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Hindi News ›   Lifestyle ›   Food ›   Hindi Diwas 2026: From Village Kitchens to Modern Tables: 7 Traditional Indian Food Terms

हिंदी दिवस 2026: हर राज्य की रसोई की अपनी भाषा, जानें 7 पारंपरिक शब्द और उनकी दिलचस्प कहानी

Fri, 11 Sep 2026 03:53 PM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिवानी अवस्थी Updated Fri, 11 Sep 2026 03:53 PM IST
सार

Hindi diwas food words: भारत की खान-पान संस्कृति को केवल रेसिपी और स्वाद से नहीं समझा जा सकता। इसके लिए उन शब्दों को भी जानना जरूरी है, जो पीढ़ियों से घरों, रसोइयों और स्थानीय बोलियों में इस्तेमाल होते आए हैं

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Hindi Diwas 2026: From Village Kitchens to Modern Tables: 7 Traditional Indian Food Terms
खाने के 7 शब्द - फोटो : Ai

विस्तार

भारत की पहचान उसकी भाषाओं, बोलियों और खान-पान की विविधता से होती है। यहां कुछ किलोमीटर की दूरी तय करते ही बोली का अंदाज बदल जाता है और रसोई का स्वाद भी। यही वजह है कि भारतीय खान-पान केवल व्यंजनों का संग्रह नहीं, बल्कि शब्दों और कहानियों की भी एक समृद्ध दुनिया है। एक ही चीज को अलग-अलग राज्यों में अलग नामों से पुकारा जाता है, तो कई शब्द ऐसे हैं जिनके पीछे पूरे इलाके की संस्कृति, परंपरा और जीवनशैली की कहानी छिपी होती है। कहीं नाश्ते को “कलेवा” कहा जाता है, तो कहीं खाने के लिए “चटोरापन” जैसे शब्द स्वाद की पूरी दुनिया बयां कर देते हैं।

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हिंदी भाषा की खूबसूरती भी यही है कि इसमें अलग-अलग क्षेत्रों की बोलियों और स्थानीय शब्दों का रंग घुला हुआ है। राजस्थान, बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और अन्य राज्यों की भाषाई परंपराओं ने खान-पान से जुड़े अनेक शब्द दिए हैं। ये शब्द केवल खाने का नाम नहीं बताते, बल्कि उस भोजन से जुड़े अपनापन, मौसम, खेती, घर-परिवार और स्थानीय संस्कृति को भी अपने भीतर समेटे हुए हैं।

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आज की आधुनिक और फास्ट-फूड वाली दुनिया में इन पारंपरिक शब्दों को जानना भारत के स्वाद और संस्कृति की जड़ों को समझने जैसा है। आइए जानते हैं देश के अलग-अलग हिस्सों से जुड़े ऐसे 7 पारंपरिक शब्द और उनके पीछे छिपी स्वादिष्ट कहानियां।

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1. कलेवा
 

उत्तर प्रदेश, राजस्थान और आसपास के कई इलाकों में “कलेवा” शब्द का इस्तेमाल भोजन, विशेषकर सुबह के हल्के खाने या नाश्ते के संदर्भ में किया जाता है। गांवों और पारंपरिक परिवारों में सुबह काम पर निकलने से पहले किया गया भोजन कलेवा कहलाता रहा है।

 

कलेवा केवल पेट भरने की जरूरत नहीं, बल्कि घर के अपनापन का प्रतीक भी है। इसमें रोटी, पराठा, दही, सब्जी या स्थानीय पकवान शामिल हो सकते हैं। आज भले ही ब्रेकफास्ट शब्द ज्यादा प्रचलित हो गया हो, लेकिन कलेवा शब्द में घर की रसोई और परिवार के साथ जुड़ा एक अलग ही भाव छिपा है।
 

2. चूल्हे का खाना
 

भारत के कई ग्रामीण इलाकों में आज भी चूल्हे का खाना केवल खाना पकाने के तरीके को नहीं, बल्कि एक खास स्वाद को दर्शाता है। मिट्टी के चूल्हे पर धीमी आंच में बनी दाल, रोटी या सब्जी का स्वाद पारंपरिक रसोई की पहचान रहा है।
 

राजस्थान से लेकर मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और बिहार के गांवों तक चूल्हे की रसोई से परिवार और परंपरा जुड़ी रही है। लकड़ी या उपलों की धीमी आंच पर बनने वाले भोजन को लेकर लोगों के बीच आज भी खास आकर्षण देखने को मिलता है।
 

3. चटनी
 

भारत के अलग-अलग हिस्सों में चटनी शब्द और उसका स्वाद दोनों ही बेहद लोकप्रिय हैं। हरी धनिया की चटनी हो, नारियल की, मूंगफली की या फिर टमाटर की, हर क्षेत्र में इसका अलग रूप देखने को मिलता है।
 

उत्तर भारत में धनिया और पुदीने की चटनी खाने का स्वाद बढ़ाती है, तो दक्षिण भारत में नारियल की चटनी नाश्ते का जरूरी हिस्सा मानी जाती है। चटनी शब्द भारतीय खान-पान की उस परंपरा को दिखाता है, जहां थोड़ी-सी चीज भी पूरे भोजन का स्वाद बदल सकती है।
 

4. चोखा
 

बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश की रसोई का एक बेहद लोकप्रिय शब्द है चोखा। बैंगन, आलू या टमाटर को भूनकर तैयार किए जाने वाले इस व्यंजन का स्वाद मिट्टी और धुएं की खुशबू से जुड़ा होता है।
 

लिट्टी-चोखा का नाम आज देशभर में लोकप्रिय है। चोखा शब्द सिर्फ एक डिश नहीं, बल्कि बिहार की पारंपरिक रसोई और ग्रामीण जीवन की पहचान बन चुका है। इसमें साधारण सामग्री से शानदार स्वाद तैयार करने की भारतीय कला दिखाई देती है।
 

5. भाकरी

महाराष्ट्र और आसपास के क्षेत्रों में भाकरी पारंपरिक भोजन का अहम हिस्सा है। इसे ज्वार, बाजरा या अन्य अनाजों से बनाया जाता है और यह ग्रामीण जीवन तथा स्थानीय खेती से गहराई से जुड़ी हुई है।
 

भाकरी के साथ पिठला, सब्जी या चटनी परोसने की परंपरा महाराष्ट्र के कई हिस्सों में देखने को मिलती है। यह शब्द हमें बताता है कि किसी क्षेत्र का भोजन वहां की जमीन और फसलों से कितना गहरा संबंध रखता है।
 

6. खिचड़ी
 

खिचड़ी शब्द भारत के अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग स्वाद और रूप में मिलता है। चावल और दाल से बनने वाला यह व्यंजन साधारण जरूर है, लेकिन इसकी पहचान पूरे देश में फैली हुई है।
 

बिहार, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और गुजरात समेत कई राज्यों में खिचड़ी के अलग-अलग रूप मिलते हैं। कहीं इसे त्योहारों और विशेष अवसरों पर बनाया जाता है, तो कहीं इसे हल्के और आरामदायक भोजन के रूप में पसंद किया जाता है। खिचड़ी भारतीय रसोई की उस खूबसूरती का उदाहरण है, जहां सादगी भी स्वादिष्ट हो सकती है।
 

7. बाटी
 

राजस्थान का नाम आते ही दाल-बाटी का स्वाद याद आना स्वाभाविक है। बाटी गेहूं के आटे से तैयार की जाती है और पारंपरिक रूप से इसे धीमी आंच या उपलों पर पकाया जाता रहा है।


 

राजस्थान के शुष्क मौसम और स्थानीय जीवनशैली के अनुरूप विकसित यह भोजन आज देशभर में लोकप्रिय है। घी, दाल और चूरमा के साथ परोसी जाने वाली बाटी केवल एक डिश नहीं, बल्कि राजस्थान की मेहमाननवाजी और समृद्ध खान-पान संस्कृति का प्रतीक है।

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