फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

सेहत को खतरा: बच्चों की ये आदत मोटापे का सबसे बड़ा कारण, सभी माता-पिता को डॉक्टर ने चेताया

Mon, 31 Aug 2026 08:21 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Mon, 31 Aug 2026 08:21 PM IST
सार

बच्चों में बढ़ता मोटापा सिर्फ ज्यादा खाने का नतीजा नहीं है। लंबे समय तक मोबाइल, टीवी और वीडियो गेम देखने से शारीरिक गतिविधि घट सकती है, स्क्रीन देखते हुए स्नैकिंग बढ़ जाती है और नींद प्रभावित हो सकती है।

विज्ञापन
Hidden Link Between Screen Time and Childhood Obesity baccho me motape ka karan
बच्चों में मोटापे का खतरा - फोटो : Amarujala.com/AI

मोटापे की स्थिति को स्वास्थ्य विशेषज्ञ दुनियाभर में तेजी से बढ़ती क्रॉनिक बीमारियों का प्रमुख कारण मानते हैं। मोटापा सिर्फ शरीर के लुक को ही खराब नहीं करता है बल्कि इसके कारण मेटाबॉलिज्म से लेकर हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और कैंसर तक का खतरा हो सकता है। अध्ययनों से पता चलता है कि मोटापा वैसे तो हर उम्र के व्यक्ति के लिए खतरनाक है, पर बच्चों में बढ़ती इस समस्या को लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञ सबसे ज्यादा चिंता जता रहे हैं।



मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि बच्चों में मोटापे की स्थिति उनमें कम उम्र में ही डायबिटीज, दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ाने वाली हो सकती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, वैसे तो गड़बड़ खानपान जैसे तैलीय चीजें और मीठा ज्यादा खाने को मोटापे का सबसे बड़ा कारण माना जाता है, पर बच्चों में बढ़ते स्क्रीन टाइम को सबसे ज्यादा समस्या वाला पाया गया है।

अगर आपका बच्चा भी दिनभर मोबाइल से चिपका रहता है तो सावधान हो जाइए, ये उसकी सेहत के लिए सबसे बड़ा खतरा हो सकता है।

Hidden Link Between Screen Time and Childhood Obesity baccho me motape ka karan
मोटापा का खतरा - फोटो : Adobe Stock

बच्चों में मोटापे की समस्या

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, अक्सर मोबाइल चलाते रहने की आदत बच्चे की नींद, खाने की आदत, शारीरिक गतिविधि और वजन सभी को प्रभावित कर सकती है। सबसे बड़ी चिंता लंबे समय तक स्क्रीन के सामने बैठे रहने की आदत को लेकर है। टीवी-मोबाइल या कंप्यूटर देखते समय बच्चों को लंबे समय तक एक ही जगह पर बैठे रहना पड़ता है। 
 

  • अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स की साल 2026 की नीति में भी बताया गया है कि डिजिटल स्ट्रीन के अधिक इस्तेमाल बच्चों में सेडेंटरी लाइफस्टाइल, ज्यादा कैलोरी वाली चीजें खाने को बढ़ा सकता है। ये सभी लंबे समय में सेहत पर कई तरह से नकारात्मक असर डाल सकती हैं।
Hidden Link Between Screen Time and Childhood Obesity baccho me motape ka karan
बढ़ता स्क्रीन टाइम खतरनाक - फोटो : Freepik.com

बच्चों का ज्यादा मोबाइल चलाना नुकसानदायक

अमर उजाला में प्रकाशित रिपोर्ट
में हमने बताया था कि विशेषज्ञ बच्चे को फोन देने को तो नुकसानदायक मानते ही हैं, साथ ही कुछ शोधकर्ताओं का कहना है कि बच्चों के सामने माता-पिता का फोन चलाना और खतरनाक हो सकता है।
 

  • स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, बच्चों में स्क्रीन टाइम बढ़ने का असर केवल आंखों या ध्यान तक सीमित नहीं रहता। लंबे समय तक टीवी, मोबाइल, टैबलेट या वीडियो गेम में व्यस्त रहने पर बच्चा एक जगह बैठा रहता है।
  • इससे वह खेलने या दूसरी शारीरिक गतिविधियों के लिए समय नहीं निकाल पाता। शारीरिक गतिविधि कम होने से मोटापे का खतरा और भी बढ़ जाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Hidden Link Between Screen Time and Childhood Obesity baccho me motape ka karan
खान-पान को लेकर बरतें सावधानी - फोटो : Freepik.com

स्क्रीन देखते हुए खाने की आदत नुकसानदायक

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, मोबाइल चलाते हुए कुछ खाते रहने की आदत सेहत के लिए बहुत नुकसानदायक है। इससे आप जाने-अनजाने अधिक कैलोरी लेने लगते हैं। इसके अलावा मोबाइल पर वीडियो चला देना कई परिवारों में बच्चे को खाना खिलाने का आसान तरीका बन गया है। लेकिन यह आदत खाने के व्यवहार को प्रभावित कर सकती है। 
 

  • अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स के अनुसार स्क्रीन देखते समय बच्चों में अनहेल्दी खाने और हाई कैलोरी इंटेक बढ़ सकता है। जो मोटापे के खतरे को बढ़ाने वाली स्थिति हो सकती है।
विज्ञापन
Hidden Link Between Screen Time and Childhood Obesity baccho me motape ka karan
रात में मोबाइल चलाने के नुकसान - फोटो : Freepik.com

रात में मोबाइल चलाने से नींद पर असर

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, रात के समय स्क्रीन का इस्तेमाल और भी नुकसानदायक हो सकता है। अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स के अनुसार डिजिटल स्क्रीन नींद की अवधि, नींद आने के समय और नींद की गुणवत्ता तीनों को प्रभावित कर सकती है। बच्चों में नींद की कमी और मोटापे के खतरे को और भी बढ़ाने वाली हो सकती है। 

बच्चे का वजन कंट्रोल करने के लिए केवल खाना कम करना  पर्याप्त नहीं है। स्क्रीन टाइम, सोने का समय और शारीरिक गतिविधि तीनों पर ध्यान देना जरूरी है।




--------------
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें  लाइफ़ स्टाइल से संबंधित समाचार (Lifestyle News in Hindi), लाइफ़स्टाइल जगत (Lifestyle section) की अन्य खबरें जैसे हेल्थ एंड फिटनेस न्यूज़ (Health  and fitness news), लाइव फैशन न्यूज़, (live fashion news) लेटेस्ट फूड न्यूज़ इन हिंदी, (latest food news) रिलेशनशिप न्यूज़ (relationship news in Hindi) और यात्रा (travel news in Hindi)  आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़ (Hindi News)।  

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed