहर की सूची में शामिल भारत के एक ऐसे जगह के बारे में बताएंगे, जहां केवल सन्नाटा ही पसरा रहता है।

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प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय - फोटो : फाइल फोटो

दरअसल, हम बात कर रहे हैं नालंदा विश्वविद्यालय की। प्राचीन काल में नालंदा दुनिया में अध्ययन का सबसे बड़ा केंद्र था। यहां पर शिक्षा लेने के लिए दुनियाभर से लोग पहुंचते थे। नालंदा विश्वविद्यालय की स्थापना पांचवी शताब्दी ईसवी में गुप्त वंश के शासक कुमार गुप्त ने की थी। यह जगह बिहार की राजधानी पटना से करीब 90 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।

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प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय - फोटो : फाइल फोटो

इतिहास के मुताबिक इस आवासीय अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय में दुनियाभर से आए 10,000 छात्र रह कर शिक्षा लेते थे। इन छात्रों को 2,000 शिक्षक पढ़ाते थे। पांचवी से बारहवीं शताब्दी में नालंदा बौद्ध शिक्षा का प्रमुख केंद्र बन चुका था। सातवीं शताब्दी में ह्वेनसांग भी यहां अध्ययन के लिए आया था।

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प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय - फोटो : फाइल फोटो

नालंदा विश्वविद्यालय का अस्तित्व 12वीं शताब्दी तक बना रहा। इसके बाद तुर्क आक्रमणकारी बख्तियार खिलजी ने ने इसके अस्तित्व को मिटाने के लिए विश्वविद्यालय को जला डाला। इस विश्वविद्यालय में रत्नसागर, रत्नोदधि और रत्नरंजिता नाम से तीन पुस्तकालय (लाइब्रेरी) थे। ऐसा कहा जाता है कि जब विश्वविद्यालय में आग लगी थी तो ये पुस्तकालय छह माह तक जलते रहे थे। वहीं कई विज्ञान की खोज से संबंधित पुस्तकें विदेशी लेकर चले गए थे।

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प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय - फोटो : फाइल फोटो

नालंदा विश्वविद्यालय के अवशेष और इसके ऐतिहासिक महत्व को संरक्षित करने के लिए यूनेस्को ने 15 जुलाई 2016 को इसे वर्ल्ड हेरिटेज साइट में शामिल कर लिया। विश्व धरोहर की सूची में शामिल होने के बावजूद भी सुविधाओं के अभाव के कारण यहां बहुत कम मात्रा में सैलानी पहुंचते हैं।

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