फलों और सब्जियों से बनी डिश का स्वाद तो आपने कई बार चखा होगा। लेकिन क्या बांस से बनी किसी डिश के बारे में सुना है। अगर नहीं तो खोरिसा के बारे में जरूर पढ़ें। पूर्वोत्तर भारत की संस्कृति, पहनावे के साथ ही खान-पान भी काफी अलग है। असम राज्य अपने खूबसूरत प्राकृतिक नजारों की वजह से मशहूर है। साथ ही यहां का खाना भी काफी मशहूर है। लेकिन इन मशहूर डिश से अलग बांस से बनी ये डिश स्थानीय संस्कृति का ही एक नमूना है।
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bamboo shoot dish
- फोटो : istock
बांस से बनी इस डिश को खोरिसा या बह गज और अंग्रेजी में बैंबू शूट कहते है। खोरिसा एक तरह का अचार है। जिसका स्वाद काफी लजीज रहता है।
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खोरिसा को बनाने के लिए बांस की शाखाओं का इस्तेमाल किया जाता है। मुलायम बांस की शाखाओं को लेकर छीला जाता है। इसे तब तक छीलना होता है जब तक कि अंदर का सफेद हिस्सा ना दिखने लगे। इस बैंबू शूट को ओखली में कूट लेते हैं। वैसे अब मिक्सर की मदद से भी इसे पीस लिया जाता है। कुटे हुए बैंबू शूट को कांज के जार में रख जाता है। एक सप्ताह तक ये प्राकृतिक रूप से फर्मेंट होता है। जिससे इसका पानी बांस से बाहर निकल जाता है। तय समय के बाद इस बैंबू शूट के पानी को निकाल देते हैं। और सरसो का तेल, लाल मिर्ची और नमक मिला देते हैं।
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बस तैयार है बांस का अचार, जिसे खोरिसा कहते हैं। स्थानीय भाषा में इसे बम्बुसा बल्कोया, बरूवा, बेरू, भालू बांस, बोरो बंसबराक कई नामों से जाना जाता है। ये बांस उत्तरी-पूर्वी राज्यों में पाए जाते हैं। जिनसे झोपड़ी, पुल, पेपर पल्प बनाए जाते हैं। वहीं ये मुलायम बांस खाने के लिए भी इस्तेमाल में लाया जाता है। साधारण तरीके से तैयार होने वाले इस खोरिसा के फायदे काफी ज्यादा हैं।
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खोरिसा खाने में स्वादिष्ट लगता है। स्थानीय लोगं का मानना है कि इसे खाने से वजन कम होता है, हार्ट स्वस्ध रहता है और इम्यूनिटी, पेट दर्द और ब्लड प्रेशर ठीक रहता है। खोरिसा के अचार के साथ ही मांसाहारी डिश खोरिसा मास भी तैयार किया जाता है। इसे बनाने के लिए बांस की टहनियों को कद्दूकस कर इसमे मिलाया जाता है। जिससे स्वाद थोड़ा कसैला सा हो जाता है।