Health Tips for Sedentary Life: आज की आधुनिक दुनिया में जहां तकनीक और आराम ने हमारे जीवन को आसान बना दिया है, वहीं एक गंभीर समस्या भी खूब देखने को मिल रही है, और वो है सेडेंटरी लाइफस्टाइल। इसको सरल करके समझें तो यह एक ऐसी जीवनशैली है जिसमें शारीरिक गतिविधि बहुत कम या न के बराबर होती है। अक्सर लोग दफ्तरों में घंटों बैठकर काम करते हैं, कुछ लोग घर पर ही बैठे-बैठे टीवी या मोबाइल पर ज्यादा समय बिताते हैं और व्यायाम भी नहीं करते हैं। बहुत से इस जीवनशैली को सामान्य मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन इसका हमारे शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर बहुत बुरा असर पड़ता है।
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Health Tips: सेडेंटरी लाइफस्टाइल की वजह से हमारे स्वास्थ्य में होते हैं ये नकारात्मक बदलाव, जरूर जानें
Mon, 08 Sep 2025 07:00 PM IST
शिखर बरनवाल
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शिखर बरनवाल
Updated Mon, 08 Sep 2025 07:00 PM IST
सार
सेडेंटरी लाइफस्टाइल किसी भी व्यक्ति के संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक होती है। यह एक ऐसी जीवनशैली है जिसमें लोग अपना अधिकतम समय एक ही जगह पर बीता देते हैं। आइए इस लेख में इसी के बारे में जानते हैं कि ये जीवनशैली हमारे सेहत को किस तरह प्रभावित करती है।
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सेडेंटरी लाइफस्टाइल
- फोटो : Freepik
मोटापा
- फोटो : Adobe stock photos
मोटापा और दिल की बीमारियां
सेडेंटरी लाइफस्टाइल का सबसे बड़ा और सीधा असर हमारे वजन पर पड़ता है। जब हम कम शारीरिक गतिविधि करते हैं, तो शरीर में कैलोरी बर्न नहीं हो पाती, जिससे मोटापा बढ़ता है। मोटापा अपने आप में कई बीमारियों का कारण है, जैसे हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और हाई कोलेस्ट्रॉल। ये सभी मिलकर हृदय रोगों का खतरा कई गुना बढ़ा देते हैं।
ये भी पढ़ें- Nepal Social Media Ban: 'क्रांति का जरिया' रहे सोशल मीडिया को लेकर नेपाल में क्रांति, प्रदर्शन के पीछे के मनोवैज्ञानिक पहलू को समझिए
सेडेंटरी लाइफस्टाइल का सबसे बड़ा और सीधा असर हमारे वजन पर पड़ता है। जब हम कम शारीरिक गतिविधि करते हैं, तो शरीर में कैलोरी बर्न नहीं हो पाती, जिससे मोटापा बढ़ता है। मोटापा अपने आप में कई बीमारियों का कारण है, जैसे हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और हाई कोलेस्ट्रॉल। ये सभी मिलकर हृदय रोगों का खतरा कई गुना बढ़ा देते हैं।
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हड्डियों की समस्या
- फोटो : Freepik.com
हड्डियों और मांसपेशियों का कमजोर होना
शारीरिक गतिविधि की कमी से हमारी हड्डियां और मांसपेशियां कमजोर होने लगती हैं। जब हम व्यायाम नहीं करते हैं, तो हड्डियों का घनत्व कम हो जाता है, जिससे ऑस्टियोपोरोसिस जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। इसी तरह मांसपेशियां भी जब निष्क्रिय रहती हैं तो इनकी लचीलापन भी कम हो जाता है, जिससे जोड़ों में दर्द और अकड़न की समस्या हो सकती है।
ये भी पढ़ें- Health Tips: डाइट में इन चीजों को शामिल करने से बढ़ सकता है आपका स्पर्म काउंट, डॉक्टर ने दिया सुझाव
शारीरिक गतिविधि की कमी से हमारी हड्डियां और मांसपेशियां कमजोर होने लगती हैं। जब हम व्यायाम नहीं करते हैं, तो हड्डियों का घनत्व कम हो जाता है, जिससे ऑस्टियोपोरोसिस जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। इसी तरह मांसपेशियां भी जब निष्क्रिय रहती हैं तो इनकी लचीलापन भी कम हो जाता है, जिससे जोड़ों में दर्द और अकड़न की समस्या हो सकती है।
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सेडेंटरी लाइफस्टाइल
- फोटो : Freepik
मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर
सेडेंटरी लाइफस्टाइल का असर हमारे मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ता है। शारीरिक गतिविधि न करने से दिमाग में एंडोर्फिन जैसे 'हैप्पी हार्मोन' का उत्पादन कम हो जाता है। इससे तनाव, अवसाद और चिंता जैसी समस्याएं हावी सकती हैं। एक जगह बैठे रहने से सामाजिक संपर्क भी कम होता है, जो मानसिक स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है।
सेडेंटरी लाइफस्टाइल का असर हमारे मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ता है। शारीरिक गतिविधि न करने से दिमाग में एंडोर्फिन जैसे 'हैप्पी हार्मोन' का उत्पादन कम हो जाता है। इससे तनाव, अवसाद और चिंता जैसी समस्याएं हावी सकती हैं। एक जगह बैठे रहने से सामाजिक संपर्क भी कम होता है, जो मानसिक स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है।
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दौड़ना
- फोटो : Adobe Stock
क्या करें?
इस जीवनशैली से बचने के लिए, अपनी दिनचर्या में छोटे-छोटे बदलाव लाएं। हर घंटे काम से 5 मिनट का ब्रेक लें और थोड़ा टहलें। लिफ्ट की जगह सीढ़ियों का इस्तेमाल करें। सुबह या शाम में हर दिन 30 मिनट की वॉक या योगा जरूर करें। अगर संभव हो तो ऑफिस में स्टैंडिंग डेस्क का उपयोग करें। इन छोटी-छोटी आदतों को अपनाकर आप अपने स्वास्थ्य को बेहतर बना सकते हैं।
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
इस जीवनशैली से बचने के लिए, अपनी दिनचर्या में छोटे-छोटे बदलाव लाएं। हर घंटे काम से 5 मिनट का ब्रेक लें और थोड़ा टहलें। लिफ्ट की जगह सीढ़ियों का इस्तेमाल करें। सुबह या शाम में हर दिन 30 मिनट की वॉक या योगा जरूर करें। अगर संभव हो तो ऑफिस में स्टैंडिंग डेस्क का उपयोग करें। इन छोटी-छोटी आदतों को अपनाकर आप अपने स्वास्थ्य को बेहतर बना सकते हैं।
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।