नींद: क्या आप भी छुट्टी के दिन 10-11 बजे सोकर उठते हैं? जानिए ज्यादा नींद का असली कारण
Weekend Sleepover : जब कोई व्यक्ति अपनी जरूरत से कम सोता है तो नींद की कमी धीरे-धीरे जमा होती रहती है, जिसे स्लीप डेब्ट कहा जाता है। छुट्टी के दिन ज्यादा सोना इसी कमी के बाद शरीर की नींद की जरूरत का एक संकेत हो सकता है।
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Extra Sleep On Holidays: क्या आपने कभी महसूस किया है कि छुट्टी वाले दिन अलार्म बजने के बावजूद बिस्तर छोड़ने का मन नहीं करता? कामकाजी दिनों में समय पर उठने वाला व्यक्ति छुट्टी के दिन कई घंटे ज्यादा सोना चाहता है। ऐसा सिर्फ आलस की वजह से नहीं होता। इसके पीछे नींद की कमी, शरीर की जैविक घड़ी और जमा हुआ ‘स्लीप डेब्ट’ जैसे कारण हो सकते हैं।
जब कोई व्यक्ति अपनी जरूरत से कम सोता है तो नींद की कमी धीरे-धीरे जमा होती रहती है, जिसे स्लीप डेब्ट कहा जाता है। छुट्टी के दिन ज्यादा सोना इसी कमी के बाद शरीर की नींद की जरूरत का एक संकेत हो सकता है।
इसके अलावा, हमारे शरीर में लगभग 24 घंटे की जैविक घड़ी होती है, जो रोशनी और अंधेरे जैसे संकेतों से प्रभावित होती है। सप्ताह के दिनों में जल्दी उठने और छुट्टी में देर से उठने का अंतर इस रिदम को प्रभावित कर सकता है। आइए जानते हैं आखिर छुट्टी के दिन नींद ज्यादा क्यों आती है और क्या हर वीकेंड देर तक सोना ठीक है? आइए समझते हैं।
1. सप्ताहभर की नींद पूरी नहीं हो पाती
अगर कोई व्यक्ति लगातार अपनी जरूरत से कम सो रहा है, तो छुट्टी वाले दिन शरीर ज्यादा आराम मांग सकता है। NIH के मुताबिक, वयस्कों को आम तौर पर कम से कम 7 घंटे की नींद की जरूरत होती है, हालांकि व्यक्तिगत जरूरत अलग हो सकती है।
यही वजह है कि सोमवार से शुक्रवार तक कम नींद लेने वाला व्यक्ति शनिवार या रविवार को स्वाभाविक रूप से ज्यादा देर तक सो सकता है।
2. शरीर की ‘स्लीप ड्राइव’ बढ़ जाती है
जितने ज्यादा समय तक हम जागते रहते हैं, शरीर में नींद की जरूरत उतनी बढ़ती जाती है। इस प्रक्रिया में एडेनोसिन जैसे कारक भूमिका निभाते हैं। सोने के दौरान यह स्लीप प्रेशर कम होता है। इसलिए लगातार व्यस्त सप्ताह के बाद छुट्टी के दिन बिस्तर ज्यादा आरामदायक लगना सामान्य अनुभव हो सकता है।
3. छुट्टी में अलार्म का दबाव नहीं रहता
काम या स्कूल वाले दिनों में अलार्म और तय समय व्यक्ति को जल्दी उठने के लिए मजबूर करते हैं। छुट्टी में यह बाहरी दबाव कम हो जाता है, इसलिए शरीर अपनी नींद की जरूरत के अनुसार कुछ देर और सोने का मौका पा सकता है।हालांकि, हर वीकेंड बहुत देर तक सोना इस बात का संकेत भी हो सकता है कि सप्ताह के बाकी दिनों में पर्याप्त नींद नहीं मिल रही है।
4. देर से सोना और देर से उठना बॉडी क्लॉक बदल सकता है
छुट्टी के दिन देर रात तक जागना और फिर सुबह देर तक सोना शरीर की सर्कैडियन रिदम को प्रभावित कर सकता है। सप्ताहांत और कामकाजी दिनों के सोने-जागने के समय में अंतर लगभग एक घंटे तक रखने की कोशिश की जाए।यानी छुट्टी का मतलब यह नहीं कि रोज की स्लीप शेड्यूल पूरी तरह बदल जाए।
5. ज्यादा सोने से थकान का एहसास कम हो सकता है, लेकिन यह पूरी भरपाई नहीं
छुट्टी के दिन अतिरिक्त नींद लेने से कुछ लोगों को नींद और थकान में राहत महसूस हो सकती है। लेकिन शोध में यह स्पष्ट नहीं है कि वीकेंड कैच-अप स्लीप नियमित नींद की कमी के सभी प्रभावों को पूरी तरह उलट देती है। एक अध्ययन में सप्ताह के दौरान लगातार नींद सीमित रखने के बाद वीकेंड रिकवरी स्लीप ने मेटाबाॅलिक इफेक्ट्स को पूरी तरह रिवर्स नहीं किया। इसलिए बेहतर तरीका है कि सिर्फ छुट्टी के दिन ज्यादा सोने के बजाय पूरे सप्ताह पर्याप्त और नियमित नींद लेने की कोशिश की जाए।