देश इस समय स्वास्थ्य संबंधी सबसे कठिन दौर से गुजर रहा है। कोरोना वायरस के बदलते स्ट्रेनों को कारण लोगों को तमाम तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इस दूसरी लहर में सबसे ज्यादा शिकार युवा हो रहे हैं। पिछले साल कोरोना की पहली लहर में विशेषज्ञ मान रहे थे कि जिन लोगों को एक बार संक्रमण हो गया है वह इस वायरस से आगे के लिए सुरक्षित माने जा सकते हैं। इसी आधार पर कुछ विशेषज्ञों का यह भी मानना था कि देश में जल्द ही हर्ड इम्यूनिटी भी विकसित हो सकती है। लेकिन हाल ही में हुए अध्ययन में शोधकर्ताओं ने ऐसे सभी विचारों को सिरे से खारिज कर दिया है।
क्या संक्रमण के बाद भी नहीं बन पा रही हैं पर्याप्त एंटीबॉडी? अध्ययन में शोधकर्ताओं ने किए चौंकाने वाले खुलासे
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युवाओं में नहीं कम होता है खतरा
माउंट सिनाई के इकन स्कूल ऑफ मेडिसिन और नेवल मेडिकल रिसर्च सेंटर के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए एक हालिया अध्ययन में कोरोना वायरस संक्रमण और इससे बनने वाली एंटीबॉडी को लेकर कई मुद्दों पर प्रकाश डाला गया है। शोधकर्ताओं का कहना है कि कोरोना वायरस से एक बार संक्रमित हो चुके युवा स्वयं को वायरस के अगले हमले से पूरी तरह सुरक्षित नहीं मान सकते हैं। एक बार संक्रमित होने के बाद भी युवाओं में दोबारा संक्रमण का खतरा कम नहीं होता है।
द लैंसेट रेस्पिरेटरी मेडिसिन जर्नल में प्रकाशित अध्ययन में बताया गया है कि मई से लेकर नवंबर 2020 के बीच शोधकर्ताओं ने 18-20 साल की आयु वाले 2346 लोगों पर यह अध्ययन किया। मई 2020 में अध्ययन की शुरुआत में 189 लोग सीरोपॉजिटिव जबकि 2247 सीरोनेगेटिव थे। अध्ययन के अंत में नवंबर 2020 में जब शोधकर्ताओं ने इनकी दोबारा जांच की तो 189 सीरोपॉजिटिव लोगों में से 19 को दोबारा संक्रमित पाया गया।
नहीं बन पा रही हैं पर्याप्त एंटीबॉडीज
अध्ययन में शोधकर्ताओं ने पाया कि जिन लोगों को दोबारा कोरोना वायरस से संक्रमित पाया गया उनमें वायरस के खिलाफ एंटीबॉडी का स्तर कम था। विशेषज्ञों ने पाया कि संक्रमण के बाद शरीर में वायरस के खिलाफ बनी एंटीबॉडीज जल्द ही खत्म हो जाती हैं जिससे लोगों में दोबारा संक्रमण का खतरा हो सकता है।
इस बारे में बात करते हुए कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ. मनीष सिंघल बताते हैं कि कोरोना के नए स्ट्रेनों के कारण वह लोग भी दोबारा से संक्रमित हो रहे हैं जिनके शरीर में पहले संक्रमण के बाद एंटीबॉडीज बन चुकी हैं। ऐसी स्थिति में जब वायरस बार-बार अपना रूप बदल रहा है, संक्रमण से बचने के लिए वैक्सीन ही सबसे प्रभावी उपाय हो सकता है। भारत में तैयार दोनों वैक्सीन कोरोना के सभी स्ट्रेनों के खिलाफ अब तक प्रभावी साबित हुई हैं।
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स्रोत और संदर्भ:
SARS-CoV-2 seropositivity and subsequent infection risk in healthy young adults: a prospective cohort study
https://www.thelancet.com/journals/lanres/article/PIIS2213-2600(21)00158-2/fulltext
अस्वीकरण नोट: यह लेख द लैंसेट रेस्पिरेटरी मेडिसिन जर्नल में प्रकाशित अध्ययन के आधार पर तैयार किया गया है। लेख में शामिल सूचना व तथ्य आपकी जागरूकता और जानकारी बढ़ाने के लिए साझा किए गए हैं। किसी भी तरह की बीमारी के लक्षण हों अथवा आप किसी रोग से ग्रसित हों तो अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें। अमर उजाला राउटर्स के इस रिपोर्ट को लेकर कोई दावा नहीं करता है।