पिछले दो साल से अधिक समय से वैश्विक स्तर पर जारी कोरोना संक्रमण के कारण लोगों को कई तरह की गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से परेशान होना पड़ा है। कोरोना के सामने आए कई वैरिएंट्स को सेहत के लिहाज से बेहद संक्रामक और घातक माना जा रहा है। साल 2019 के आखिरी महीनों में सबसे पहले चीन के वुहान शहर में नोवेल कोरोनावायरस संक्रमण की पहचान की गई थी। शोध में पता चला कि यह वायरस चमगादड़ों से इंसानों में फैला है।
विशेषज्ञों का दावा: सिर्फ कोरोनावायरस ही नहीं, चमगादड़ों से इन गंभीर बीमारियों का भी होता है खतरा, कई हो सकते हैं घातक
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जानवरों से इंसानों में संक्रमण
शोधकर्ता बताते हैं, कई प्रकार से जानवरों के माध्यम से इंसानों में संक्रमण होने का खतरा हो सकता है। वायरस या बैक्टीरिया से संक्रमित जानवरों के काटने या उनके घाव या रक्त के संपर्क में आने के कारण रोगजनक मनुष्यों तक पहुंच सकते हैं। इसके अलावा जानवरों के दूषित मांस को भी रोगजनकों के संचरण का एक माध्यम माना जाता रहा है। चमगादड़ों के माध्यम से कोरोना के पहले भी कई वायरस इंसानों को प्रभावित कर चुके हैं।
कोरोनावायरस की उत्पत्ति
शोध में पता चलता है कि चमगादड़, कई प्रकार के वायरस और बैक्टीरिया के लिए एक प्राकृतिक रूप से अनुकूल स्थान हो सकते हैं। कोरोना की उत्पत्ति को लेकर हुए कुछ अध्ययनों में दावा किया जाता रहा है कि चीन से इस संक्रमण के उभरने का कारण यह है कि इन जानवरों को इन स्थानों पर एक स्वादिष्ट व्यंजन माना जाता है और ये पारंपरिक चिकित्सा का एक स्रोत भी हैं। हालांकि इसे ही वास्तविक कारण के रूप में मानने के लिए पर्याप्त साक्ष्य उपलब्ध नहीं हैं।
इन संक्रमणों का भी कारण माने जाते रहे हैं चमगादड़
कोरोना वायरस से पहले भी इंसानों में होने वाले कई प्रकार के संक्रमण और बीमारियों के लिए चमगादड़ों को जिम्मेदार माना जाता रहा है। निपाह वायरस, हेंड्रा वायरस, इबोला वायरस और सार्स कोरोनावायरस भी चमगादड़ों से इंसानों में फैले थे। कीड़े, पिस्सू जैसे परजीवी भी संक्रामक रोगजनकों को चमगादड़ से मनुष्यों तक पहुंचा सकते हैं। अध्ययनकर्ताओं का मानना है कि जहां पर चमगादड़ अधिक पाए जाते हैं, उन स्थानों पर संक्रामक रोगों का जोखिम भी अधिक हो सकता है।
क्या कहते हैं अध्ययनकर्ता?
शोधकर्ता कहते हैं कि चमगादड़ों को कई संक्रामक एजेंटों जैसे बैक्टीरिया, वायरस, कवक और अन्य परजीवियों का भंडार कहना गलत नहीं होगा। अध्ययनों में पाया गया है कि अन्य जानवरों और पक्षियों के मुकाबले चमगादड़ों के जूनोटिक वायरस से संक्रमित होने की अधिक संभावना होती है। चमगादड़ से जुड़े प्राथमिक जूनोटिक रोग हिस्टोप्लाज्मोसिस, साल्मोनेलोसिस, यर्सिनीओसिस जैसे मामले देखे जाते रहे हैं।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।