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हेल्थ टिप: 35+ की उम्र में कैसी हो आपकी थाली? इन चीजों को करें डाइट में शामिल
Tue, 01 Sep 2026 11:14 AM IST
Shruti Gaur
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Shruti Gaur
Updated Tue, 01 Sep 2026 11:14 AM IST
सार
Healthy diet: अगर आपकी उम्र 35 के पार हो गई है तो अपने खाने की थाली का खास ध्यान रखें। आइए आपको बताते हैं कि एक उम्र के बाद आपकी थाली में कौन सी चीजें अवश्य होनी चाहिए।
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35 की उम्र के बाद थाली में करें ये बदलाव
- फोटो : AI
Healthy diet: 35 की उम्र पार करने के बाद शरीर में कई तरह के बदलाव धीरे-धीरे आने लगते हैं। मेटाबॉलिज्म, मांसपेशियों की ताकत और शरीर की पोषण संबंधी जरूरतें उम्र के साथ बदल सकती हैं। ऐसे में रोज की थाली पर थोड़ा ध्यान देना जरूरी हो जाता है। लेकिन इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि स्वादिष्ट खाना छोड़कर सिर्फ फीका और उबला हुआ भोजन ही खाना पड़ेगा।
35 की उम्र के बाद थाली में करें ये बदलाव
- फोटो : AI
35+ के बाद थाली में क्या बदलाव करें?
1. प्रोटीन को दें प्राथमिकता
उम्र बढ़ने के साथ मांसपेशियों को मजबूत बनाए रखना महत्वपूर्ण हो जाता है। इसलिए रोज के भोजन में पर्याप्त प्रोटीन स्रोत शामिल करना चाहिए। दाल, चना, राजमा, सोयाबीन, पनीर, दही, अंडे, मछली और चिकन जैसे विकल्प डाइट का हिस्सा बनाए जा सकते हैं।
2. साबुत अनाज चुनें
रिफाइंड अनाज की जगह गेहूं, जई, बाजरा, ज्वार, रागी और अन्य साबुत अनाज को डाइट में शामिल करना बेहतर विकल्प हो सकता है। इनमें फाइबर समेत कई पोषक तत्व पाए जाते हैं और ये पेट को लंबे समय तक भरा रखने में मदद कर सकते हैं।
1. प्रोटीन को दें प्राथमिकता
उम्र बढ़ने के साथ मांसपेशियों को मजबूत बनाए रखना महत्वपूर्ण हो जाता है। इसलिए रोज के भोजन में पर्याप्त प्रोटीन स्रोत शामिल करना चाहिए। दाल, चना, राजमा, सोयाबीन, पनीर, दही, अंडे, मछली और चिकन जैसे विकल्प डाइट का हिस्सा बनाए जा सकते हैं।
2. साबुत अनाज चुनें
रिफाइंड अनाज की जगह गेहूं, जई, बाजरा, ज्वार, रागी और अन्य साबुत अनाज को डाइट में शामिल करना बेहतर विकल्प हो सकता है। इनमें फाइबर समेत कई पोषक तत्व पाए जाते हैं और ये पेट को लंबे समय तक भरा रखने में मदद कर सकते हैं।
35 की उम्र के बाद थाली में करें ये बदलाव
- फोटो : AI
3. थाली में सब्जियों और फलों की मात्रा बढ़ाएं
रंग-बिरंगी सब्जियां और मौसमी फल शरीर को विटामिन, मिनरल्स और फाइबर प्रदान करते हैं। कोशिश करें कि भोजन में अलग-अलग रंगों की सब्जियां शामिल हों। फल को जूस के बजाय साबुत खाना अधिक फायदेमंद विकल्प हो सकता है।
4. हेल्दी फैट को जगह दें
फैट को पूरी तरह डाइट से हटाने की जरूरत नहीं है। बादाम, अखरोट, मूंगफली, अलसी, तिल और चिया सीड्स जैसे खाद्य पदार्थों में पाए जाने वाले फैट को संतुलित मात्रा में लिया जा सकता है। वहीं बहुत ज्यादा तला-भुना और ट्रांस फैट वाला भोजन सीमित करना बेहतर है।
रंग-बिरंगी सब्जियां और मौसमी फल शरीर को विटामिन, मिनरल्स और फाइबर प्रदान करते हैं। कोशिश करें कि भोजन में अलग-अलग रंगों की सब्जियां शामिल हों। फल को जूस के बजाय साबुत खाना अधिक फायदेमंद विकल्प हो सकता है।
4. हेल्दी फैट को जगह दें
फैट को पूरी तरह डाइट से हटाने की जरूरत नहीं है। बादाम, अखरोट, मूंगफली, अलसी, तिल और चिया सीड्स जैसे खाद्य पदार्थों में पाए जाने वाले फैट को संतुलित मात्रा में लिया जा सकता है। वहीं बहुत ज्यादा तला-भुना और ट्रांस फैट वाला भोजन सीमित करना बेहतर है।
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35 की उम्र के बाद थाली में करें ये बदलाव
- फोटो : AI
5. नमक और चीनी पर रखें नजर
35 के बाद रोजाना खाने में अतिरिक्त नमक और चीनी की मात्रा पर ध्यान देना जरूरी है। चाय-कॉफी में ज्यादा चीनी, मीठे पेय, मिठाइयां और पैकेज्ड स्नैक्स का बार-बार सेवन कम किया जा सकता है।
6. स्वाद के लिए मसालों का इस्तेमाल करें
हेल्दी डाइट का मतलब बेस्वाद खाना नहीं है। हल्दी, जीरा, धनिया, अदरक, लहसुन, काली मिर्च और विभिन्न हर्ब्स का इस्तेमाल करके खाने को स्वादिष्ट बनाया जा सकता है, जबकि तेल और नमक की मात्रा नियंत्रित रखी जा सकती है।
35 के बाद रोजाना खाने में अतिरिक्त नमक और चीनी की मात्रा पर ध्यान देना जरूरी है। चाय-कॉफी में ज्यादा चीनी, मीठे पेय, मिठाइयां और पैकेज्ड स्नैक्स का बार-बार सेवन कम किया जा सकता है।
6. स्वाद के लिए मसालों का इस्तेमाल करें
हेल्दी डाइट का मतलब बेस्वाद खाना नहीं है। हल्दी, जीरा, धनिया, अदरक, लहसुन, काली मिर्च और विभिन्न हर्ब्स का इस्तेमाल करके खाने को स्वादिष्ट बनाया जा सकता है, जबकि तेल और नमक की मात्रा नियंत्रित रखी जा सकती है।
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35 की उम्र के बाद थाली में करें ये बदलाव
- फोटो : AI
इस बात का भी रखें ध्यान
हर व्यक्ति की पोषण संबंधी जरूरत उम्र, लिंग, शारीरिक गतिविधि और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार अलग हो सकती है। किसी विशेष बीमारी या डाइट संबंधी समस्या में डॉक्टर या योग्य डाइटिशियन की सलाह लेना उचित है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
हर व्यक्ति की पोषण संबंधी जरूरत उम्र, लिंग, शारीरिक गतिविधि और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार अलग हो सकती है। किसी विशेष बीमारी या डाइट संबंधी समस्या में डॉक्टर या योग्य डाइटिशियन की सलाह लेना उचित है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
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