एक से 16 फरवरी तक चलने वाले 34वें सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय हस्तशिल्प मेला शुरू हो चुका है और बड़ी संख्या में लोग यहां पहुंच रहे हैं। इस मेले में लोग देश-विदेश की लोक संस्कृतियों से रूबरू हो सकेंगे। इस बार मेले में उज्बेकिस्तान पार्टनर कंट्री के तौर पर शामिल है। पहली बार सूरजकुंड इंग्लैंड के कलाकारों और शिल्पकारों की मेजबानी करेगा। इस बार 40 देशों के कलाकार व शिल्पकार मेले में हिस्सा ले रहे हैं। आइए जानते हैं कि आप कैसे यहां पहुंच सकते हैं और इस मेले की खासियतें क्या है:
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साल 1987 में पहली बार सूरजकुंड मेले का आयोजन किया गया था। 34 सालों में यह मेला अंतरराष्ट्रीय स्वरूप ले चुका है। इस मेले का उद्देश्य कलाकारों को एक ऐसा मंच प्रदान करना है, जो काश्तकारों व बुनकरों के हाथों से बने सामान को सीधा उपभोक्ताओं तक पहुंचाया जा सके। मेले में देश-विदेश के करीब 1100 शिल्पकार के शामिल हो रहे हैं।
देश विदेश की कला संस्कृति का तड़का
सूरजकुंड मेले में इस बार हिमाचल प्रदेश बतौर थीम स्टेट और उज्बेकिस्तन पार्टनर कंट्री के रूप में शामिल हो रहा है। हिमाचल की कला संस्कृति को दर्शाने के लिए करीब 200 कलाकार मेला परिसर में अलग-अलग समय पर चौपाल पर प्रस्तुति देंगे। इनके अलावा नॉर्थ जोन कल्चरल सेंटर, हरियाणा के अलावा विभिन्न प्रदेशों से आए कलाकार प्रस्तुति देंगे। चौपाल के अलावा शाम को नाट्यशाला पर भी सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए जाएंगे।
मेले में होगा भरपूर मनोरंजन
मेले में अफगानिस्तान, आर्मेनिया, बांग्लादेश, भूटान, मिस्त्र, इथोपिया, घाना, कजाकिस्तान, नेपाल, रूस, दक्षिण अफ्रीका, श्रीलंका, सुडान, सीरिया, तजाकिस्तान, थाईलैंड, ट्यूनीशिया, तुर्की, युगांडा, युनाइटेड किंगडम, वियतनाम, जिम्बाव्बे, मलावी आदि के लोक कलाकार दर्शकों के मनोरंजक प्रस्तुति देंगे।
यहां से मिलेगी बस
दिल्ली की ओर से जाने के लिए आपको गुरुग्राम या फरीदाबाद से मेले के लिए सीधी बस सेवा उपलब्ध रहेगी। हरियाणा के अन्य क्षेत्रों से भी मेला एक्सप्रेस बसें चलाई जाएंगी। मेट्रो से आने वाले दर्शक तुगलकाबाद मेट्रो स्टेशन उतरकर वहां से सूरजकुंड पहुंचा जा सकता है। मेट्रो स्टेशन से मेला और मेले से मेट्रो स्टेशन तक के लिए बस सेवा उपलब्ध रहेगी।