Famous Gurudwara in Delhi : बैसाखी का पर्व आ गया है। यह सिख धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक है। इसे सिख धर्म के नववर्ष के रूप में भी मनाया जाता है। वैशाख माह में रबी की फसल की कटाई होती है। किसान अच्छी फसल के लिए ईश्वर का आभार देते हैं और बैसाखी मनाते हैं। पंजाब, हरियाणा और दिल्ली समेत आसपास की जगहों पर इस त्योहार की रौनक देखते ही बनती है।
Baisakhi 2025: बैसाखी के मौके पर दिल्ली के इन ऐतिहासिक गुरुद्वारों पर टेकें मत्था
अगर आप दिल्ली एनसीआर में हैं तो बैसाखी के मौके पर यहां के प्रसिद्ध और ऐतिहासिक महत्व रखने वाले गुरुद्वारों पर जा सकते हैं।
गुरुद्वारा शीशगंज साहिब
शीशगंज साहिब गुरुद्वारा पुरानी दिल्ली में स्थित है। 1783 में पंजाब छावनी के सैन्य जनरल रहे बघेल सिंह ने इस गुरुद्वारे का निर्माण कराया था। सिखों के नौवें गुरु तेग बहादुर ने जब इस्लाम धर्म कबूलने से इनकार किया था तो मुगल सम्राट औरंगजेब के आदेश पर उनका कत्ल करा दिया गया। यह गुरुद्वारा गुरु तेज बहादुर की शहादत की याद में बनाया गया था।
गुरुद्वारा बंगला साहिब
बंगला साहिब दिल्ली के सबसे प्रसिद्ध गुरुद्वारा की लिस्ट से सबसे ऊपर आता है। मान्यता है कि बंगला साहिब गुरुद्वारा जयपुर के महाराज जय सिंह का बंगला हुआ करता था। इस बंगले में आठवें गुरु हर किशन सिंह रहते थे। बाद में इसे गुरुद्वारे में परिवर्तित कर दिया गया। गुरुद्वारा बंगला साहिब पूरे 24 घंटे संचालित होता है और साल भर यहां लंगर चलता है।
गुरुद्वारा दमदमा साहिब
दिल्ली के हौज खास में गुरुद्वारा दमदमा साहिब स्थित है। इस गुरुद्वारे का ऐतिहासिक महत्व है। बैसाखी के मौके पर गुरुद्वारा दमदमा साहिब में कीर्तन दरबार और लंगर का आयोजन किया जाता है। यहां का शांति वातावरण आपको जरूर पसंद आएगा। साथ ही हरे-भरे वातावरण का आनंद भी ले सकते हैं।
गुरुद्वारा श्री रकाब गंज साहिब
राजधानी में स्थित संसद भवन के पास गुरुद्वारा श्री रकाब गंज साहिब है। इस गुरुद्वारे को गुरु तेग बहादुर जी की याद में बनाया गया है। यह ऐतिहासिक गुरुद्वारा सिख इतिहास और परंपरा का प्रतीक है। बैसाखी के दिन यहां लंगर और सेवा के लिए जाएं।