फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

कोरोना की सुरक्षित और कारगर वैक्सीन के लिए और कितना इंतजार करना होगा?

Sun, 30 Aug 2020 12:16 AM IST
निलेश कुमार बीबीसी हिंदी
बीबीसी हिंदी Published by: निलेश कुमार Updated Sun, 30 Aug 2020 12:16 AM IST
विज्ञापन
When and how to get Coronavirus Vaccine, all you need to know about Covid Vaccine worldwide all you need to know about Covid Vaccine worldwide updates:
Coronavirus Vaccine - फोटो : iStock/Social Media

11 अगस्त 2020 को टीवी स्क्रीन पर आकर रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ये दावा करते हैं कि उनके वैज्ञानिकों ने कोरोना वायरस के खिलाफ कारगर वैक्सीन तैयार कर ली है। रूस ने इस वैक्सीन को नाम दिया स्पुतनिक-वी। रूसी भाषा में 'स्पुतनिक' का अर्थ होता है सैटेलाइट। सोवियत यूनियन ने साल 1957 में विश्व का पहला सैटेलाइट बनाया था। उसका नाम भी स्पुतनिक ही रखा गया था।



वैक्सीन के नाम से ऐसा प्रतीत हुआ कि रूस एक बार फिर अमेरिका को ये जताना चाहता है कि जिस तरह वर्षों पहले अंतरिक्ष की रेस में सोवियत संघ ने अमेरिका को पछाड़ा था, उसी तरह वैक्सीन की रेस में रूस ने अमेरिका को मात दे दी है। रूसी राष्ट्रपति ने दावा किया कि उनकी बेटी को इस नई वैक्सीन का डोज दिया गया है और वो पूरी तरह स्वस्थ है।

लेकिन कोरोना वैक्सीन को लेकर पुतिन के दावों पर वैज्ञानिकों को संदेह है। रूस ने ये वैक्सीन लगभग 76 लोगों पर आजमाई, जबकि परीक्षण का तीसरा दौर बाकी है जिसमें किसी वैक्सीन को हजारों लोगों पर आजमाकर परखा जाता है। रूस भले ही अपने देश में इस वैक्सीन का इस्तेमाल करे, लेकिन दुनिया के बाकी देश इस पर अपनी मंजूरी की मोहर नहीं लगाना चाहेंगे। दुनियाभर के वैज्ञानिक कोरोना वायरस की वैक्सीन बनाने की कोशिशों में दिन-रात जुटे हुए हैं।

When and how to get Coronavirus Vaccine, all you need to know about Covid Vaccine worldwide all you need to know about Covid Vaccine worldwide updates:
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

वैक्सीन जल्द बनाने का दबाव
कोरोना वायरस की पहली वैक्सीन कब तक बन सकती है, इस सवाल पर कोलंबिया यूनिवर्सिटी में वॉयरोलोजिस्ट एंजेला रैसमसन कहती हैं, "मुझे लगता है कि बहुत जल्दी होगा तब भी, साल 2020 के आख़िरी तक या साल 2021 के पहले कुछ महीनों तक ही कोरोना की वैक्सीन बन पाएगी, उससे पहले नहीं।"

कोरोना महामारी पर काबू पाने के लिए दुनियाभर के रिसर्च इंस्टीट्यूट और फॉर्मास्यूटिकल कंपनियां सौ से ज्यादा वैक्सीन पर काम कर रही हैं। चीन की तीन, अमरीका की दो और ब्रिटेन की एक वैक्सीन, विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक परीक्षण के अंतिम चरण में पहुंच चुकी हैं।

When and how to get Coronavirus Vaccine, all you need to know about Covid Vaccine worldwide all you need to know about Covid Vaccine worldwide updates:
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

एंजेला रैसमसन के मुताबिक, ''इनमें तीन अलग टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल हो रहा है। सब इस तरह काम करते हैं कि पहले इम्यून सिस्टम में कोरोना वायरस का पता लगाते हैं और फिर उस हिसाब से एंटीबॉडीज तैयार करते हैं।'' ब्रिटेन में ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और ग्लोबल ड्रग्स फर्म-एस्टरजेनेका साथ मिलकर जो वैक्सीन बना रहे हैं, उसमें कोरोना वायरस से मिलते-जुलते वायरस का इस्तेमाल किया जा रहा है, जो आमतौर पर सिर्फ चिम्पैंजी पर असर करता है।

वहीं अमेरिका में दवा कंपनी मोडर्ना जिस mRNA वैक्सीन पर काम कर रही है, उसमें जेनेटिक मटैरियल की मदद से स्पाइक प्रोटीन तैयार किया जाता है। और तीसरी विधि वो है जिस पर चीन में सायनोवेक बायोटैक (Sinovac Biotech) दवा कंपनी काम कर रही है जिसमें इलाज के लिए वायरस का ही इस्तेमाल किया जाता है।

विज्ञापन
विज्ञापन
When and how to get Coronavirus Vaccine, all you need to know about Covid Vaccine worldwide all you need to know about Covid Vaccine worldwide updates:
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : pixabay

इन सभी वैक्सीन का सेफ्टी और इम्यून रिस्पांस जानने के लिए अपेक्षाकृत कम लोगों पर परीक्षण हो चुका है। उसके बाद फेज 3 ट्रायल की बारी है। एंजेला रैसमसन के मुताबिक, ''फेज 3 ट्रायल के लिए कई लोगों को वैक्सीन दी जाती है, हजारों लोगों पर उसे आजमाकर देखा जाता है। फिर देखा जाता है कि जब ये लोग सामान्य जिंदगी में वायरस के संपर्क में आते हैं तो कितने महफूज रहते हैं। बाकी लोगों से उनकी तुलना की जाती है और यदि वो बीमार नहीं पड़ते तो माना जाता है कि वैक्सीन सही तरीके से अपना काम कर रही है।''

वैक्सीन का ट्रायल जब पशुओं पर किया जाता है तो बात अलग होती है। लेकिन जब वही ट्रायल इंसानों पर किया जाता है, तो इस बात का खासतौर पर ख्याल रखा जाता है कि उनकी हेल्थ से किसी तरह का खिलवाड़ ना हो। एंजेला रैसमसन के अनुसार, ''इसके लिए ट्रायल पार्टिसिपेंट्स का रिक्रूटमेंट किया जाता है, जो उन इलाकों में रहते हैं जहां वायरस का ख़तरा ज्यादा है। यही वजह है कि जिन देशों में कोरोना के मामले कम हैं, वो अपनी वैक्सीन के फेज 3 के ट्रायल ब्राजील जैसे देशों में कर रहे हैं जहां संक्रमण के मामले बहुत अधिक हैं।''

विज्ञापन
When and how to get Coronavirus Vaccine, all you need to know about Covid Vaccine worldwide all you need to know about Covid Vaccine worldwide updates:
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

वैज्ञानिकों पर वैक्सीन जल्द से जल्द बनाने का दबाव है और इसके साथ अन्य ख़तरें भी जुड़े हुए हैं। एंजेला रैसमसन का मानना है, ''अगर आपके पास समय नहीं है और आप बहुत जल्दी में काम कर रहे हैं तो डेटा को ठीक से समझ नहीं पाएंगे। ट्रायल पार्टिसिपेंट्स के लिए आप उन लोगों को रिक्रूट नहीं कर पाएंगे जो वाकई रिस्क जोन में रहते हैं।'' इसका नतीजा ये होता है कि वैक्सीन के ट्रायल के सटीक नतीजे नहीं मिलते और सटीक नतीजे नहीं मिलने पर कोई वैक्सीन कामयाब नहीं हो सकती।

वैक्सीन की मांग कैसे पूरी होगी?
प्रयोगशाला में वैक्सीन विकसित करना एक बात है और लाखों-करोड़ों लोगों के लिए बड़े पैमाने पर वैक्सीन का निर्माण करना दूसरी बात। वैक्सीन का निर्माण इतने बड़े पैमाने पर आखिर कैसे होगा? इस सवाल पर अमेरिका में येल इंस्टीट्यूट ऑफ ग्लोबल हेल्थ के डायरेक्टर साद उमर कहते हैं, "हमने इससे पहले, इतने बड़े पैमाने पर कभी कोई वैक्सीन नहीं बनाई। वैक्सीन का लाइसेंस मिलने के बाद उसका उत्पादन बढ़ाया जाता है। कोरोना वायरस ने जिस हिसाब से हाहाकार मचाया है, उतने ही बड़े पैमाने पर वैक्सीन के लिए निवेश किया जा रहा है। फिर भले ही उस निवेश का एक हिस्सा बेकार चला जाए।"

अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें  लाइफ़ स्टाइल से संबंधित समाचार (Lifestyle News in Hindi), लाइफ़स्टाइल जगत (Lifestyle section) की अन्य खबरें जैसे हेल्थ एंड फिटनेस न्यूज़ (Health  and fitness news), लाइव फैशन न्यूज़, (live fashion news) लेटेस्ट फूड न्यूज़ इन हिंदी, (latest food news) रिलेशनशिप न्यूज़ (relationship news in Hindi) और यात्रा (travel news in Hindi)  आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़ (Hindi News)।  

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed