क्या आपके बच्चे की आंखों और त्वचा का रंग पीला दिख रहा है? अगर हां, तो सावधान हो जाइए, त्वचा में ये छोटा सा बदलाव कई बार गंभीर समस्याओं का कारण बन सकता है।
सेहत की बात: क्या आपके बच्चे की त्वचा भी पड़ रही है पीली? ये कब खतरे का संकेत, यहां जानिए
नवजात बच्चों में पीलिया आम है और ज्यादातर मामलों में खुद ठीक हो जाता है। लेकिन जन्म के पहले 24 घंटे में पीलिया, तेजी से बढ़ता पीलापन, दूध न पीना, अत्यधिक सुस्ती या सांस की परेशानी खतरे के संकेत हो सकते हैं। बिलीरुबिन की जांच से स्थिति का पता लगाया जाता है।
नवजात बच्चों में पीलिया की दिक्कत
नवजात बच्चे की त्वचा या आंखों का सफेद हिस्सा पीला दिखाई दे तो माता-पिता घबरा जाते हैं। हालांकि डॉक्टर बताते हैं कि नवजात बच्चों में पीलिया काफी आम है और ज्यादातर मामलों में यह गंभीर बीमारी नहीं होती। जन्म के शुरुआती दिनों में बच्चे के शरीर में बिलीरुबिन नाम का पीला पदार्थ बढ़ने के कारण त्वचा और आंखों में पीलापन दिखाई दे सकता है।
- जन्म के बाद लाल रक्त कोशिकाओं में ब्रेकडाउन होता है और उनसे बिलीरुबिन बनता है।
- नवजात का लिवर शुरुआती दिनों में इसे पूरी तरह बाहर निकालने के लिए तैयार नहीं होता, इसलिए खून में बिलीरुबिन बढ़ने लगता है।
- आमतौर पर पीलिया की समस्या जन्म के दूसरे-तीसरे दिन ज्यादा दिखाई देती है और आमतौर पर कुछ दिनों में अपने आप या फिर हल्के-फुल्के उपचार से ठीक भी हो जाती है।
पीलिया कब खतरे का संकेत?
मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि जन्म के 24 घंटे के भीतर पीलिया के लक्षण दिखना समस्या का संकेत हो सकता है। अगर बच्चे की त्वचा पर पीलापन बढ़ता जा रहा हो, बच्चा ठीक से दूध नहीं पी रहा है, सामान्य से ज्यादा सुस्त हो जाए तो डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना चाहिए।
- बिलीरुबिन की अधिकता कई बार गंभीर स्थिति पैदा कर सकती है और दुर्लभ मामलों में इससे नवजात के दिमाग को नुकसान भी पहुंचा सकता है।
- इसलिए सिर्फ त्वचा देखकर यह तय नहीं करना चाहिए कि पीलिया हल्का है या गंभीर। बिलीरुबिन की सही जांच जरूरी है।
- जन्म के बाद आमतौर पर नवजात विशेषज्ञों की निगरानी में रहते हैं जहां उनकी सेहत पर डॉक्टरों की टीम लगातार निगरानी बनाए रहती है।
बच्चे को पीलिया है तो क्या करें?
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, नवजात को मां की दूध पिलाना जरूरी है। आमतौर पर नियमित फीडिंग, करीब 8 से 12 बार प्रतिदिन, बच्चे को पर्याप्त पोषण और तरल देने में मदद करती है। अगर पीलिया ज्यादा हो तो डॉक्टर बिलीरुबिन के स्तर और बच्चे की उम्र के हिसाब से इलाज तय करते हैं।
- जरूरत पड़ने पर फोटोथेरेपी की जाती है, जिसमें विशेष रोशनी की मदद से बिलीरुबिन को शरीर से बाहर निकालने में मदद मिलती है।
- गंभीर और दुर्लभ मामलों में अस्पताल में रक्त चढ़ाने की जरूरत भी पड़ सकती है।
- बच्चे को घर पर पीलिया हो जाए तो खुद से कोई इलाज या घरेलू उपाय न करें। ये बीमारी को और बिगाड़ सकती है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
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