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Covid-19: नए वैरिएंट के कारण वैश्विक स्तर पर संक्रमण में 80% तक बढ़ोतरी, एक और लहर की आशंका?

Sun, 13 Aug 2023 11:53 AM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Sun, 13 Aug 2023 11:53 AM IST
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80 per cent increase in worldwide covid cases, New Covid variant ERIS risk factors and complications
दुनियाभर में कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामले - फोटो : iStock

कोरोना के नए वैरिएंट 'एरिस' के कारण वैश्विक स्तर पर संक्रमण के मामलों में उछाल देखा जा रहा है। यूके, भारत सहित कई देशों में कोरोना के वैरिएंट EG.5.1 के मामले रिपोर्ट किए गए हैं। कोरोना को लेकर जारी साप्ताहिक रिपोर्ट में, संयुक्त राष्ट्र एजेंसी ने बताया कि दुनियाभर में 10 जुलाई से 6 अगस्त तक कोरोना के लगभग 15 लाख नए मामले दर्ज किए, जो पिछले 28 दिनों की तुलना में 80 प्रतिशत की वृद्धि है।



ओमिक्रॉन का ही सब-वैरिएंट माने जाने वाले इस नए वैरिएंट की संक्रामकता दर अधिक देखी जा रही है, जिसके कारण वैश्विक स्तर पर संक्रमण के मामले बढ़ने की आशंका है। 

संयुक्त राष्ट्र एजेंसी की साप्ताहिक अपडेट में बताया गया है कि संक्रमण के मामले तो बढ़े हैं पर मौत के मामलों कमी आई है। मौतों की संख्या 57 प्रतिशत गिरकर 2,500 रह गई है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने चेतावनी दी है यह आंकड़े अधिक हो सकते हैं, क्योंकि महामारी के पहले चरण की तुलना में बहुत कम परीक्षण किए जा रहे हैं। 

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भारत में कोरोना संक्रमण के मामले - फोटो : iStock

भारत में कैसी है संक्रमण की स्थिति

वैश्विक स्तर पर संक्रमण के बढ़ते मामले चिंता बढ़ा रहे हैं, हालांकि भारत के नजरिए से बात करें तो यहां स्थिति काफी नियंत्रित लग रही है। भारत में मई के महीने में कोरोना के इस नए वैरिएंट के मामले पहली बार रिपोर्ट किए गए थे, हालांकि इसके बाद संक्रमण या फिर अस्पताल में भर्ती होने की संख्या में कोई खास बदलाव नहीं देखा गया है।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने कहा, देश में संक्रमण के मामलों को लेकर चिंता करने की जरूरत नहीं है। संक्रमण की स्थिति की निगरानी की जा रही है, जीनोम सीक्वेंसिंग के जरिए नए वैरिएंट पर नजर रखा जा रहा है। 

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कोरोना के कारण बिगड़ते हालात - फोटो : PTI

कई देशों में बिगड़े हालात

संक्रमण के ज्यादातर नए मामले वेस्टर्न पेस्फिक रीजन क्षेत्र से रिपोर्ट किए जा रहे यहां संक्रमण में 137 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई। संयुक्त राज्य अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम, फ्रांस और जापान जैसे कई देशों में हाल के हफ्तों में मामलों में वृद्धि देखी गई है। डब्ल्यूएचओ के आंकड़ों के मुताबिक इस अवधि में सबसे ज्यादा नए मामले कोरिया, ब्राजील, ऑस्ट्रेलिया, सिंगापुर और इटली से सामने आए हैं, वहीं ब्राजील, कोरिया, रूस, पेरू और ऑस्ट्रेलिया में सबसे ज्यादा मौतें हुईं।

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कोरोना वायरस की प्रकृति - फोटो : Pixabay

नए वैरिएंट की प्रकृति 

पुणे स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ इनफेक्शियस डिजीज के निदेशक डॉ. संजय पुजारी बताते हैं, सार्स-सीओवी-2 का एरिस यानी EG.5.1, ओमिक्रॉन वेरिएंट XBB.1.9.2 का ही एक उप प्रकार है। इसके मूल स्ट्रेन की तुलना में इसमें दो अतिरिक्त स्पाइक म्यूटेशन (Q52H, F456L) हैं। इन म्यूटेशनों के कारण वैरिएंट की संक्रामकता दर अधिक देखी जा रही है।

कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि पहले के ओमिक्रॉन वैरिएंट्स की तुलना में इस नए वैरिएंट की इम्युनिटी स्केपिंग क्षमता अधिक हो सकती है, ऐसे में जिन लोगों के शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता अधिक है उनमें भी संक्रमण का जोखिम अधिक हो सकता है।

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कोरोना के कारण बिगड़ सकते हैं हालात - फोटो : iStock

प्रतिरक्षा को आसानी से चकमा देने वाला वैरिएंट

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कोरोना के इस नए वैरिएंट के कारण संक्रमितों में गंभीर लक्षण नहीं देखे जा रहे हैं। ज्यादातर लोग तेज बुखार, सामान्य सर्दी, शरीर दर्द और सिरदर्द की समस्या का ही अनुभव कर रहे हैं, रोगियों में गंभीर रोग या फिर अस्पताल में भर्ती होने के मामले अधिक नहीं देखे जा रहे हैं। हालांकि जिस तरह से इस वैरिएंट की प्रतिरक्षा को चकमा देने की क्षमता देखी जा रही है, इससे भविष्य में संक्रमण के मामलों के बढ़ने की आशंका अधिक हो सकती है।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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