जोड़ों-हड्डियों की समस्याओं को पहले उम्र बढ़ने के साथ होने वाली बीमारी माना जाता था, पर अब कम उम्र के लोग यहां तक कि 20 से भी कम आयु वाले इसका शिकार देखे जा रहे हैं। लाइफस्टाइल की गड़बड़ी को जोड़ों के दर्द-गठिया का सबसे बड़ा कारण माना जाता है। वहीं जिन लोगों में कैल्शियम की कमी हो जाए उनमें भी खतरा ज्यादा हो जाता है। क्या आपकी जांच रिपोर्ट में भी लो कैल्शियम आया है?
Calcium Deficiency: रिपोर्ट में हर बार दिख रही कैल्शियम की कमी? सही डाइट के बाद भी क्यों है ये दिक्कत?
खान-पान ठीक होने के बावजूद कैल्शियम कम होने की वजह सिर्फ लो कैल्शियम वाली चीजें खाना नहीं है। विटामिन डी की कमी, शरीर में कैल्शियम का कम अवशोषण, कुछ बीमारियां, दवाएं और हार्मोन से जुड़ी समस्याएं भी जिम्मेदार हो सकती हैं।
अच्छी सेहत के लिए जरूरी है कैल्शियम
स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, कैल्शियम सिर्फ हड्डियों को मजबूत रखने वाला खनिज नहीं है। यह मांसपेशियों के कामकाज, नसों तक संदेश पहुंचाने, रक्त का थक्के बनने और हृदय समेत कई जरूरी प्रक्रियाओं में भूमिका निभाता है। शरीर में मौजूद कैल्शियम का लगभग पूरा हिस्सा हड्डियों और दांतों में जमा रहता है।
- कैल्शियम की कमी का पहला कारण हमेशा कैल्शियम वाली चीजें कम खाना नहीं होता।
- कई बार आप पर्याप्त कैल्शियम ले रहे होते हैं, लेकिन शरीर उसे ठीक तरह से अवशोषित नहीं कर पाता।
- इस प्रक्रिया में विटामिन डी की बड़ी भूमिका होती है। विटामिन-डी कम होने पर भोजन से मिलने वाले कैल्शियम का अवशोषण घट कम हो जाता है, इससे आपमें लो कैल्शियम की दिक्कत हो सकती है।
कुछ बीमारियां और दवाएं भी हो सकती हैं वजह
अगर खान-पान ठीक है और फिर भी कैल्शियम कम आता है, तो शरीर की दूसरी समस्याओं को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
- लो कैल्शियम कई बार विटामिन-डी या मैग्नीशियम की कमी, पैराथायरॉइड हार्मोन की समस्या, गंभीर बीमारी या कुछ दवाओं से संबंधित भी हो सकता है।
- कैल्शियम और विटामिन डी के संतुलन में किडनी की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इसलिए अगर आपमें किडनी की बीमारी है तो इस वजह से भी कैल्शियम और दूसरे खनिजों का संतुलन बिगड़ सकता है।
- कुछ दवाएं भी कैल्शियम के स्तर या उसके उपयोग को प्रभावित कर सकती हैं।
- रिपोर्ट में बार-बार कैल्शियम लो आ रहा है, तो डॉक्टर से अपनी दवा को बदलने की सलाह ले सकते हैं।
कैल्शियम की कमी कैसे करती है प्रभावित?
आमतौर पर कैल्शियम की कमी की शुरुआत स्थिति में कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखाई देते। लंबे समय तक बनी रहने वाली कमी हड्डियों की मजबूती प्रभावित हो सकती है और फ्रैक्चर का खतरा बढ़ सकता है।
- गंभीर रूप से लो कैल्शियम होने पर मांसपेशियों में ऐंठन, झनझनाहट या अन्य तंत्रिका-मांसपेशी संबंधी समस्याएं हो सकती हैं।
- बच्चों में कैल्शियम और विटामिन डी की कमी हड्डियों के सामान्य विकास को प्रभावित कर सकती है। इससे उनकी लंबाई भी रुक सकती है।
डॉक्टर कहते हैं, शरीर में कैल्शियम की कमी को रोकने के लिए आहार में दूध-दही और पनीर के अलावा हरी सब्जियों को जरूर शामिल करें। सामान्य वयस्कों में कैल्शियम की दैनिक जरूरत करीब 1000 मिलीग्राम के आसपास होती है, जबकि कुछ उम्र समूहों में यह अधिक हो सकती है। वहीं अगर रिपोर्ट में बार-बार कैल्शियम लो आ रहा है तो पहला डॉक्टर की सलाह से जांच और उसका इलाज जरूर करा लें।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
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