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सावधान: बच्चों में ये 4 बदलाव दिखें तो करा लें खून की जांच, कहीं ये एनीमिया की तरफ इशारा तो नहीं?

Sat, 12 Sep 2026 09:00 AM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Sat, 12 Sep 2026 09:00 AM IST
सार

Anemia In Teenagers: बच्चों-किशोरों में एनीमिया केवल चेहरे के पीलेपन तक सीमित नहीं है। लगातार थकान, कमजोरी, चक्कर, सांस फूलने और पढ़ाई में ध्यान लगाने में परेशानी भी इसके संकेत हो सकते हैं। आयरन की कमी इसका आम कारण है, लेकिन हर एनीमिया आयरन की कमी से नहीं होता, इसलिए जांच जरूरी है।

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Anemia Symptoms in Teenagers How Anemia Affects Teenagers and Their health
बच्चों की बीमारियां - फोटो : Amarujala.com/AI

क्या आपका बच्चा भी हर समय थका-थका सा रहता है, सीढ़ियां चढ़ते ही सांस फूल जाती है या चेहरा भी उतर गया है? इसे सिर्फ पढ़ाई का दबाव और ज्यादा मेहनत का नतीजा मानना सही नहीं है, कई बार ये शरीर की गंभीर समस्या या एनीमिया का संकेत भी हो सकता है।



एनीमिया यानी शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी होना। हीमोग्लोबिन लाल रक्त कोशिकाओं में मौजूद वह प्रोटीन है, जो शरीर के अलग-अलग हिस्सों तक ऑक्सीजन पहुंचाने का काम करता है। इसकी कमी से होने शरीर के हर हिस्से तक ठीक तरीके से ऑक्सीजन युक्त रक्त नहीं पहुंच पाता है, जिसके कारण कई तरह की दिक्कतें शुरू हो जाती हैं।

महिलाओं और किशोरियों में ये समस्या सबसे ज्यादा देखी जाती रही हैं। किशोरियों में मासिक धर्म के कारण आयरन की जरूरत और बढ़ जाती है। भोजन में आयरन की कमी, शरीर में आयरन का ठीक से अवशोषण न होने, संक्रमण या लगातार रक्तस्राव जैसी समस्याएं इसकी वजह बन सकती हैं।

छोटे बच्चे भी इसका शिकार हो सकते हैं, इसलिए सभी लोगों में एनीमिया के लक्षणों पर गंभीरता से ध्यान देते रहना चाहिए।

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एनीमिया की जांच - फोटो : Freepik.com

एनीमिया के कारण हो सकती हैं कई दिक्कतें

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, एनीमिया का असर सिर्फ चेहरे के रंग पर नहीं पड़ता। शरीर को निरंतर पर्याप्त ऑक्सीजन न मिलने से कमजोरी और थकान बढ़ सकती है। गंभीर या लंबे समय तक रहने वाली आयरन की कमी बच्चों और किशोरों के शारीरिक तथा मानसिक विकास को भी प्रभावित कर सकती है। बच्चों, खासतौर पर किशोरियों में इसपर गंभीरता से ध्यान देने की जरूरत होती है।

चेहरे और त्वचा पर इसके स्पष्ट संकेत देखे जा सकते हैं।

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खून की कमी के कारण होने वाली दिक्कतें - फोटो : Freepik.com

एनीमिया का त्वचा पर दिखता है असर

एनीमिया की स्थिति में त्वचा या आंख के अंदर का सफेद हिस्सा सामान्य से ज्यादा पीला दिखने लगता है। इसके साथ कमजोरी, चक्कर आने, सिरदर्द, हाथ-पैर ठंडे होने और थोड़ी मेहनत पर सांस फूलने जैसी दिक्कतें भी हो सकती है। कुछ किशोरों को हर समय नींद या सुस्ती महसूस हो सकती है।
 

  • लेकिन केवल चेहरा देखकर एनीमिया की पुष्टि नहीं की जा सकती। कई बार ये पीलिया का संकेत भी हो सकता है।
  • इसलिए अगर लक्षण लगातार बने हुए हैं तो खून की जांच जरूरी है।
  • एनीमिया की पुष्टि हीमोग्लोबिन की जांच से की जाती है और इसके बाद कारण पता करना भी उतना ही जरूरी है।
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थकान-कमजोरी के कारण - फोटो : Freepik.com

हर समय रहती है थकान 

हीमोग्लोबिन कम होने पर खून की ऑक्सीजन ले जाने की क्षमता घट जाती है। इसका असर शरीर की ऊर्जा और काम करने की क्षमता पर पड़ सकता है। 
 

  • यही वजह है कि एनीमिया से पीड़ित किशोरों को थोड़ी देर मेहनत के बाद ही थकान महसूस हो सकती है। 
  • कई बच्चों के लिए खेलना, सीढ़ियां चढ़ना या लंबे समय तक खड़े रहना तक मुश्किल हो सकता है।
  • अगर बच्चा पहले सामान्य रूप से खेलता था लेकिन अब जल्दी थकने लगा है, बार-बार आराम करना चाहता है या रोजमर्रा के कामों में कमजोरी महसूस करता है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। 
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पढ़ाई में ध्यान न लगने की समस्या - फोटो : Freepik.com

पढ़ाई और ध्यान लगाने में भी होती है दिक्कत

आयरन की कमी और एनीमिया का असर बच्चों में शारीरिक और संज्ञानात्मक विकास पर भी देखा जाता है। संज्ञानात्मक यानी सोचने, समझने, याद रखने और ध्यान लगाने से जुड़ी क्षमता कम हो सकती है।
 

  • अगर बच्चे में थकान के साथ पढ़ाई में ध्यान लगाने में परेशानी, सुस्ती या काम करने की क्षमता में कमी दिखे तो जांच जरूर कराएं। 
  • कई बार इस तरह की दिक्कतें नींद की कमी, तनाव और दूसरी समस्याओं के कारण भी हो सकती हैं। लेकिन लगातार शारीरिक कमजोरी के साथ पढ़ाई प्रभावित हो रही हो तो एनीमिया के जोखिमों को अनदेखा नहीं किया जा सकता।





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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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