उत्तराखंड के नैना झीले के उत्तरी किनारे पर मौजूद नैनादेवी का मंदिर भक्तों के आकर्षण का मुख्य केंद्र है। साल 1880 के भूस्खलन से यह मंदिर नष्ट हो गया था फिर इसे दोबारा बनवाया गया है। स्थानीय लोगों की मान्यता के अनुसार मां के आंखों से गिरे आंसू ने ही यहां ताल का रूप धारण कर लिया और इसलिए इस जगह का नाम नैनीताल पड़ गया। मंदिर के अंदर नैना देवी के साथ-साथ गणेश जी और मां काली की भी मूर्तियां मौजूद हैं।
Chaitra Navratri 2019: नैनीताल के इस मंदिर में केवल दर्शन करने से दूर होती है आंखों की समस्या
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला
Published by: प्रशांत राय
Updated Sun, 07 Apr 2019 12:29 PM IST
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