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सर्वे: टीकाकरण स्वैच्छिक होने के बावजूद लोगों पर बनाया जा रहा है दबाव, जानिए क्या है सरकार का पक्ष?

Sat, 13 Nov 2021 04:21 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Abhilash Srivastava Updated Sat, 13 Nov 2021 04:21 PM IST
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Survey says local administration and offices have made vaccination mandatory
कोविड टीकाकरण - फोटो : Pixabay

दुनिया के तमाम हिस्सों में कोरोना संक्रमण के मामलों में एक बार फिर से उछाल देखने को मिल रहा है। कई देशों ने बढ़ते केस को देखते हुए दोबारा से आवश्यक प्रतिबंध लगाने शुरू कर दिए हैं। भारत के संदर्भ में बात करें तो यहां पिछले कुछ दिनों से कोरोना के मामलों और मृत्यु के आंकड़ों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक कोरोना के गंभीर संक्रमण और इसके कारण होने वाली मौत के खतरे से बचने के लिए सभी लोगों को वैक्सीनेशन करा लेना चाहिए। भारत में अब तक 111 करोड़ से अधिक लोगों को वैक्सीन की कम से कम एक डोज मिल चुकी है।



इस बीच वैक्सीनेशन ड्राइव को लेकर कम्यूनिटी बेस्ट डिजिटली सर्वेक्षण में एक खास बात सामने आई है। सर्वे में शामिल हर 4 में से 1 नागरिक का कहना है स्थानीय प्रशासन और कंपनियों ने कोविड टीकाकरण अनिवार्य कर दिया है। कई ऐसे दफ्तर भी हैं जहां बिना टीकाकरण के प्रवेश की अनुमति नहीं है। महत्वपूर्ण बात यह है कि देश में कोविड-19 के टीकाकरण को पूर्णत: स्वैच्छिक रखा गया है। 

Survey says local administration and offices have made vaccination mandatory
टीकाकरण की अनिवार्यता - फोटो : Pixabay

कई स्थानों पर कर दिया गया है वैक्सीनेशन अनिवार्य
देश के 328 जिलों में करीब 36 हजार लोगों पर किए गए इस सर्वे में टीकाकरण की अनिवार्यता की बात सामने आई है। सर्वे में शामिल 26 फीसदी लोगों ने बताया कि स्थानीय प्रशासन ने उनके जिले में सभी निवासियों के लिए वैक्सीन लेना अनिवार्य कर दिया है। कई ऑफिसों ने कर्मचारियों को वैक्सीन की दूसरी डोज के सार्टिफिकेट के साथ ही प्रवेश की अनुमति दी है। इतना ही नहीं राशन और मिलने वाली अन्य सरकारी सुविधाओं के लिए भी वैक्सीन सार्टिफिकेट की मांग की जा रही है। 

Survey says local administration and offices have made vaccination mandatory
वैक्सीनेशन सर्वेक्षण - फोटो : पीटीआई

सर्वे में क्या पता चला?
सर्वेक्षण में 29 प्रतिशत लोगों ने बताया कि उनके क्षेत्र जैसे कॉलोनी/ बाजार संघों ने लोगों के लिए वैक्सीन का प्रमाण दिखाना अनिवार्य कर दिया है। 40 फीसदी लोगों का कहना है कि उनके 
नियोक्ताओं या दफ्तर ने टीकाकरण अनिवार्य कर दिया है, यहां तक कि बिना प्रमाणपत्र के प्रवेश भी नहीx दिया जाता। गांव-शहर सभी स्थानों से ही कमोबेश ऐसी ही प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। उदाहरण के लिए औरंगाबाद जिला कलेक्टरेट ने उचित मूल्य की दुकानों, गैस एजेंसियों और पेट्रोल पंपों पर केवल उन लोगों को सुविधाएं देने का नियम बनाया है जिन्होंने वैक्सीन की कम से कम एक खुराक ले ली है।

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Survey says local administration and offices have made vaccination mandatory
स्वास्थ्य मंत्रालय - फोटो : Twitter

सरकार का क्या कहना है?
8 अक्टूबर को बॉम्बे उच्च न्यायालय में दायर एक जवाबी हलफनामे के माध्यम से केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा था कि कोविड के लिए टीकाकरण सामाजिक दायित्व का मामला है और इसे सार्वजनिक हित के तौर पर देखना चाहिए। कोरोना संक्रमण की इस लड़ाई में सभी लोगों को एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में टीकाकरण कराना चाहिए। हालांकि इसका किसी भी तरह से यह मतलब नहीं है कि किसी भी व्यक्ति को उसकी इच्छा के विरुद्ध टीका लगाने के लिए मजबूर किया जा सकता है।

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Survey says local administration and offices have made vaccination mandatory
कोरोना वैक्सीनेशन प्रोटोकॉल - फोटो : पीटीआई

वैक्सीनेशन को लेकर दबाव बनाना सही नहीं
वैक्सीनेशन को लेकर केंद्र सरकार के आदेश में इसकी अनिवार्यता जैसा कोई भी जिक्र नहीं है, यानी कि यह व्यक्ति के विवेक पर निर्भर करता है। वहीं कानूनी नजरिए से देखें तो भी संविधान के आर्टिकल 21 में लोगों को 'राइट टू हेल्थकेयर' का विकल्प दिया गया है, जिसके आधार पर वे अपने लिए स्वेच्छा से बेहतर स्वास्थ्य विकल्पों का चयन कर सकते हैं। तो ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर कंपनियां, कर्मचारियों से वैक्सीनेशन कराने पर दबाव क्यों डाल रही हैं? कोरोना से बचाव के लिए टीकाकरण आवश्यक है, पर इसका लोगों को प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष दबाव बनाना कितना सही है।


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अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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