भारतीय परिपेक्ष्य में एक वाहन के रूप में साइकिल का अहम स्थान है। स्कूल, कॉलेज से लेकर कार्यस्थल तक जाने के लिए साइकिल पसंदीदा सवारी होती है। साइकिल चलाना हमारे सेहत के लिए तो फायदेमंद है ही, पर्यावरण के लिए भी अच्छा है। हर साल तीन जून को अंतर्राष्ट्रीय विश्व साइकिल दिवस मनाया जाता है। लोगों को प्रेरित किया जाता है कि आसपास की दूरी तय करने के लिए साइकिल का इस्तेमाल करें। खासकर शहरों में कम दूरी तय करने के लिए बाइक या डीजल-पेट्रोल आधारित अन्य वाहनों की जगह साइकिल का इस्तेमाल किया जाए तो हर दिन हजारों लीटर पेट्रोल की खपत कम होगी और शहर का प्रदूषण स्तर भी कम होगा। खासकर कोरोना काल में साइकिल का महत्व और बढ़ गया है। इससे सोशल डिस्टेंसिंग का पालन भी होगा और लोग सुरक्षित रहेंगे। आइए, जानते हैं इस खास दिवस के इतिहास और साइकिल चलाने के फायदों के बारे में:
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World Bicycle Day 2020: जानें इसका इतिहास, साइकिल चलाने से बढ़ती है इम्यूनिटी, और भी कई फायदे
Wed, 03 Jun 2020 09:25 PM IST
निलेश कुमार
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: निलेश कुमार
Updated Wed, 03 Jun 2020 09:25 PM IST
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हर साल तीन जून को अंतर्राष्ट्रीय विश्व साइकिल दिवस मनाया जाता है।
- फोटो : PTI
एमटीबी हिमालयन साइकिल रेस(File Photo)
- फोटो : अमर उजाला
पहला साइकिल दिवस
संयुक्त राष्ट्र की ओर से पहला आधिकारिक विश्व साइकिल दिवस तीन जून, 2018 को मनाया गया था। भारत में भी पिछले दो साल उत्साह के साथ यह दिवस मनाया गया है। परिवहन के एक सरल, किफायती, भरोसेमंद और पर्यावरण की सुरक्षा को प्रोत्साहित करने के लिए यह दिवस मनाया जाता है। कोरोना काल में इस दिवस की प्रासंगिकता बढ़ गई है।
साइकिल
- फोटो : Pixabay
साइकिल का इतिहास
- यूरोपीय देशों में साइकिल के प्रयोग का विचार 18वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में ही लोगों के दिमाग में आ चुका था। हालांकि सर्वप्रथम साल 1816 में पेरिस के एक कारीगर ने इसे मूर्तरूप दिया। इसे हॉबी हॉर्स यानी काठ का घोड़ा कहा गया।
- पैर से घुमाए जानेवाले पैडल युक्त पहिए का आविष्कार साल 1865 में पेरिस के लालेमें (Lallement)ने किया। इसे वेलॉसिपीड (velociped) कहा गया। इसे चलाने पर बहुत थकावट होने के कारण इसे हाड़तोड (bone shaker) भी कहा जाने लगा।
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साइकिल
- फोटो : Pixabay
- वेलॉसिपीड के लोकप्रिय होने और मांग बढ़ने के कारण इंग्लैंड, फ्रांस और अमेरिका के यंत्र निर्माताओं ने इसमें बहुत सारे सुधार किए और साल 1872 में एक सुंदर रूप दे दिया। इसमें लोहे की पतली पट्टी के तानयुक्त पहिए लगाए गए। आगे का पहिया 30 इंच से लेकर 64 इंच व्यास तक और पीछे का पहिया लगभग 12 इंच के व्यास का होता था। इसमें क्रैंकों के अतिरिक्त गोली के वेयरिंग और ब्रेक भी लगाए गए थे। यह आधुनिक साइकिल कहा गया। आज दुनियाभर में कई तरह के साइकिल उपलब्ध हैं।
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साइकिल की सवारी
- फोटो : WordPress
भारत में साइकिल से तरक्की
- भारत में साइकिल के पहियों ने आर्थिक तरक्की में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आजादी के बाद कई दशकों तक साईकिल यातायात का जरूरी हिस्सा रही। 1960 से लेकर 1990 तक भारत में ज्यादातर परिवारों के पास साइकिल थी। यह महत्वपूर्ण और किफायती साधन था।