दुनियाभर में तेजी से बढ़ती क्रोनिक बीमारियों के लिए मोटापा या अधिक वजन की स्थिति को प्रमुख जोखिम कारक माना जाता है। दुर्भाग्यवश साल-दर-साल ये समस्या बढ़ती ही जा रही है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की एक हालिया रिपोर्ट परेशान करने वाली तस्वीर पेश करती है। रिपोर्ट के मुताबिक वैश्विक स्तर पर हर आठ में से एक व्यक्ति मोटापे की श्रेणी में आता है।
चिंताजनक: हर आठवां इंसान इस गंभीर स्वास्थ्य समस्या का शिकार, इससे हृदय रोगों का भी बढ़ जाता है जोखिम
हर उम्र में देखी जा रही है मोटापे की समस्या
रिपोर्ट के मुताबिक भारत में अनुमानित 25 मिलियन (2.5 करोड़) बच्चे मोटापाग्रस्त हो सकते हैं, जिससे भविष्य की स्वास्थ्य सेवा प्रणाली पर भारी बोझ का खतरा बढ़ जाता है। यही कारण है कि डायबिटीज और ब्लड प्रेशर जैसी बीमारियों की शुरुआत होने की औसत आयु भी कम होती जा रही है। तेजी से बढ़ते हृदय रोग-हार्ट अटैक के ज्यादातर मामले भी प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से अधिक वजन से संबंधित माने जाते हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, मोटापे के कारण तीन बीमारियों के मामले सबसे ज्यादा देखे जा रहे हैं जिनके बारे में जानना और बचाव के प्रयास करते रहना सभी के लिए बहुत आवश्यक है।
बच्चों में मोटापे का खतरा
डब्ल्यूएचओं की रिपोर्ट के मुताबिक बचपन और किशोरावस्था में अधिक वजन होना कई तरह से स्वास्थ्य को प्रभावित करता है। यह विभिन्न गैर-संचारी रोगों जैसे कि टाइप-2 डायबिटीज और हृदय रोग के जोखिम और इसके समय से पहले होने के खतरे को बढ़ाने वाली समस्या है।
बचपन और किशोरावस्था में मोटापे के प्रतिकूल साइकोसोशल परिणाम भी होते हैं, जिसमें स्कूल के प्रदर्शन और जीवन की गुणवत्ता से संबंधित समस्याएं, कलंक और भेदभाव की दिक्कत भी देखी जाती रही है। मोटापा के कारण 20 की उम्र तक बच्चों में हाई ब्लड प्रेशर का खतरा भी बढ़ जाता है जिससे हृदय रोगों का जोखिम हो सकता है।
हृदय रोग और डायबिटीज की समस्या
किसी भी उम्र में मोटापे के कारण आपमें उच्च रक्तचाप और कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ने की आशंका हो सकती है जो हृदय रोग और स्ट्रोक के लिए जोखिम कारक है। इसी तरह मोटापा शरीर द्वारा रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित करने के लिए इंसुलिन का उपयोग करने के तरीके को भी प्रभावित कर सकता है। इससे इंसुलिन प्रतिरोध और मधुमेह का खतरा बढ़ जाता है।
अधिक वजन वाले लोगों में हृदय रोग-डायबिटीज दोनों का खतरा, स्वस्थ वजन वालों की तुलना में ज्यादा देखा जाता रहा है।
फैटी लिवर डिजीज के हो सकते हैं शिकार
मोटापा, फैटी लिवर रोग के जोखिम को भी बढ़ा देता है। ये भारत में तेजी से बढ़ती लिवर की समस्या है। हाल ही में नई दिल्ली स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर एंड बिलियरी साइंसेज में एक कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने चौंकाने वाला डेटा प्रस्तुत किया था। केंद्रीय मंत्री ने बताया, देश में हर तीसरे व्यक्ति को फैटी लिवर डिजीज की समस्या हो सकती है।
इस बीमारी में लिवर में वसा जमा होने लगती है जिससे लिवर को गंभीर क्षति और लिवर सिरोसिस जैसी घातक बीमारियों का भी जोखिम हो सकता है।
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नोट: यह लेख डॉक्टर्स का सलाह और मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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