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कोरोना के कारण नहीं हो पाया भारत के इन 4 प्रसिद्ध मेलों का आयोजन, पर्यटक हुए निराश

Sat, 19 Dec 2020 09:25 AM IST
तेजस्वी मेहता लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: तेजस्वी मेहता Updated Sat, 19 Dec 2020 09:25 AM IST
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this 4 famous fairs were not organised this year because of corona
भारत के प्रमुख मेले

किसे अच्छा नहीं लगता मेलों में घूमना, झूलना, खरीददारी करना एवं चाट खाकर घर लौट जाना लेकिन इस वर्ष कोरोना ने हम में से किसी को भी कोरोना के कारण यह अवसर नहीं मिल पाया। भारत में कई मेले ऐसे हैं जो प्राचीन तो हैं ही साथ ही उनका आयोजन भी बहुत बड़े स्तर पर होता है। इन मेलों में न सिर्फ भारतीय शामिल होते हैं बल्कि विदेशी पर्यटक भी इन मेलों को देखने बड़ी दूर- दूर से आते हैं। इस साल तो मेलाप्रेमियों को मेले का आनंद लेने का अवसर नहीं प्राप्त हुआ लेकिन सभी को उम्मीद है कि अगले वर्ष जरूर सबकुछ इतना सामान्य हो जाएगा कि सब इन मेलों में शामिल हो सकेंगे। अगली स्लाइड्स से जानिए भारत के इन प्रमुख मेलों के बारे में। 

 

 

 

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सोनपुर मेला - फोटो : amar ujala

सोनपुर मेला
सोनपुर मेले का प्रतिवर्ष नवंबर या दिसंबर माह में आयोजन होता है। मेला कार्तिक पूर्णिमा के समय प्रारम्भ होता है और महीने के दो सप्ताह तक चलता है। पूरे देश और दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से जानवर प्रेमी इस मेले में हिस्सा लेने के लिए आते हैं। मेले में कुत्ते, भैंस, तरह- तरह के घोड़े,ऊंट आदि जानवरों की प्रदर्शनी लगती है। कई विदेशी लोग मेले में करतब बताकर लोगों का ध्यान आकर्षित करते हैं। 

 

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यहां के मेले में विदेशी ऊंट भी आते हैं - फोटो : social media

पुष्कर मेला
ऐसा माना जाता है कि पुष्कर मेला भारत के प्राचीनतम मेलों में से एक है। राजस्थान के पुष्कर शहर में अक्टूबर-नंवबर माह में इस मेले का भव्य आयोजन होता है। यह मेला भी जानवर प्रेमियों के लिए ही है लेकिन ऊंटों की खरीद-फरोख्त यहां ज्यादा होती  है। यहां के मेले में विदेशी ऊंट भी आते हैं। मेले में ‘मटका फोड़' और गर्म हवा के गुब्बारे फुलाने की प्रतियोगिता का भी आयोजन होता है।

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गणगौर मेला - फोटो : सोशल मीडिया

गणगौर मेला
गणगौर राजस्थान के सबसे प्रसिद्ध त्यौहारों में से एक है। गणगौर का मेला जयपुर, जोधपुर, बीकानेर, नाथद्वारा जैसे कई स्थानों पर एकसाथ आयोजित किया जाता है। यह त्यौहार होली के दूसरे दिन से ही शुरू हो जाता है, जो कि आने वाले 16 दिनों तक मनाया जाता है। गणगौर महिलाओं के उत्सव के रुप में भी जाना जाता है। मेले में कई सारे बड़े झूले लगते हैं, जिनपर कुंवारी कन्याएं खूब झूलती हैं।

 

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गोवा कार्निवल मेला - फोटो : अमर उजाला
गोवा कार्निवल मेला
गोवा कार्निवल मेले का युवाओं के बीच काफी उत्साह रहता है। इसका आयोजन 3 से 4 दिनों के लिए होता है। गोवा भारत का एक मात्र ऐसा राज्य है जहाँ कार्निवल उत्सव का आयोजन किया जाता है। मार्च के महीने में आयोजित होने वाले इस शानदार उत्सव में लाइव संगीत, नृत्य, रंगीन मुखौटे और कपड़े एक अभिन्न अंग हैं। इस मेले की शुरुआत गोवा में रहने वाले पुर्तगालियों द्वारा की गई थी। इन दिनों गोवा की साज-सज्जा भी देखने लायक होती है। 
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