कोरोना के ओमिक्रॉन BA.2 से भी 10 प्रतिशत अधिक संक्रामक माना जा रहा नया XE वैरिएंट भारत में भी दस्तक दे चुका है। पहले मुंबई और अब गुजरात के वडोदरा में इस वैरिएंट से संक्रमित व्यक्ति के बारे में पता चला है। हालांकि केंद्र सरकार और महाराष्ट्र के स्वास्थ्य विभाग ने मुंबई में मिले केस की अब तक पुष्टि नहीं की है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक वडोदरा में मिले संक्रमित का मामला पुराना माना जा रहा है, जिसकी जीनोम सीक्वेंसिंग टेस्ट रिजल्ट के बाद पुष्टि हुई है। इस टेस्ट में कुछ दिनों से लेकर हफ्तों तक का समय लग सकता है, ऐसे में आशंका है कि इस व्यक्ति के संपर्क में आए और भी लोगों में इसका संक्रमण हो सकता है।
XE variant: बढ़ रहे हैं कोरोना के नए वैरिएंट के केस, जानिए इसे कितने बड़े संकट के रूप में देख रहे हैं विशेषज्ञ?
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
XE वैरिएंट अत्यधिक संक्रामक
भारत सहित कई देशों में कोरोना के तेजी से बढ़ते इस खतरे को लेकर विश्व स्वास्थ्य संगठन ने अलर्ट किया था। डब्ल्यूएचओ ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि यूके सहित कुछ देशों में इस वैरिएंट के बढ़ने के मामले सामने आ रहे हैं। जिस तेजी से इसके फैलने की प्रकृति देखी गई है, यह चिंता बढ़ाने वाली है। कोरोना का XE एक 'हाइब्रिड वैरिएंट' है, यानि कि यह ओमिक्रॉन BA.1 और BA.2 के संयोजन से तैयार हुआ है। कोरोना के दो वैरिएंट्स का यह रीकॉम्बिनेंट बड़ी चुनौतियों का कारण बन सकता है।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
कोरोना के इस नए रूप को लेकर अध्ययनों में भले ही काफी डरावने दावे किए जा रहे हैं, पर विशेषज्ञ इसे बड़ा खतरा नहीं मानते हैं। वेल्लोर स्थित क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज में प्रोफेसर डॉ गगनदीप कांग ने एक रिपोर्ट में जिक्र करते हुए बताया कि कोरोना का नया एक्सई वैरिएंट ज्यादा चिंता का विषय नहीं है। ओमिक्रॉन और इसके अन्य सब-वैरिएंट्स की तुलना में इसके कारण अधिक गंभीरता पैदा होने की आशंका कम है। देश में भी इस वैरिएंट के मामले सामने आए हैं, इसका मुख्य कारण यातायात शुरू होने को माना जा सकता है।
गंभीर बीमारी का जोखिम कम
प्रोफेसर गगनदीप कहती हैं, हम सभी ओमिक्रॉन के BA.2 को लेकर चिंतित थे, हालांकि देखा गया है कि इसने ओमिक्रॉन के मूल वैरिएंट की तुलना में अधिक गंभीर बीमारी नहीं उत्पन्न की। अब कई देशों में नए कोरोना वैरिएंट XE के केस बढ़ते देखे जा रहे हैं, जो पहले के दो ओमिक्रॉन सब-वैरिेएंट्स का संयोजन है, संभावना है कि यह भी अधिक गंभीर बीमारी का कारण नहीं बनेगा। हालांकि इसका यह बिल्कुल मतलब नहीं है कि इसे हल्के में लिया जाए, क्योंकि इसकी प्रकृति को फिलहाल अच्छे से समझने के लिए अध्ययन जारी है।
प्रसार रोकने पर देना होगा ध्यान
XE वैरिएंट को लेकर एक अन्य मीडिया रिपोर्ट में यूके हेल्थ सिक्योरिटी एजेंसी के मुख्य चिकित्सा सलाहकार डॉ सुसान हॉपकिंस भी इसे ज्यादा खतरनाक नहीं मानते हैं। डॉ हॉपकिंस कहते हैं, किसी भी कोरोना वायरस वैरिएंट्स के साथ दूसरे वैरिएंट के संयोजन से कोई बड़ी चिंता जैसी चीज नहीं है। यह क्रिया वायरस को स्वत: ही अपेक्षाकृत जल्दी मार देती है। इसकी संक्रामता अधिक जरूर मानी जा रही है। अगर बचाव के उपायों का गंभीरता से ध्यान रखा जाए तो इसके प्रसार को नियंत्रित किया जा सकता है।
---------------
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।