यह देश जितना पर्यटन के लिए पूरे विश्व में जाना जाता है। उतना ही खुशमिजाजी के कारण अपनी अलग पहचान बनाई है। दुनिया के हर कोने में लोग मौज-मस्ती करते हैं, लेकिन थाईलैंडवासियों ने इसे अपनी लाइफ स्टाइल का हिस्सा बना लिया है। बैंकॉक की किसी भी गली से लेकर ऑफिस तक में आपको सहज भाव में मौज मस्ती करते लोग नजर आएंगे। यहां के ऑफिस में लोग उस अंदाज में काम करते दिखते हैं जैसे वे लोग आपस में मजाक मस्ती कर रहे हों, हालांकि काम की गंभीरता को वे बखूबी समझते हैं। प्रत्येक काम को ईमानदारी से निभाते हैं। अगर आप खुशनुमा माहौल में घूमन की सोच रहे हैं तो जान लें थाईलैंड की बाकी खासियतें।
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जरूर जाएं 'लैंड ऑफ स्माइल्स' घूमने, सीख जाएंगे खुश रहना
Thu, 23 May 2019 08:15 AM IST
पंखुड़ी सिंह
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला
Published by: पंखुड़ी सिंह
Updated Thu, 23 May 2019 08:15 AM IST
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- फोटो : Social Media
चेहरे पर मुस्कान
थाई लोगों की मुस्कान में दुख हो या सुख, वह कहीं ज्यादा उभरता है। थाई लोग अंतिम संस्कार के वक्त भी मुस्कुराते हुए मिल सकते हैं। ये भी सही है कि थाई लोग कहीं ज्यादा सहज अंदाज में अपना जीवन यापन करते हैं।
थाई लोगों की मुस्कान में दुख हो या सुख, वह कहीं ज्यादा उभरता है। थाई लोग अंतिम संस्कार के वक्त भी मुस्कुराते हुए मिल सकते हैं। ये भी सही है कि थाई लोग कहीं ज्यादा सहज अंदाज में अपना जीवन यापन करते हैं।
खुले स्थान पर बनाते हैं स्पीरिट हाऊस
यहां हर घर, होटल, फैक्टरी आदि के बाहर के खुले स्थान पर 'स्पीरिट हाऊस' (छोटा मंदिर) होता है, जिसमें अधिकतर चतुर्मुखी ब्रह्मा की मूर्ति होती है और उनके 8 हाथों में चक्र, माला, भाला आदि अलंकार होते हैं। इस देश का राष्ट्रीय जानवर हाथी है। जगह-जगह गणेशजी, लक्ष्मी-नारायण या विष्णु चतुर्भुज की मूर्तियां मिलेंगी।
यहां हर घर, होटल, फैक्टरी आदि के बाहर के खुले स्थान पर 'स्पीरिट हाऊस' (छोटा मंदिर) होता है, जिसमें अधिकतर चतुर्मुखी ब्रह्मा की मूर्ति होती है और उनके 8 हाथों में चक्र, माला, भाला आदि अलंकार होते हैं। इस देश का राष्ट्रीय जानवर हाथी है। जगह-जगह गणेशजी, लक्ष्मी-नारायण या विष्णु चतुर्भुज की मूर्तियां मिलेंगी।
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नृत्य-संगीत इनकी रगों में बसा
भारत के पूर्वी हिस्से से लगते देशों के लोगों के नैन-नक्श देश के पूर्वोत्तर राज्यों के निवासियों से काफी मिलते-जुलते हैं। थाई लोग, मणिपुरी, आसामी लोगों की तरह गोल चेहरे वाले और बिना दाढ़ी-मूंछ के होते हैं। खुशमिजाज रहना, नाचना-गाना इनके खून में है। बाढ़ आने पर भी लोग घरों से बाहर खड़े हंसी-मजाक करते दिख जाते हैं।
भारत के पूर्वी हिस्से से लगते देशों के लोगों के नैन-नक्श देश के पूर्वोत्तर राज्यों के निवासियों से काफी मिलते-जुलते हैं। थाई लोग, मणिपुरी, आसामी लोगों की तरह गोल चेहरे वाले और बिना दाढ़ी-मूंछ के होते हैं। खुशमिजाज रहना, नाचना-गाना इनके खून में है। बाढ़ आने पर भी लोग घरों से बाहर खड़े हंसी-मजाक करते दिख जाते हैं।
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कुछ खास बातें
यहां के लोग अपने शरीर के सभी अंगों में से माथे को सबसे ज्यादा पवित्र अंग मानते हैं। यहां संवैधानिक राजतंत्र है और यहां के लोग भगवान की तरह अपने राजा और रानी की पूजा करते हैं।
बैंकॉक दुनिया के सबसे ज्यादा गर्म शहरों में से एक है, यहां का सबसे ज्यादा गर्म महीना अप्रैल होता है। रामाकिन यहां का महाग्रंथ है और यह रामायण का थाई वर्जन है।
यहां के लोग अपने शरीर के सभी अंगों में से माथे को सबसे ज्यादा पवित्र अंग मानते हैं। यहां संवैधानिक राजतंत्र है और यहां के लोग भगवान की तरह अपने राजा और रानी की पूजा करते हैं।
बैंकॉक दुनिया के सबसे ज्यादा गर्म शहरों में से एक है, यहां का सबसे ज्यादा गर्म महीना अप्रैल होता है। रामाकिन यहां का महाग्रंथ है और यह रामायण का थाई वर्जन है।