Relationship Advice: इस नए जमाने में शादी से पहले कपल एक दूसरे से बातचीत करना शुरू कर देते हैं। वहीं प्रेम विवाह में कपल पहले से ही एक दूसरे को जानते हैं। दोनों के बीच का संवाद उनके बीच एक दोस्ती का रिश्ता बनाने में मदद करता है। हालांकि शादी के बाद भी कपल के बीच दोस्ती बनाए रखना आसान नहीं होता है।
शादी एक ऐसा बंधन है जिसमें न केवल प्यार, बल्कि समझ, विश्वास और दोस्ती की भी जरूरत होती है। अक्सर लोग सोचते हैं कि शादी के बाद प्यार तो रहेगा लेकिन दोस्ती की जगह कहीं कम न हो जाए। सच तो यह है कि शादी में दोस्ती और प्यार दोनों का साथ होना रिश्ते को और मजबूत बनाता है। सवाल यह है कि क्या वाकई दोनों साथ चल सकते हैं?
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दोस्ती है रिश्ते की नींव
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दोस्ती है रिश्ते की नींव
किसी भी रिश्ते में दोस्ती सबसे मजबूत आधार होती है। जब पति-पत्नी एक-दूसरे के साथ दोस्त की तरह पेश आते हैं, तो उनमें खुलापन और सहजता बनी रहती है। छोटी-छोटी बातों पर झगड़े भी कम होते हैं क्योंकि दोस्ती की वजह से समझ और अपनापन ज्यादा होता है।
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प्यार को चाहिए दोस्ती का सहारा
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प्यार को चाहिए दोस्ती का सहारा
शादी के बाद प्यार सिर्फ रोमांस तक सीमित नहीं रहता, बल्कि जिम्मेदारियों और जीवन की कठिनाइयों से भी गुजरता है। ऐसे में दोस्ती उस प्यार को टिकाए रखती है। एक अच्छा दोस्त वही होता है जो मुश्किल वक्त में साथ दे और यही गुण शादीशुदा जीवन में भी काम आते हैं।
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दोस्ती और प्यार का संतुलन
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दोस्ती और प्यार का संतुलन
कई बार कपल्स में यह दुविधा होती है कि वे दोस्त की तरह पेश आएं या रोमांटिक पार्टनर की तरह। असलियत यही है कि दोनों का संतुलन रिश्ते को खूबसूरत बनाता है। कभी मस्ती करना, मजाक करना दोस्ती का हिस्सा है, तो कभी रोमांटिक पल जीना प्यार की जरूरत है।
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गलतफहमी से बचने का मंत्र
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गलतफहमी से बचने का मंत्र
जब रिश्ता सिर्फ प्यार पर टिका होता है तो छोटी गलतफहमियों से भी दरार पड़ सकती है। लेकिन अगर उसमें दोस्ती मौजूद हो तो बातचीत और खुलकर कहने की आदत गलतफहमियों को मिटा देती है। दोस्ती रिश्ता हल्का, आसान और लंबा चलने वाला बना देती है