कोरोना के नए वैरिएंट EG.5.1 के वैश्विक स्तर पर बढ़ते मामले विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा रहे हैं। दुनिया के कई देशों में कोरोना के इस नए वैरिएंट के कारण अचानक से रोगियों की संख्या में इजाफा देखा जा रहा है। प्रारंभिक शोध में पाया गया है कि नए वैरिएंट की संक्रामता दर अधिक हो सकती है जिसके कारण तेजी से संक्रमण बढ़ने का खतरा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभी लोगों को अलर्ट रहने की सलाह देते हैं।
Covid variant EG.5.1: संक्रामकता से लेकर गंभीरता तक, जानिए कोरोना के इस नए वैरिएंट के बारे में जरूरी बातें
भारत में कैसी है संक्रमण की स्थिति
मीडिया रिपोर्ट्स से पता चलता है कि भारत में संक्रमण की स्थिति काफी नियंत्रित है। सोमवार को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार, देश में 39 नए कोरोनावायरस संक्रमण के मामले दर्ज किए गए, इसके साथ सक्रिय मामलों की संख्या 1,472 हो गई है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं कि देश में नए वैरिएंट EG.5.1 की पुष्टि तो पहले हो चुकी है, लेकिन यहां इसके कारण हालात में कोई खास बदलाव नहीं है।
आइए इस नए वैरिएंट के बारे में कुछ जरूरी बातें जानते हैं।
वैरिएंट की प्रकृति और संक्रामकता
अध्ययनकर्ताओं ने पाया कि एरिस, ओमिक्रॉन का ही एक सब-वैरिएंट है, इसे XBB.1.9.2 का एक प्रकार माना जा रहा है, जिसके कारण साल की शुरुआत में कई देशों में संक्रमण के मामले बढ़ते हुए देखे गए थे।
एरिस को पिछले ओमिक्रॉन सब-वैरिएंट की तुलना में अधिक संक्रामक माना जाता है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि इसकी गंभीरता अधिक है या नहीं। प्रारंभिक रिपोर्ट्स से पता चलता है कि इसके कारण कुछ देशों में अस्पताल में मरीजों की संख्या बढ़ी है, पर उनमें से ज्यादातर लोग कोमोरबिडिटी के शिकार थे।
अतिरिक्त म्यूटेशन बढ़ा रही है चिंता
शोधकर्ताओं ने पाया कि कोरोना के इस नए वैरिएंट में दो अतिरिक्त म्यूटेशन देखे गए हैं जो इसकी संक्रामकता बढ़ाने वाले हो सकते हैं। इसके अलावा ओमिक्रॉन के पिछले वैरिएंट्स की ही तरह इसे आसानी से प्रतिरक्षा प्रणाली को चकमा देने वाला पाया गया है। जिसका मतलब है कि इस वैरिएंट से संक्रमण का खतरा उन लोगों में भी अधिक हो सकता है, जिनको वैक्सीन की दोनों डोज मिल चुकी है। हालांकि वैरिएंट की प्रकृति को समझने के लिए अभी अध्ययन जारी है।
क्या पहले से अलग हैं इसके लक्षण?
शोधकर्ताओं ने पाया कि एरिस के लक्षण, कोरोना के पहले के वैरिएंट्स के समान ही हैं। ज्यादातर लोगों को बुखार, खांसी, सांस लेने में तकलीफ, थकान, मांसपेशियों में दर्द, सिरदर्द और गले में खराश की दिक्कत हो रही है। इस वैरिएंट से संक्रमण की स्थिति में स्वाद या गंध जाने, फेफड़े-हृदय स्वास्थ्य से संबंधित समस्या या फिर किसी अन्य गंभीर स्थिति का खतरा फिलहाल नहीं देखा जा रहा है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, नए वैरिएंट्स से गंभीर रोग का जोखिम सिर्फ उन्हीं लोगों में हो सकता है जो या तो कमजोर इम्युनिटी या फिर कोमोरबिडिटी के शिकार रहे हैं।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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