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Covid variant EG.5.1: संक्रामकता से लेकर गंभीरता तक, जानिए कोरोना के इस नए वैरिएंट के बारे में जरूरी बातें

Tue, 15 Aug 2023 11:30 AM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Tue, 15 Aug 2023 11:30 AM IST
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New Covid variant EG.5.1 Eris symptoms and transmission in hindi all you need to know about this
कोरोना के नए वैरिएंट्स के बढ़ रहे हैं केस - फोटो : iStock

कोरोना के नए वैरिएंट EG.5.1 के वैश्विक स्तर पर बढ़ते मामले विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा रहे हैं। दुनिया के कई देशों में कोरोना के इस नए वैरिएंट के कारण अचानक से रोगियों की संख्या में इजाफा देखा जा रहा है। प्रारंभिक शोध में पाया गया है कि नए वैरिएंट की संक्रामता दर अधिक हो सकती है जिसके कारण तेजी से संक्रमण बढ़ने का खतरा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभी लोगों को अलर्ट रहने की सलाह देते हैं।



ओमिक्रॉन के इस वैरिएंट की प्रकृति को देखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इसे 'वैरिएंट ऑफ इंटरेस्ट' के रूप में वर्गीकृत किया है। संगठन ने सभी देशों से मामलों की निगरानी करने और कोविड एप्रोप्रिएट बिहेवियर का पालन करते रहने की सलाह दी है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि शोध में जिस प्रकार की इस वैरिएंट की प्रकृति देखी गई है, उससे ज्यादा चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है क्योंकि ज्यादातर लोगों में संक्रमण के हल्के लक्षण ही देखे जा रहे हैं, अस्पताल में भर्ती होने या फिर गंभीर रोग विकसित होने का जोखिम कम ही है। 

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कोरोना संक्रमण का जोखिम - फोटो : iStock

भारत में कैसी है संक्रमण की स्थिति

मीडिया रिपोर्ट्स से पता चलता है कि भारत में संक्रमण की स्थिति काफी नियंत्रित है। सोमवार को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार, देश में 39 नए कोरोनावायरस संक्रमण के मामले दर्ज किए गए, इसके साथ सक्रिय मामलों की संख्या 1,472 हो गई है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं कि देश में  नए वैरिएंट EG.5.1 की पुष्टि तो पहले हो चुकी है, लेकिन यहां इसके कारण हालात में कोई खास बदलाव नहीं है। 

आइए इस नए वैरिएंट के बारे में कुछ जरूरी बातें जानते हैं।

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कोरोना की प्रकृति के बारे में जानिए - फोटो : Pixabay

वैरिएंट की प्रकृति और संक्रामकता 

अध्ययनकर्ताओं ने पाया कि एरिस, ओमिक्रॉन का ही एक सब-वैरिएंट है, इसे XBB.1.9.2 का एक प्रकार माना जा रहा है, जिसके कारण साल की शुरुआत में कई देशों में संक्रमण के मामले बढ़ते हुए देखे गए थे। 

एरिस को पिछले ओमिक्रॉन सब-वैरिएंट की तुलना में अधिक संक्रामक माना जाता है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि इसकी गंभीरता अधिक है या नहीं। प्रारंभिक रिपोर्ट्स से पता चलता है कि इसके कारण कुछ देशों में अस्पताल में मरीजों की संख्या बढ़ी है, पर उनमें से ज्यादातर लोग कोमोरबिडिटी के शिकार थे।

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नए वैरिएंट्स में म्यूटेशनों के बारे में जानिए - फोटो : Pixabay

अतिरिक्त म्यूटेशन बढ़ा रही है चिंता

शोधकर्ताओं ने पाया कि कोरोना के इस नए वैरिएंट में दो अतिरिक्त म्यूटेशन देखे गए हैं जो इसकी संक्रामकता बढ़ाने वाले हो सकते हैं। इसके अलावा ओमिक्रॉन के पिछले वैरिएंट्स की ही तरह इसे आसानी से प्रतिरक्षा प्रणाली को चकमा देने वाला पाया गया है। जिसका मतलब है कि इस वैरिएंट से संक्रमण का खतरा उन लोगों में भी अधिक हो सकता है, जिनको वैक्सीन की दोनों डोज मिल चुकी है। हालांकि वैरिएंट की प्रकृति को समझने के लिए अभी अध्ययन जारी है। 

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ओमिक्रॉन वैरिएंट के कारण होने वाली समस्याएं - फोटो : PTi

क्या पहले से अलग हैं इसके लक्षण?

शोधकर्ताओं ने पाया कि एरिस के लक्षण, कोरोना के पहले के वैरिएंट्स के समान ही हैं। ज्यादातर लोगों को बुखार, खांसी, सांस लेने में तकलीफ, थकान, मांसपेशियों में दर्द, सिरदर्द और गले में खराश की दिक्कत हो रही है। इस वैरिएंट से संक्रमण की स्थिति में स्वाद या गंध जाने, फेफड़े-हृदय स्वास्थ्य से संबंधित समस्या या फिर किसी अन्य गंभीर स्थिति का खतरा फिलहाल नहीं देखा जा रहा है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, नए वैरिएंट्स से गंभीर रोग का जोखिम सिर्फ उन्हीं लोगों में हो सकता है जो या तो कमजोर इम्युनिटी या फिर कोमोरबिडिटी के शिकार रहे हैं।


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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