देश में घोषित लॉकडाउन के बीच तीर्थयात्राएं भी फिलहाल बंद हैं। देशभर के लोगों को कोरोना संकट खत्म होने का इंतजार है। धर्मावलंबी भी यही चाहते हैं कि कोरोना संकट खत्म होने के साथ लॉकडाउन भी खत्म हो और एक बार फिर से देश के पावन तीर्थस्थलों की यात्राएं शुरू हो सके। फिलहाल मंदिरों के पट केवल पूजन-आरती के लिए ही खोले जाते हैं। मंदिरों के पुजारी ज्योतिर्लिंगों की पूजा-अर्चना कर रहे हैं। इन मंदिर प्रबंधनों की ओर से संकट की इस घड़ी में जरूरतमंदों की मदद की जा रही है। सात ज्योतिर्लिंग प्रबंधनों की ओर से जरूरतमंदों को राहत सामग्री दी जा रही है।
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ज्योतिर्लिंग दर्शन।
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मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित महाकालेश्वर मंदिर से प्रतिदिन 4000 भोजन पैकेट शहर के जरूरतमंदों के बीच वितरण किया जा रहा है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, ओंकारेश्वर मंदिर, श्रीशैल मल्लिकार्जुन, घृष्णेश्वर मंदिर, काशी विश्वनाथ मंदिर और भीमाशंकर मंदिर की ओर से भी जरूरतमंदों के बीच गांवों के गरीब परिवारों को अन्नदान किया गया है। त्र्यंबकेश्वर मंदिर की ओर से राहत कोष में 51 लाख रुपये दिए गए हैं।
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Mahakaleshwar, Ujjain
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बहुत सारे लोग इस बारे में जानना चाहते होंगे कि 12 ज्योतिर्लिंगों में इन दिनों कैसे पूजा, अर्चना, भोग और आरती वगैरह हो रही हैं। मध्य प्रदेश के खंडवा में ओंकारेश्वर में सुबह पांच बजे पट खुलते हैं। यहां समय से मंगला आरती, भोग आरती और शयन आरती होती हैं। हालांकि केवल पुजारी ही अंदर प्रवेश करते हैं। उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में सुबह चार बजे पट खुलते हैं, जो 11 बजे रात को बंद होते हैं। इस बीच समयानुसार नियमित पूजन-आरती होती है।
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काशी विश्वनाथ मंदिर।
- फोटो : अमर उजाला।
महाराष्ट्र के भीमाशंकर, घृष्णेश्वर और गुजरात के ओढा नागनाथ में भी समयानुसार पूजा-अर्चना और आरती होती है। काशी विश्वनाथ मंदिर, वाराणसी में सुबह तीन बजे मंदिर खुलने के साथ पूजा की तैयारी शुरू हो जाती है।
तमिलनाडु के रामेश्वरम् और गुजरात के सोमनाथ में भी नियमित सेवा, पूजन-आरती की जा रही है। वहीं, आंध्रप्रदेश के मल्लिकार्जुन में शयन आरती के बाद मंदिर के पट बंद कर दिए जाते हैं। त्र्यंबकेश्वर मंदिर में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए पालकी निकाली जाती है।