निमोनिया एक बहुत ही गंभीर बीमारी है, जो सीधे फेफड़ों पर असर डालता है। इस बीमारी में फेफड़े संक्रमित हो जाते हैं। दरअसल, दोनों फेफड़ों के वायुकोष में द्रव या मवाद भर जाता है, जिससे बलगम या मवाद वाली खांसी, बुखार, ठंड लगना और सांस लेने में तकलीफ हो सकती है। कुछ साल पहले आई एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में हर साल एक लाख से भी अधिक पांच साल से कम उम्र के बच्चों की मौत निमोनिया के कारण हो जाती है। हालांकि यह बीमारी बच्चों के अलावा 65 साल से अधिक उम्र के लोग और कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले लोगों के लिए भी ज्यादा हानिकारक होती है। आइए जानते हैं निमोनिया के उन लक्षणों के बारे में, जिन्हें नजरअंदाज करना जानलेवा हो सकता है।
निमोनिया हो सकता है जानलेवा, इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज
निमोनिया के लक्षण
- बलगम वाली खांसी
- बुखार
- कंपकंपी और पसीना होना
- भूख कम लगना
- मतली और उल्टी
आपको निमोनिया के इन लक्षणों को पहचानने की जरूरत है और ऐसी स्थिति होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
निमोनिया के गंभीर लक्षण
- सांस लेने में परेशानी (तेजी से सांस लेना)
- धड़कन की तेजी
- छाती में तेज दर्द होना
- कम रक्तचाप
- खांसी में खून आना
अगर आपके साथ ऐसा कुछ होता है तो इसका मतलब है कि स्थिति गंभीर है और आपको तुरंत डॉक्टर से दिखाने की जरूरत है।
निमोनिया से बचाव के उपाय
वैसे तो निमोनिया के कई प्रकार हैं, जिनमें से कुछ को रोकने के लिए टीके उपलब्ध हैं। खासतौर पर बच्चों को तो निमोनिया का टीका जरूर लगवाना चाहिए। इससे बचने के लिए बेहतर है कि साफ-सफाई का पूरा ध्यान रखें। अपने हाथों को समय-समय पर धोते रहें और जरूरत पड़ने पर सैनिटाइजर का भी इस्तेमाल करें। इसके अलावा सिगरेट-बीड़ी से दूर रहें, क्योंकि ये आपके फेफड़ों को और भी ज्यादा खराब कर सकते हैं।
निमोनिया से बचाव के लिए एक और चीज जो सबसे जरूरी है, वो है कि आप अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्यूनिटी को मजबूत बनाएं। इसके लिए आप स्वस्थ आहार लें, नियमित व्यायाम करें और पर्याप्त नींद लें। ये सारी चीजें आपको अन्य कई बीमारियों से भी बचने में मदद कर सकती हैं।