भारत सरकार साल 2050 तक देश को टीबी मुक्त बनाने के लक्ष्य पर काम कर रही है। हालांकि कई रिपोर्ट्स इस तरफ संकेत करते हैं कि जिस तरह से देश में पिछले कुछ वर्षों में टीबी के मामले बढ़ते हुए देखे गए हैं, ऐसे में ये लक्ष्य हासिल करना काफी कठिन हो सकता है।
TB Eradication: वैज्ञानिकों ने बताया- इस उपाय से कम हो सकता है टीबी का जोखिम, मृत्युदर में भी आएगी कमी
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कम हो सकता है टीबी रोग का खतरा
अगस्त 2019 से अगस्त 2022 के बीच झारखंड के चार जिलों में आयोजित किए गए परीक्षण में पाया गया है कि अगर पोषण पर ध्यान दे दिया जाए तो इससे फेफड़ों के इस रोग के खतरे को कम किया जा सकता है।
द लैंसेट ग्लोबल हेल्थ में प्रकाशित इस अध्ययन में पाया गया कि यह उपाय टीबी के खतरे को 48 फीसदी तक कम करने में मददगार हो सकती है। छह महीने तक चले अध्ययन के दौरान कंट्रोल ग्रुप वाले 122 लोगों, इंटरवेंशन ग्रुप वाले केवल 96 लोगों में टीबी के मामले देखे गए।
टीबी रोगियों के लिए जरूरी है उचित पोषण
इंटरवेंशन ग्रुप वाले सदस्य को छह महीने के लिए मासिक आधार पर पोषण सहायता दी गई जिसमें 5 किलो चावल, 1.5 किलो अरहर की दाल (अरहर दाल) और एक सूक्ष्म पोषक तत्व वाली चीजें थीं। इसके अलावा टीबी के शिकार 2,800 लोगों को भी पोषण सहायता दी गई।
शोधकर्ताओं ने पाया कि जिन लोगों को उचित पोषण मिला, उनके वजन और शारीरिक स्थिति में काफी सुधार हुआ। शोधकर्ता बताते हैं कि टीबी के निदान के शुरुआती दो महीनों वजन बढ़ने से टीबी से मृत्यु दर का जोखिम 60% कम हो सकता है।
क्या कहते हैं शोधकर्ता?
येनेपोया मेडिकल कॉलेज, मंगलुरु के डॉक्टर अनुराग भार्गव कहते हैं, अल्पपोषण या पोषण में कमी की स्थिति टीबी रोगियों में मृत्यु के जोखिमों को बढ़ाने वाली हो सकती है। टीबी के जोखिम कारकों में कुपोषण प्रमुख है। हर साल टीबी के 40% से अधिक नए रोगियों में इस रोग के विकसित होने का कारण कुपोषण हो सकता है।
मधुमेह, एचआईवी संक्रमण, धूम्रपान और शराब जैसे अन्य जोखिम कारकों पर भी ध्यान देने की आवश्यकता है, देश से टीबी के जोखिमों को कम करने में यह महत्वपूर्ण है।
उपचार के साथ सही पोषण भी जरूरी
एनआईआरटी (नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर रिसर्च इन ट्यूबरकुलोसिस), चेन्नई द्वारा पहले के अध्ययनों से पता चला है कि जिन टीबी रोगियों का वजन 35 किलोग्राम से कम था, उनकी मृत्यु दर 45 किलोग्राम से अधिक वजन वाले लोगों की तुलना में चार गुना अधिक थी। यानी कि अगर रोगियों को समय रहते उपचार के साथ उचित पोषण प्राप्त हो जाए तो टीबी की जटिलताओं और इसके मृत्युदर को कम करने में भी मदद मिल सकती है।
---------------
स्रोत और संदर्भ
Nutritional support for adult patients with microbiologically confirmed pulmonary tuberculosis: outcomes in a programmatic cohort nested within the RATIONS trial in Jharkhand, India
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।