जिस तरह पेट, ह्रदय, आंख, कान, नाक संबंधी बीमारियों के प्रति लोग जागरूकता रखते हैं, अब समय है कि लोग मौखिक स्वास्थ्य के प्रति भी जागरूक हो जाएं। आज भी कई सारे लोग ऐसे हैं जो अपने मुंह की सफाई नहीं करते हैं, चिकित्सक के पास नहीं जाते हैं और दिन-ब-दिन अपने मौखिक स्वास्थ्य को खराब कर लेते हैं। मुंह से आने वाली दुर्गंध के प्रति भी लोग जागरूक नहीं हैं। मौखिक सेहत के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए ही इस दिन की शुरुआत की गई। अगली स्लाइड्स से जानिए विश्व मौखिक स्वास्थ्य दिवस का इतिहास, विषय और अन्य जानकारी।
World Oral Health Day 2021: जानिए विश्व मौखिक स्वास्थ्य दिवस का इतिहास, विषय और इससे जुड़ी महत्वपूर्ण बातें
विश्व मौखिक स्वास्थ्य दिवस का इतिहास
विश्व मौखिक स्वास्थ्य दिवस को मनाने की शुरुआत 20 मार्च 2013 को एफडीआई वर्ल्ड डेंटल फेडरेशन ने की थी। तब से लेकर आजतक हर साल यह दिन मनाया जाता है। इसके बाद अगले ही साल से इंटरनेशनल एसोसिएशन ऑफ डेंटल स्टूडेंट्स के सहयोग से एफडीआई एक वार्षिक विश्वव्यापी प्रतियोगिता भी आयोजित करवाई जा रही है। कोरोना के कारण इस तरह की प्रतियोगिता ऑनलाइन ही हो रही हैं।
विश्व मौखिक स्वास्थ्य दिवस का विषय
वर्ष 2021 के लिए विश्व मौखिक स्वास्थ्य दिवस का विषय ‘ बी प्राइड ऑफ योर माउथ है।’ अर्थात आपको अपने मुंह पर गर्व होना चाहिए जिसका आशय यह है कि आपको अपने मौखिक स्वास्थ्य को हर परिस्थिति में बेहतर रखना है क्योंकि मौखिक रूप से अस्वस्थ व्यक्ति के अन्य अंग भी प्रभावित होते हैं इसलिए समय-समय पर चिकित्सक के पास चेकअप के लिए जाना बहुत जरूरी है। वर्ष 2020 के लिए विषय ‘मौखिक स्वास्थ्य के लिए एक हो जाएं’ था।
इस तरह मनाया जाता है-
इस दिन विभिन्न सेमिनार का आयोजन होता है जिसमें विशेषज्ञ बताते हैं कि किस प्रकार मौखिक स्वास्थ्य का ध्यान रखना चाहिए और कैसे इसका संबंध अन्य बीमारियों से भी होता है। जगह- जगह डेंटल चेकअप आदि का आयोजन भी होता है। शहरी और ग्रामिण दोनों ही इलाकों में मौखिक स्वास्थ्य के प्रति लोगों को जागरूक किया जाता है। फिलहाल मौखिक स्वास्थ्य से जुड़ी अधिकतर परिचर्चाएं पिछले वर्ष की तरह इस साल भी ऑनलाइन ही होंगी।
हो सकती है बड़ी बीमारियां
मौखिक स्वास्थ्य यदि ठीक नहीं है तो इससे कई सारी बीमारियां हो सकती है। दांतों में सड़न, कीड़े लगना जैसी समस्या मुंह में मौजूद एसिड के कारण होती है। इस वजह से दांतों के इनेमल खोखले होने लगते हैं और यही कारण है कि कैविटी का निर्माण होता है। इसके अलावा मुंह में मौजूद बैक्टीरिया दांतों को खराब करने लगते हैं। समय पर ध्यान न देने पर मुंह का कैंसर भी हो सकता है।