राजधानी दिल्ली-एनसीआर में पिछले कुछ हफ्तों से एच1एन1 यानी स्वाइन फ्लू संक्रमण को लेकर लोगों में काफी चिंता देखी जा रही है। अब तक संक्रमण के 2600 से अधिक मामले रिपोर्ट किए जा चुके हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, वैसे तो एच1एन1 ज्यादा गंभीर रोगों का कारण नहीं बनता है, पर छोटे बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर इम्युनिटी वाले लोगों के लिए ये खतरा बढ़ाने वाला हो सकता है। गंभीर मामलों में स्वाइन फ्लू से फेफड़ों-हृदय और आंखों पर भी असर हो सकता है।
दिल्ली-एनसीआर: एच1एन1 की टेंशन के साथ डेंगू का अटैक, लक्षणों से कैसे पहचानें आपको कौन सी बीमारी?
दिल्ली में एच1एन1 और डेंगू के बढ़ते मामलों चिंता बढ़ा दी है। दोनों में बुखार, सिरदर्द और शरीर दर्द जैसे लक्षण समान हो सकते हैं। लेकिन एच1एन1 में खांसी व सांस संबंधी लक्षण प्रमुख हैं, जबकि डेंगू में रैश, आंखों के पीछे दर्द और गंभीर स्थिति में ब्लीडिंग जैसी दिक्कतें हो सकती हैं।
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स्वाइन फ्लू के साथ डेंगू का भी अटैक
राजधानी में लगातार बारिश के बाद अब मच्छर जनित बीमारियों का खतरा बढ़ने लगा है। बारिश से जगह-जगह जमा पानी के बीच पिछले एक सप्ताह में डेंगू के 26, मलेरिया के 15 और चिकनगुनिया के दो नए मामले सामने आए हैं।
एमसीडी की ताजा रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली में इस साल अब तक डेंगू के 272, मलेरिया के 95 और चिकनगुनिया के 21 मामले दर्ज हो चुके हैं। अगस्त में ही डेंगू के 51 मामले सामने आ चुके हैं। यह इस साल किसी एक महीने में डेंगू के मामलों का दूसरा सबसे बड़ा आंकड़ा है, इससे पहले अप्रैल में 52 मामले सामने आए थे।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, स्वाइन फ्लू और डेंगू के कई लक्षण मिलते-जुलते हो सकते हैं, इसे लेकर लोगों में और भी कंफ्यूजन देखा जा रहा है।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
अमर उजाला से बातचीत में इंटरनल मेडिसिन के डॉक्टर सौरभ सेठ कहते हैं, डेंगू और स्वाइन फ्लू दोनों बीमारियां शुरुआत में एक जैसी लग सकती हैं। अचानक बुखार, सिरदर्द, शरीर में दर्द, कमजोरी और थकान जैसे लक्षण दोनों में कॉमन हैं। इन्हें देखकर घर पर यह तय करना मुश्किल है कि मरीज को डेंगू है या स्वाइन फ्लू?
- डेंगू में शरीर और जोड़ों में तेज दर्द हो सकता है, जबकि एच1एन1 में बुखार के साथ बदन दर्द और सिरदर्द आम हैं। यही समानता कई बार बीमारी के सही पहचान में देरी कर सकती है।
- हालांकि बीमारी के बढ़ने पर फर्क दिखाई देने लगता है। अगर किसी को तीन दिन से ज्यादा समय से बुखार के साथ कुछ अन्य दिक्कतें बनी हुई हैं तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।
स्वाइन फ्लू और डेंगू के खतरे
- स्वाइन फ्लू यानी एच1एन1, इंफ्लूएंजा-ए वायरस से होने वाला श्वसन संक्रमण है। यह संक्रमित व्यक्ति के खांसने-छींकने और बोलते समय निकलने वाली ड्रॉपलेट्स के संपर्क में आने से फैल सकता है। स्वाइन फ्लू में आम तौर पर बुखार, खांसी, गले में खराश, सिरदर्द, ठंड लगने, शरीर में दर्द और थकान जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। गंभीर स्थितियों में इससे सांस फूलने, सीने में दर्द, सुस्ती, ब्लड प्रेशर लो होने के साथ कुछ लोगों में होंठ-नाखून नीले पड़ने जैसी दिक्कते हो सकती हैं।
- डेंगू भी वायरल संक्रमण है, लेकिन ये स्वाइन फ्लू की तरह एक व्यक्ति से दूसरे में श्वसन संपर्क से नहीं होता। यह संक्रमित मच्छर के काटने से फैलता है। डेंगू के कारण तेज बुखार, सिरदर्द, शरीर में दर्द, मतली और त्वचा पर रैशज होना आम संकेत हैं। अधिकांश मरीज एक-दो सप्ताह में ठीक हो जाते हैं, लेकिन कुछ मामलों में बीमारी गंभीर रूप ले सकती है।
कैसे करें दोनों में अतर?
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, स्वाइन फ्लू और डेंगू के शुरुआती लक्षण मिलते-जुलते होते हैं। इसलिए लोग समझ नहीं पाते कि उन्हें कौन सी बीमारी है, पर कुछ संकेतों से आप फर्क कर सकते हैं।
- खांसी, गले में खराश, नाक बहना या बंद होना और सांस से जुड़ी परेशानी स्वाइन फ्लू की ओर इशारा करते हैं, क्योंकि यह मुख्य रूप से श्वसन संक्रमण है।
- इसके विपरीत डेंगू में तेज बुखार के साथ आंखों के पीछे दर्द, शरीर में तेज दर्द, मतली-उल्टी और रैशज जैसे हो सकते हैं।
डॉक्टर कहते हैं, डेंगू गंभीर रूप में ब्लीडिंग और शॉक जैसी स्थितियां पैदा कर सकता है और कुछ मामलों में जानलेवा भी हो सकता है। इसी तरह स्वाइन फ्लू की गंभीर समस्या में सांस लेने में कठिनाई, सीने में दर्द, होंठ या चेहरा के नीला पड़ने जैसे समस्या हो सकती है। इसलिए अगर बुखार और अन्य दिक्कतें लगातार बनी हुई हैं तो समय रहते विशेषज्ञ से मिलकर जांच कराएं।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।