महिलाओं की प्रेग्नेंसी किसी बड़ी खुशखबरी से कम नहीं होती है। बच्चे को जन्म देकर वह परिवार की नस्ल आगे बढ़ाती है। ऐसे में परिवार वालों का काम होता है कि वह मां बनने वाली महिला का खूब ख्याल रखें और उसे खूब प्यार करें।
Women's Day: "पपीता न खाने" से लेकर "सी-सेक्शन खतरे में डालता है" तक, पहले ही जानिए प्रेग्नेंसी के 5 बड़े मिथक
Myths about Women Health: प्रेग्नेंसी के दौरान बहुत सी बातें कही और सुनी जाती हैं, जिनमें से कुछ सही होती हैं और कुछ सिर्फ मिथक होते हैं। कई बार लोग बिना किसी वैज्ञानिक आधार के चीजों पर विश्वास कर लेते हैं, जिससे भ्रम की स्थिति बन जाती है।
1. पपीता खाने से होता है मिसकैरेज
यह सबसे आम मिथक है, लेकिन पूरी तरह सच नहीं है। कच्चे पपीते में लैटेक्स नामक पदार्थ होता है, जो गर्भाशय को संकुचित कर सकता है, लेकिन पका हुआ पपीता खाने में कोई नुकसान नहीं होता। पका हुआ पपीता फाइबर और विटामिन से भरपूर होता है, जो पाचन और इम्यूनिटी के लिए फायदेमंद है।
2. प्रेगनेंसी में केसर वाला दूध पीने से बच्चा गोरा होगा
केसर से त्वचा का रंग निखर सकता है, लेकिन यह भ्रूण के रंग को प्रभावित नहीं करता। बच्चे का रंग जेनेटिक्स पर निर्भर करता है, न कि खाने-पीने की चीजों पर। हां, केसर से ब्लड सर्कुलेशन बेहतर हो सकता है और यह तनाव कम करने में मदद करता है।
3. गर्भावस्था में ज्यादा मूवमेंट मतलब बच्चा हाइपरएक्टिव होगा
शिशु का मूवमेंट उसकी हेल्थ और एक्टिवनेस दिखाता है, लेकिन यह भविष्य में हाइपरएक्टिव होने का संकेत नहीं है। तीसरी तिमाही में बेबी के मूवमेंट बढ़ जाते हैं, जो उसकी सामान्य ग्रोथ का हिस्सा होता है।
4. प्रेग्नेंसी में ज्यादा खाओ, क्योंकि अब दो लोगों का खाना है
यह गलत धारणा है कि गर्भवती महिला को "दो लोगों का खाना" खाना चाहिए। सही तरीका यह है कि पोषक तत्वों से भरपूर संतुलित आहार लिया जाए। ज्यादा खाने से वजन जरूरत से ज्यादा बढ़ सकता है, जिससे जेस्टेशनल डायबिटीज और अन्य समस्याएं हो सकती हैं।
5. सी-सेक्शन डिलीवरी से मां और बच्चे को ज्यादा खतरा होता है
सी-सेक्शन एक सुरक्षित सर्जरी है, जब नॉर्मल डिलीवरी संभव न हो। हालांकि, बिना जरूरत के सी-सेक्शन से कुछ जोखिम हो सकते हैं, लेकिन सही मेडिकल गाइडेंस में यह सुरक्षित होता है। इसलिए, बिना किसी डर के डॉक्टर की सलाह के अनुसार डिलीवरी का तरीका तय करें।
इस बात का रखें खास ध्यान
प्रेग्नेंसी के दौरान कई मिथक प्रचलित हैं, लेकिन हर चीज को बिना जांचे-परखे मान लेना सही नहीं है। किसी भी तरह की जानकारी के लिए डॉक्टर से सलाह लेना ही सबसे बेहतर होता है।
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