बीबीसी की एक रिपोर्ट में क्लोई बर्ज कहती हैं कि ट्रैवेल जर्नलिस्ट के रूप में मैं, जब भी हवाई सफर करती हूं तो एक नैतिक दुविधा होती है। मुझे धरती के भविष्य की चिंता रहती है। मैंने अपनी यात्राएं कम कर दी हैं। जब भी मुझे मौका मिलता है मैं पर्यावरण संरक्षण की कहानियां कवर करती हूं।
कोरोना दौर के बाद कितनी बदल जाएंगी यात्राएं
- कुदरत मुस्कुराई
सैलानियों की नावों का ट्रैफिक घटने से वेनिस के जलमार्ग पहले से बहुत साफ दिखने लगे हैं (हालांकि नहर में डॉल्फिन घूमने की तस्वीरें वहां से 800 किलोमीटर दूर सार्डीनिया की हैं)। CREA के मुताबिक भारत में 22 मार्च के देशव्यापी जनता कर्फ्यू के दिन नाइट्रोजन डायऑक्साइड न्यूनतम स्तर पर आ गया।
उत्तरी अमरीका में भी आर्थिक गतिविधियां कम होने से ऐसे ही नतीजे दिखने के आसार हैं। यकीनन, ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन कम करने के लिए वैश्विक स्वास्थ्य संकट कोई उपाय नहीं है। फिर भी, हमारे पास यह सोचने का मौका है कि यात्रा और पर्यटन जैसी गतिविधियों का धरती पर क्या असर पड़ता है।
गैर-जरूरी यात्राओं पर पाबंदी से हवाई जहाज कम उड़ रहे हैं। उड़ानों की तादाद घट गई है। कुछ कंपनियों के ऑपरेशन पूरी तरह बंद हो गए हैं। उड़ान घटने से पर्यावरण पर कितना असर पड़ा, इसके आंकड़े अभी नहीं आए हैं, फिर भी हमें पता है कि इसका बड़ा प्रभाव पड़ा होगा।
- कितनी उड़ान सही है?
लुंड यूनिवर्सिटी सेंटर फॅार सस्टेनेबिलिटी स्टडीज इन स्वीडन (LUCSUS) और यूनिवर्सिटी ऑफ ब्रिटिश कोलंबिया के 2017 के अध्ययन के मुताबिक ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन कम करने के तीन निजी विकल्प हैं- हवाई सफर, सड़क यातायात और मांस की खपत कम करना।
"नेचर क्लाइमेट चेंज" में छपी 2018 की एक रिपोर्ट से पता चलता है परिवहन से वैश्विक कार्बन उत्सर्जन का 8 फीसदी उत्सर्जन होता है, इसमें सबसे बड़ा हिस्सा हवाई उड़ानों का होता है। LUCSUS की वैज्ञानिक किंबरली निकोलस कहती हैं, "हम दो ही चीजें कर सकते हैं- उड़ानें बंद कर दें या कम कर दें."।
न्यूयॉर्क से लदंन और वापसी की उड़ान में दो साल मांस खाने के बराबर कार्बन उत्सर्जन होता है। इन चौंकाने वाले आंकड़ों और लॉकडाउन के दौरान पर्यावरण में दिखे संकेतों से सवाल उठता है कि हम फिर हवाई सफर कब कर पाएंगे और क्या हमें करना चाहिए?
निकोलस कहती हैं, "विमानन उद्योग के मौजूदा कारोबार के साथ सुरक्षित जलवायु का कोई रास्ता नहीं है." यदि हम 2030 तक ग्लोबल वॉर्मिंग को पूर्व-औद्योगिक काल के स्तर से 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित रखने के पेरिस समझौते का लक्ष्य हासिल करना चाहते हैं तो हमें यात्रा के तरीके बदलने की जरूरत है।
कुछ एयरलाइन कंपनियां जैव ईंधन और बिजली से चलने वाले हवाई जहाज बनाने पर शोध कर रही हैं।
- तकनीक में कितने विकल्प?
कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी में ऊर्जा, पर्यावरण और अर्थव्यवस्था नीति संस्थान के उप निदेशक कॉलिन मर्फी का कहना है कि हवाई जहाजों को फिर से डिजाइन करके ज्यादा सक्षम बनाने की संभावनाएं हैं। पारंपरिक पेट्रोल की तुलना में अपशिष्ट तेल, जैव ईंधन ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन 60 फीसदी कम करते हैं।
जैव ईंधन तैयार करने के लिए बड़े पैमाने पर जमीन की जरूरत होगी। बिजली से हवाई जहाज उड़ाने की संभावना ज्यादा है, लेकिन बैटरी की सीमित तकनीक का मतलब है कि लंबी दूरी की उड़ानों के लिए यह व्यावहारिक समाधान नहीं है।
यदि हम इन तकनीकी आविष्कारों में सफल हो जाते हैं तो भी निजी तौर पर यात्रा को लेकर हमें अपना नजरिया बदलने की जरूरत है। धरती इन दिनों सांस लेती हुई दिख रही है, उसी तरह हमें भी अपने अंदर झांककर देखने का मौका मिला है। कोरोना वायरस ने हमें यह देखने के लिए मज़बूर किया है कि दुनिया के लोग, व्यवस्थाएं और संगठन एक-दूसरे से कितने जुड़े हैं।
- दूर से पहले पास में घूमें
"मैं पर्यटन की तादाद घटने और इसकी गुणवत्ता बढ़ने के पक्ष में हूं, जिसमें लोग अपने गंतव्य को अच्छे से समझें, सकारात्मक असर छोड़ें, न कि भीड़-प्रदूषण बढ़ाएं और वन्यजीवों को नुकसान पहुंचाएं।" आसपास की जगहों में रोमांच तलाश करके भी हम यात्रा से जुड़े पर्यावरणीय तनाव को कम कर सकते हैं।
निकोलस कहते हैं, "मैं पहले बहुत अधिक उड़ान भरता था लेकिन अब मैंने उसी तरह की नवीनता और रोमांच पाने के लिए दूसरे रास्ते खोज लिए हैं। मूल रूप से यह धीमी यात्रा है।" यह ठीक वैसा ही लग सकता है जैसे मेक्सिको के सागर तटों तक जाने की बजाय अपने समुद्र तटों पर आनंद लें।
जब हम हवाई सफर करते हैं तो हम कार्बन ऑफसेट खरीद सकते हैं। मर्फी इसे मददगार बताते हैं। "उत्सर्जन कम करने में ये सफ़र कम करने जितने मददगार नहीं हैं यानी आप नुकसान की पूरी भरपाई नहीं कर रहे, फिर भी ये मददगार हैं।"
ऑफसेट खरीदते समय ध्यान रखें कि ऐसी परियोजना को दान दें जो पहले से मौजूद नहीं है। मिसाल के लिए, जब आप वनों को संरक्षित करने के लिए दान दे रहे हैं तो यह देख लें कि कहीं वह जमीन वैसे भी संरक्षित तो नहीं होने जा रही थी।
हम कैसे उड़ान भरते हैं, यह भी मायने रखता है। बिजनेस क्लास में अतिरिक्त लेगरूम होने का मतलब है कि प्लेन में कम यात्रियों के लिए जगह।