दक्षिण भारत के हर हिस्से में प्रकृति, इतिहास और संस्कृति के अलग अलग रंग देखने को मिलेंगे। यहां हर राज्य की अपनी खूबसूरती है और अपना अलग अंदाज। केवल भाषाई तौर पर ही नहीं, खान पान के मामले में भी यहाँ भिन्नता है। उदाहरण के लिए केरल। आँखों के साथ दिल को भी सुकून देती है केरल की खूबसूरती। यही कारण है कि इसे 'गॉड्स ओन कंट्री' के नाम से भी सम्बोधित किया जाता है। चारों तरफ हरे रंग की चादर ओढ़े प्रकृति और पानी पर लय-ताल में तैरती नावें और क्रूज़, यहाँ पर्यटन को और भी आनंददायक बना डालते हैं। इसलिए इसे वेनिस ऑफ़ ईस्ट भी कहा जाता है। यूं तो पूरे केरल में खूबसूरत नजारों की भरमार है और यही कारण है कि पूरी दुनिया से लोग यहां पर्यटन के लिए आते हैं। केरला में और उसके आस पास ऐसे कई टूरिस्ट डेस्टिनेशंस हैं और उनमें से ही एक नाम है 'अलाप्पुझा ' का। जानिए इस खूबसूरत पर्यटन स्थल के बारे में।
Alappuzha: हरियाली के बीच, पानी पर तैरते आनंद के पल
प्रसिद्ध बोट रेस
अलाप्पुझा को भरपूर हरियाली और बैकवाटर्स के लिए तो जाना जाता ही है, यह अपनी नौका दौड़ प्रतियोगिता यानी बोट रेस के लिए भी प्रसिद्ध है। यह दौड़ स्नेक बोट यानी संकरी वाली नावों पर की जाती है। हर नाव करीब 100 फ़ीट लम्बी होती है और ऐसी कई नावें एक साथ पुन्नमडा लेक में रेस लगाती हैं और साथ में नाविक गाते हैं पीढ़ी दर पीढ़ी साथ चले आ रहे, नाविकों और नौका के लोकगीत। यह सबकुछ मिलकर एक अलग ही समा बाँध देता है। नौका रेस का समय और दिनांक स्थानीय प्रशासन और मलयालम कैलेंडर के अनुसार तय किया जाता है लेकिन केरला टूरिज्म की साइट पर इसे लेकर लेटेस्ट अपडेट्स आसानी से मिल सकते हैं। वर्तमान में केरल के अन्य कई हिस्सों में भी ऐसी और रेस संचालित की जा रही हैं।
छोटे और मनमोहक गाँव
अलाप्पुझा का बैक वॉटर अपनी झीलों के लिए तो पहचाना जाता ही है, इसके आस पास बसे छोटे छोटे गाँव भी घूमने के लिए बहुत अच्छा विकल्प हैं। यहाँ आपको स्थानीय खान-पान, पहनावे और दूर दूर तक फैले खेतों के मनोहारी नजारे मिलेंगे। पानी पर घूमने की एकरसता को भी ये खत्म करेंगे और पैदल चलने का अवसर भी देंगे। ढेर सारे नारियल से लदे पेड़, मसालों की सुगंध और लोककला के मनमोहक दृश्य भी इन गाँवों में दिखाई देंगे। शहर की भागदौड़ भरी ज़िंदगी से दूर ये गाँव आपको स्फूर्ति और ताजगी से भर देंगे।
क्रूज की सवारी
अगर कश्मीर में शिकारों पर बसे खूबसूरत आशियाने आपको पसंद हैं तो केरल में भी आप इनके जैसे स्वरूप वाले क्रूज या हाउसबोट का विकल्प चुन सकते हैं। साफ़, चमकीले पानी पर तैरते ये बेमिसाल कारीगरी के नमूने बहुत आरामदायक भी हैं और प्रकृति के करीब भी क्योंकि इन्हें लकड़ी, नारियल के जूट, बांस और अन्य प्राकृतिक साधनों की कारीगरी से बनाया और सजाया जाता है। एक बोट को बनाने में लगभग 2 करोड़ रूपये तक का खर्च आता है और करीब हर 6 महीने में इसके मेंटेनेंस पर लगभग 3 लाख रूपये तक का खर्च आता है। इनमें आपको सामान्य सुविधाओं से लेकर लक्ज़री 5 स्टार सुविधाओं तक सभी कुछ मिलेगा। आप एक दिन के लिए भी बुकिंग कर सकते हैं और पैकेज के हिसाब से कुछ दिन या महीने के लिए भी।
ऐसे कीजिये बुकिंग
हाउसबोट बुक करने के लिए अगर आप किसी ट्रैवल एजेंसी या ऑनलाइन साइट से बुकिंग कर रहे हैं तो भी ठीक है। इसके अलावा आप डिस्ट्रिक्ट टूरिज्म प्रमोशन काउन्सिल (डीटीपीसी) के अलप्पुझा स्थित प्री पेड काउंटर से भी बुकिंग करवा सकते हैं। इनमें आपको डीलक्स, प्रीमियम और लक्ज़री श्रेणी में हाउसबोट्स मिल सकती हैं, जिनमें एक बेडरूम से लेकर 10-11 बेडरूम तक हो सकते हैं और इनका किराया 8,000 से 50,000 रूपये या इससे अधिक हो सकता है। अगर तुलनात्मक रूप से देखें तो होटल में एक दिन रुकने से यह 4-5 गुना तक अधिक महंगा हो सकता है। इसके अलावा दिसंबर- जनवरी के महीने में इस टेरिफ में 20-30 प्रतिशत और बढ़ोत्तरी हो सकती है। जबकि जून-जुलाई के ऑफ़ सीजन में टेरिफ कम भी हो सकता है।