Badrinath Tourist Places उत्तराखंड की चारधाम यात्रा शुरू हो गई है। केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं। ऐसे में कई लोग इन खूबसूरत नजारों को देखने और ईश्वर के दर्शन के लिए चारों धाम जाने की योजना रहे होंगे। उत्तराखंड के चार धामों में बद्रीनाथ मंदिर, केदारनाथ मंदिर, गंगोत्री और यमुनोत्री मंदिर के नाम शामिल हैं। इसमें केदारनाथ और बद्रीनाथ की तस्वीरें सबसे अधिक देखने को मिलती हैं। यहां के सुंदर नजारे, मंदिर के पीछे बर्फ से ढकी पहाड़ियां और घोड़े व पालकी पर बैठ दर्शन के लिए जाते यात्री देखकर ही मन प्रफुल्लित हो जाता है। हालांकि लोगों को इनके आसपास के पर्यटन स्थलों के बारे में अधिक जानकारी नहीं। यात्री बद्रीनाथ धाम तक जाते हैं और मंदिर के दर्शन कर लौट आते हैं। लेकिन इस बार अगर बद्रीनाथ जाएं तो आसपास की कुछ अन्य जगहों को भी एक्सप्लोर करें। बद्रीनाथ मंदिर के पास बहुत अद्भुत जगहें हैं, जहां घूमकर आपकी ट्रिप बहुत यादगार और मजेदार बन जाएगी। ये रहीं बद्रीनाथ धाम के आसपास की अद्भुत जगहें।
Badrinath Tourist Places: बद्रीनाथ जाएं तो आसपास की इन अद्भुत जगहों का जरूर करें भ्रमण
नीलकंठ चोटी
उत्तराखंड की सबसे प्रमुख चोटियों में नीलकंठ का नाम शामिल है। यहां कई अद्भुत दृश्य देखने को मिलते हैं। नीलकंठ चोटी अद्भुत ट्रैक के लिए काफी प्रसिद्ध है। बद्रीनाथ आने वाले यात्री नीलकंठ चोटी घूमने जा सकते हैं। यह जगह आपके सफर को रोमांचक बना देगी।
चरण पादुका
बद्रीनाथ शहर से सिर्फ तीन किलोमीटर की दूरा पर चरण पादुका पर्वत है। यहां भगवान विष्णु के पदचिन्ह देखने को मिलते हैं। यह शिलाखंड एक धार्मिक स्थल है। इस जगह से जुड़ी कई मान्यताएं हैं। वहीं यहां से कई सुंदर नजारे देखने को मिलते हैं।
वसुधारा फॉल्स
बद्रीनाथ से किलोमीटर दूर माणा गांव में वसुधारा जलप्रपात स्थित है। इस झरने की ऊंचाई 12000 फीट है। कहते हैं कि यहां पांडवों ने विश्राम किया था। वसुधारा फॉल्स तक पहुंचने के लिए 6 किलोमीटर की ट्रैकिंग करनी पड़ती है। रास्ते में माणा गांव में सरस्वती नदी बहती दिख जाएगी। बद्रीनाथ से माणा गांव तक 3 किमी टैक्सी से पहुंचा जा सकता है और आगे दो घंटे की ट्रैकिंग है।
व्यास गुफा
बद्रीनाथ मंदिर से कुछ ही दूरी पर व्यास गुफा स्थित है। व्यास गुफा बेहद खास और लोकप्रिय पर्यटन स्थल है। पौराणिक कथा के मुताबिक, यहां ऋषि व्यास ने भगवान गणेश की मदद से महाकाव्य महाभारत की रचना की थी। यहां पहुंचने के लिए ट्रैकिंग करनी पड़ती है।