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पाचन की दिक्कत: सिर्फ कब्ज समझकर न करते रहें घरेलू उपाय, पेट साफ न होने की असली वजह को भी जानिए

Thu, 10 Sep 2026 06:12 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Thu, 10 Sep 2026 06:12 PM IST
सार

पेट साफ न होने को अक्सर लोग कब्ज की समस्या मान लेते हैं। मल कठोर होना, मल त्याग के लिए ज्यादा जोर लगाना इसका संकेत हो सकता है। हालांकि कई बार पेट साफ न होना या भारीपन अन्य बीमारियों का संकेत भी हो सकता है, जिसको लेकर सभी लोगों को अलर्ट रहना चाहिए।

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When Constipation Could Signal Another Disease Chronic Constipation Causes and Warning Signs
पेट की समस्याएं - फोटो : Amarujala.com/AI

आपका शरीर कितना स्वस्थ है इसका अंदाजा काफी हद तक इस बात से लगाया जा सकता है कि आपका पेट रोजाना ठीक से साफ होता है या नहीं?



स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, कई दिनों तक पेट ठीक से साफ न होना या मल त्याग के दौरान ज्यादा जोर लगाना, आजकल ये समस्या कई लोगों में देखी जा रही है। इसके लिए आमतौर पर खानपान की गड़बड़ी, पानी कम पीने, शारीरिक गतिविधियों में कमी को बड़ा कारण माना जाता रहा है। लेकिन अगर समस्या लगातार बनी रहती है तो इसे केवल कब्ज मानकर टालना या कब्ज को ठीक करने वाले घरेलू उपाय करते रहना काफी नहीं है।

कई बार डायबिटीज, थायरॉइड की समस्या और कुछ न्यूरोलॉजिकल बीमारियां भी पाचन की दूसरी समस्याएं और कब्ज का कारण बन सकती हैं। यही कारण है कि अक्सर पेट साफ न होने की स्थिति को हमेशा हल्के में लेने की गलती नहीं करना चाहिए।

When Constipation Could Signal Another Disease Chronic Constipation Causes and Warning Signs
पेट साफ न होने का खतरा - फोटो : Freepik.com

क्या आपको भी रहता है कब्ज?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, मल का कठोर या सूखा होना, मल त्याग में परेशानी या ऐसा लगना कि पेट पूरी तरह साफ नहीं हुआ ये कब्ज का संकेत हो सकता है। 
 

  • कब्ज वैसे तो खुद एक बीमारी नहीं, बल्कि कई बार किसी दूसरी समस्या का लक्षण भी हो सकती है।
  • अगर आपके आहार में फाइबर कम है, आप पानी कम पीते हैं या फिर शारीरिक गतिविधियां कम करते हैं तो इसके कारण पेट साफ न होने की दिक्कत हो सकती है।


आइए समझते हैं कि कब आपको अलर्ट हो जाने की जरूरत है?

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कब्ज की दिक्कतों के बारे में जानिए - फोटो : Freepik.com

पेट की समस्याओं को लेकर रहें सावधान
 
मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि कब्ज का मतलब सिर्फ रोज टॉयलेट न जाना नहीं है। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डायबिटीज, डाइजेस्टिव एंड किडनी डिजीज (एनआईडीडीके) के अनुसार कब्ज पाचन से जुड़ी एक आम समस्या है। हफ्ते में तीन से कम बार मल त्याग करने, मल सूखा आने या मल त्यागने में कठिनाई और दर्द होने को कब्ज की समस्या माना जाता है।
 

  • वैसे तो कई बार फाइबर की मात्रा बढ़ाने, ज्यादा पानी पीने और शारीरिक गतिविधियों को ठीक करने से कब्ज में सुधार किया जा सकता है। पर अगर इससे भी आराम न मिले तो पेट साफ न होने के पीछे के कारणों को समझना जरूरी है।
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डायबिटीज के कारण होने वाली दिक्कतें - फोटो : Freepik.com

डायबिटीज-थायरॉइड की समस्या का खतरा

सामान्य तौर पर फाइबर की कमी या पानी कम पीने से कब्ज की दिक्कत हो सकती है। एनआईडीडीके के अनुसार डायबिटीज और हाइपोथायरायडिज्म जैसी मेटाबॉलिक समस्याएं भी कब्ज और पेट साफ न होने की दिक्कतें बढ़ा सकती हैं। कई बार कुछ दवाएं और सप्लीमेंट्स भी कब्ज या सही से पेट साफ न होने का कारण बन सकती हैं।
 

  • लंबे समय तक ब्लड शुगर का लेवल ज्यादा रहने से पाचन तंत्र को कंट्रोल करने वाली नसें डैमेज हो सकती हैं। नसों के इस डैमेज को ऑटोनॉमिक न्यूरोपैथी या डायबिटिक एंटरोपैथी कहा जाता है। जब ये नसें ठीक से काम नहीं करती हैं, तो बड़ी आंत में वेस्ट बहुत धीरे-धीरे आगे बढ़ता है। इससे कब्ज की समस्या हो सकती है।

 

  • इसी तरह हाइपोथायरायडिज्म की वजह से भी अक्सर कब्ज की समस्या होती है। इसमें थायरॉइड हार्मोन का स्तर कम होने से मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाता है और पाचन तंत्र में मांसपेशियों का सिकुड़ना कम हो जाता है। 
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पेट की समस्याएं - फोटो : Freepik.com

पेट साफ रखने के लिए क्या करें?

पेट को साफ रखने के लिए सबसे जरूरी है पर्याप्त मात्रा में फाइबर युक्त भोजन करें और पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थों का सेवन करें। नियमित व्यायाम या शारीरिक गतिविधि भी कब्ज से बचाव में मदद कर सकते हैं। लंबे समय तक बनी रहने वाली इन दिक्कतों में डॉक्टर की सलाह पर कुछ जांच कराए जा सकते हैं जिससे स्थिति का सही अंदाजा हो सके।




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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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