2 सितंबर से गणेश चतुर्थी का पर्व शुरू हो रहा है। भाद्रपद महीने की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को श्री गणेश चतुर्थी मनाई जाती है। इस दिन को गणपति के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। भारत में भगवान गणेश के मंदिर के रूप में सिद्धिविनायक मंदिर ज्यादा प्रसिद्ध है लेकिन इसके अलावा भी बहुत से प्राचीन मंदिर हैं जिन पर भक्तों का अटूट विश्वास हैं। इन मंदिरों में दर्शन मात्र से ही भक्तों के कष्टों का निवारण हो जाता है। इन मंदिरों में भी गणेश चतुर्थी की बहुत ही अद्भुत छटा होती है तो इस बार गणेश उत्सव पर आप इन मंदिरों के दर्शन के लिए जरूर जाएं। तो आइए जानते हैं वो कौन से मंदिर हैं।
Ganesh chaturthi 2019: भारत के दस बड़े गणपति मंदिर,जहां बॉलीवुड स्टार भी जाते हैं मत्था टेकने
गणपति के प्रसिद्ध मंदिरों में इस मंदिर का नाम सबसे पहले आता है। यह मंदिर मुंबई में स्थित है। कहा जाता है कि इस मंदिर को एक निसंतान महिला ने बनवाया था। इस मंदिर में माथा टेकने बड़े-बड़े बॉलीवुड सेलिब्रिटी आते हैं।
गणपति बप्पा का यह मंदिर पुणे में बना हुआ है। श्री सिद्धिविनायक मंदिर के बाद भक्तों की आस्था इस मंदिर में बहुत है। इस मंदिर के ट्रस्ट को देश के सबसे अमीर ट्रस्ट का खिताब हासिल है। कहा जाता है कि कई साल पहले श्रीमंत दगडूशेठ और उनकी पत्नी लक्ष्मीबाई ने अपना इकलौता बेटा प्लेग में खो दिया था। जिसके बाद दोनों ने इस गणेश मूर्ति की स्थापना यहां करवाई थी। जिसके बाद अब हर साल ना केवल श्री दगडूशेठ का परिवार बल्कि आसपास के सभी लोग बड़े जोश के साथ यहां गणेशोत्सव मनाते हैं।
कनिपकम विनायक मंदिर चित्तूर
विघ्नहर्ता गणपति का यह मंदिर आंध्र प्रदेश के चित्तूर में है। माना जाता है कि यहां मौजूद गणपति अपने भक्तों के सारे पाप हर लेते हैं।विनायक के इस मंदिर की खासियत यह है कि ये विशाल मंदिर नदी के बीचों बीच बना हुआ है। इस मंदिर की स्थापना 11वीं सदी में चोल राजा कुलोतुंग चोल प्रथम ने की थी।जिसका विस्तार बाद में 1336 में विजयनगर साम्राज्य में किया गया।
मंदिर का इतिहास पुडुचेरी में फ्रेंच लोगों के आने के साल 1666 से भी पहले का है। शास्त्रों में गणेश के कुल 16 रूपों की चर्चा की गई है। इनमें पुडुचेरी के गणपति जिनका मुख सागर की तरफ है उन्हें भुवनेश्वर गणपति कहा गया है।तमिल में मनल का मतलब बालू और कुलन का मतलब सरोवर से है। किसी जमाने में यहां गणेश मूर्ति के आसपास बालू ही बालू था। इसलिए लोग इन्हें मनकुला विनयागर पुकारने लगे।