वैश्विक स्तर पर पिछले दो साल से अधिक समय से जारी कोरोना महामारी के कारण स्वास्थ्य संबंधी कई तरह की समस्याएं देखने को मिलीं। कोरोना के डेल्टा जैसे वैरिएंट्स ने जहां फेफड़े और हृदय की समस्याओं को काफी बढ़ा दिया, वहीं मौजूदा समय में मुसीबतों का कारण बने ओमिक्रॉन वैरिएंट की संक्रामकता दर चिंता का सबब बनी हुई है। वैसे तो ओमिक्रॉन संक्रमित लोगों में गंभीर रोग के मामले बहुत कम रिपोर्ट किए जा रहे हैं, इसके लक्षण ज्यादातर हल्के-मध्यम स्तर के ही रहते हैं, हालांकि जिस तेजी से यह लोगों को संक्रमित कर रहा है, उसको लेकर विशेषज्ञ सभी विशेष सावधानी बरतते रहने की सलाह देते हैं। कोरोना संक्रमण के कारण होने वाले रोग के साथ-साथ, संक्रमण से ठीक होने के बाद भी बनी रहने वाली समस्याएं शोधकर्ताओं के लिए नई चुनौतियां खड़ी कर रही हैं।
Covid-19: क्या गंभीर लॉन्ग कोविड जटिलताओं का कारण बन सकते हैं ओमिक्रॉन वैरिएंट्स? अध्ययन में सामने आई यह जानकारी
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ओमिक्रॉन संक्रमितों में लॉन्ग कोविड का खतरा कम
ओमिक्रॉन वैरिएंट से संक्रमण की स्थिति में लॉन्ग कोविड के जोखिम को जानने के लिए हुए शोध और सर्वे के परिणाम थोड़ी राहत देने वाले हैं। शोधकर्ताओं द्वारा जारी किए गए डेटा से संकेत मिलता है कि ओमिक्रॉन और इसके सब-वैरिएंट्स से संक्रमित रह चुके लोगों में लॉन्ग कोविड का जोखिम कम होता है।
डेल्टा और कोरोना के अन्य वैरिएंट्स के कारण संक्रमितों में जहां पोस्ट कोविड की समस्या छह महीने से एक साल तक बनी देखी जा रही है, वहीं ओमिक्रॉन से संक्रमितों में ज्यादा समय तक यह दिक्कतें नहीं देखने को मिली हैं।
डेल्टा वैरिएंट के मुकाबले जोखिम कम
इसी जोखिम को बारे में जानने के लिए यूके के ऑफिस फॉर नेशनल स्टैटिस्टिक्स (ओएनएस) द्वारा हाल ही में जारी डेटा से पता चलता है कि जिस तरह से डेल्टा वैरिएंट के कारण लोगों में लंबे समय तक लॉन्ग कोविड के लक्षण बने रहते हैं, उसकी तुलना में ओमिक्रॉन संक्रमण की स्थिति में इसका जोखिम 49.7 फीसदी तक कम पाया गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि वैक्सीन की दो डोज ले चुके लोगों में संक्रमण की गंभीरता और लॉन्ग कोविड के लक्षण, दोनों का खतरा पहले के मुकाबले कम देखा जा रहा है। हालांकि शोधकर्ताओं का कहना है कि जिस तरह से ओमिक्रॉन के अलग-अलग सब-वैरिएंट्स सामने आ रहे हैं, ऐसे में इसके खतरे को समझने के लिए अभी विस्तृत शोध की आवश्यकता है।
वैक्सीनेशन का बड़ा योगदान
ओएनएस के डेटा के अनुसार वैक्सीन की दो डोज ले चुके लोगों में डेल्टा वैरिएंट से संक्रमण की स्थिति में जहां लॉन्ग कोविड का खतरा 16 फीसदी पाया गया था, वहीं ओमिक्रॉन के मूल स्वरूप BA.1 की स्थिति में यह आंकड़ा घटकर 9 फीसदी ही रह गया है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि जिस तरह से वैश्विक स्तर पर लॉन्ग कोविड को लेकर अब तक के अध्ययन काफी चिंता बढ़ा रहे थे, उनके बीच ओमिक्रॉन संक्रमितों में मिल रहे डेटा से थोड़ी राहत जरूर मिली है।
लॉन्ग कोविड को लेकर डब्ल्यूएचओ का अलर्ट
लॉन्ग कोविड के बढ़ते खतरे को लेकर हाल ही में विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने लोगों को सचेत करते हुए इसको लेकर सावधानी बरतने की सलाह दी है। डब्ल्यूएचओ ने एक विज्ञप्ति में कहा कि लॉन्ग कोविड का जोखिम, संक्रमण से ठीक हो जाने के कुछ हफ्तों से लेकर कई महीनों या साल तक भी बना रह सकता है। अगर इन लक्षणों पर गंभीरता से ध्यान न दिया जाए या समस्या को अनुपचारित ही छोड़ दिया जाए तो इससे गंभीर स्थिति विकसित होने का जोखिम भी काफी बढ़ सकता है।