कोरोना की संभावित तीसरी लहर से सुरक्षित रहने के लिए सभी लोगों से जल्द से जल्द टीकाकरण कराने की अपील की जा रही है। स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार देश में अबतक 30.90 लाख से अधिक लोगों को एक, जबकि 15.70 लाख लोगों को टीके की दोनों खुराक मिल चुकी हैं। लोगों को कोरोना से सुरक्षित रखने और संक्रमण की रफ्तार पर काबू पाने के लिए अब कई दफ्तरों ने भी कर्मचारियों के लिए वैक्सीनेशन कराना अनिवार्य कर दिया है। कई ऑफिस तो 'नो जैब-नो जॉब' नीति पर काम कर रहे हैं, यानी जबतक आपका टीकाकरण नहीं होगा तब तक आप काम शुरू नहीं कर सकते हैं।
कोरोना से जंग: 'नो जैब-नो जॉब' नीति अपना रहे हैं ऑफिस, जानिए टीकाकरण के बाद कितने सुरक्षित हैं आप?
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वैक्सीनेशन को लेकर दबाव बनाना कितना सही?
वैक्सीनेशन को लेकर केंद्र सरकार के आदेश में इसकी अनिवार्यता जैसा कोई भी जिक्र नहीं है, यानी कि यह व्यक्ति के विवेक पर निर्भर करता है। वहीं कानूनी नजरिए से देखें तो भी संविधान के आर्टिकल 21 में लोगों को 'राइट टू हेल्थकेयर' का विकल्प दिया गया है, जिसके आधार पर वे अपने लिए स्वेच्छा से बेहतर स्वास्थ्य विकल्पों का चयन कर सकते हैं। तो ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर कंपनियां, कर्मचारियों से वैक्सीनेशन कराने पर दबाव क्यों डाल रही हैं?
इस बारे में स्वास्थ्य और ऑफिस प्रबंधन से जुड़े लोगों का कहना है कि वैक्सीनेशन कराने से लोगों को कोरोना के खतरे से सुरक्षित करने के साथ संक्रमण को रोकने में सफलता मिल सकती है, इसीलिए लोगों से टीकाकरण कराने की अपील की जा रही है, ऐसा करा कर लोग गंभीर रोग के खतरे से खुद को सुरक्षित कर सकते हैं।
संक्रमण की गंभीरता को कम कर सकती है वैक्सीन
वैक्सीन की प्रभाविकता को लेकर किए गए अध्ययन के अनुसार वैक्सीन, संक्रमण की गंभीरता को कम करने में सहायक है। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने वैक्सीनेशन के बाद लोगों में संक्रमण के खतरे को जानने के लिए अध्ययन किया। इसके लिए वैक्सीनेशन के बाद संक्रमित हो चुके 677 लोगों का सैंपल लिया गया। इसमें से 85 लोग पहली डोज के बाद जबकि 592 लोगों को दोनों डोज के बाद संक्रमित पाया गया। शोधकर्ताओं ने पाया कि इसमें से 482 लोगों में संक्रमण के एक से अधिक लक्षण देखे गए।
आईसीएमआर के वैज्ञानिकों का मानना है कि कोरोना का डेल्टा वैरिएंट काफी खतरनाक हो सकता है। वैक्सीनेशन के बाद संक्रमित हुए लगभग 86 फीसदी लोगों में कोरोना का यही वैरिएंट संक्रमण की मुख्यवजह बन रहा है। हालांकि वैज्ञानिकों का मानना है कि जिन लोगों का वैक्सीनेशन हो चुका है उनमें संक्रमण के बाद वायरल लोड कम हो सकता है। यही कारण है वैक्सीनेटेड लोगों में रोग के गंभीर रूप लेने का खतरा काफी कम होता है।
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नोट: यह लेख वैक्सीनेशन पर बनाए गए कानूनों और लोगों में टीकाकरण की आवश्यकताओं के आधार पर तैयार किया गया है। कोरोना से सुरक्षित रहने के लिए स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभी लोगों से टीकाकरण कराने की अपील कर रहे हैं।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है।