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सड़क किनारे रेहड़ी से आम और केले खरीदते हैं, तो देखिए कितने बड़े खतरे में हैं आप!
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Mon, 16 Apr 2018 10:02 AM IST
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Mango
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सड़क किनारे खड़ी रेहड़ी पर मिलने वाला आम और केले खरीदते हैं तो गलती कर रहे हैं, देखिए कैसे आप बहुत बड़े खतरे में हैं, संभल जाएं।
आम
इस बार सीजन शुरू होने से पहले बाजारों में आम दिखने शुरू हो गए हैं। इसकी मुख्य वजह आमों को खतरनाक केमिकल कैल्शियम कार्बाइड से पकाकर बाजार में बेचा जा रहा है। इस बात की भनक फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड डिपार्टमेंट को लग गई। डिपार्टमेंट के डेजिग्नेटेड आफिसर सुखविंदर सिंह ने सीनियर फूड अफसर की टीम गठित कर सेक्टर-26 की मंडी में भेजी।
आम
छापेमारी की भनक लगते ही अपने फायदे के लिए लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वाले फल विक्रेता आम को छोड़कर फरार हो गए। करीब तीन क्विंटल आम केमिकल से पकाया जा रहा था। इन सभी आम को कब्जे में लिया और उन्हें नष्ट कर दिया गया। बाकी फलों की भी जांच की गई, लेकिन उनमें केमिकल नहीं दिखा। सुखविंदर सिंह ने बताया कि उन्हें सूचना मिली थी कि आमों को कार्बाइड के केमिकल से पकाया जा रहा है।
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आम का सीजन
सीनियर फूड आफिसर एसपी सिंह और भरत कनौजिया के नेतृत्व में एक टीम गठित सुबह साढ़े 8 बजे टीम सेक्टर 26 मंडी में पहुंच गई। टीम आने की सूचना मिलने पर वे सब भाग गए, जो केमिकलयुक्त फल बेच रहे थे। सुखविंदर सिंह का कहना है कि पिछले साल काफी व्यापक स्तर पर अभियान चलाया गया था और व्यापारियों को जागरूक किया गया था। इसकी वजह से दूसरे फलों में कार्बाइड नहीं मिला। छापेमारी आगे भी जारी रहेगी।
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आम
इस बार जल्दी दिखने लगे थे आम
आम का सीजन मई के तीसरे हफ्ते से शुरू होता है, जो अगस्त के पहले हफ्ते तक जारी रहता था। इस सीजन में जो आम आते हैं, वे प्राकृतिक रूप से पके होते हैं, लेकिन इस बार आम अप्रैल के हफ्ते से दिखने लगे हैं। इनमें से अधिकतम आम कार्बाइड से पकाए गए थे। कार्बाइड का इस्तेमाल फलों को जल्दी पकाने में इस्तेमाल किया जाता है। इससे पकाए गए फलों में कोई स्वाद नहीं होता है। खुशबू काफी कम होती है या फिर न के बराबर होती है। केले तो एक दिन बाद गलकर काले पड़ जाते हैं। यह बाजार में 30-40 रुपये किलो के हिसाब से आसानी से मिल जाता है।
आम का सीजन मई के तीसरे हफ्ते से शुरू होता है, जो अगस्त के पहले हफ्ते तक जारी रहता था। इस सीजन में जो आम आते हैं, वे प्राकृतिक रूप से पके होते हैं, लेकिन इस बार आम अप्रैल के हफ्ते से दिखने लगे हैं। इनमें से अधिकतम आम कार्बाइड से पकाए गए थे। कार्बाइड का इस्तेमाल फलों को जल्दी पकाने में इस्तेमाल किया जाता है। इससे पकाए गए फलों में कोई स्वाद नहीं होता है। खुशबू काफी कम होती है या फिर न के बराबर होती है। केले तो एक दिन बाद गलकर काले पड़ जाते हैं। यह बाजार में 30-40 रुपये किलो के हिसाब से आसानी से मिल जाता है।