"यत्र नार्यस्तु पूज्यते, रमन्ते तत्र देवता" यानी जहां नारी की पूजा होती है, वहां देवताओं का वास होता है। श्रृष्टि की शुरुआत से महिलाओं का सम्मान किया जाता रहा है। लेकिन युग, काल और सदियां बीतने के साथ महिलाओं के प्रति लोगों की सोच बदलती चली गई। बाल विवाह, दहेज प्रथा, कन्या भ्रूण हत्या जैसी समस्याएं अभी भी समाज में व्याप्त है। आए दिन यौन शोषण, दुष्कर्म, गैंगरेप और हत्या की खबरें सामने आती रहती हैं। दुनियाभर में बेटियों के प्रति समाज का दोहरापन दिखता है। लड़कियों को आज भी शिक्षा, पोषण, चिकित्सा, मानवाधिकार और कानूनी अधिकारों से वंचित रखा जाता है। लड़कियों को उनके तमाम अधिकार देने और बालिका सम्मान के प्रति दुनिया को जागरूक करने के उद्देश्य से ही हर साल 11 अक्तूबर को अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस मनाया जाता है।
International Girl Child Day 2020: क्यों मनाया जाता है अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस, क्या है इस बार की थीम?
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क्या है इसका इतिहास?
- अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस मनाने की शुरुआत एक एनजीओ यानी गैर सरकारी संगठन 'प्लान इंटरनेशनल' के प्रोजेक्ट के रूप में की गई थी। इस संगठन ने "क्योंकि मैं एक लड़की हूं" नाम से एक अभियान की भी शुरुआत की थी। इस अभियान के अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विस्तार के लिए कनाडा सरकार से संपर्क किया गया।
कनाडा सरकार ने 55वें आम सभा में इस प्रस्ताव को रखा और 19 दिसंबर, 2011 को संयुक्त राष्ट्र ने इस प्रस्ताव को पारित किया। अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस के लिए 11 अक्तूबर की तारीख तय की गई और 2012 से हर साल यह मनाया जाने लगा।
पहली बार क्या थी अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस की थीम
- पहला अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस जब 11 अक्टूबर, 2012 को मनाया गया, तब इसकी थीम थी- "बाल विवाह उन्मूलन"। हालांकि अभी भी देश और दुनिया के विभिन्न हिस्सों में बाल विवाह के मामले सामने आते हैं। इसको लेकर कानून भी बनाए गए हैं, लेकिन इस कुरीति को खत्म करने के लिए अशिक्षा, पिछड़ेपन, गरीबी जैसे कारणों को भी दूर करना होगा।
क्या है इस बार की थीम?
इस साल अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस की थीम है- "हमारी आवाज और हमारा समान भविष्य"। इस साल की थीम "हमारी आवाज और हमारा समान भविष्य" का उद्देश्य समाज में ये संदेश देना है कि कैसे छोटी बालिकाएं आज पूरे विश्व को एक मार्ग दिखाने का प्रयास कर रही हैं।