स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने 2019-20 में किए गए राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस) की पांचवीं रिपोर्ट का पहला हिस्सा शनिवार को जारी किया। हालांकि यह सर्वेक्षण लगभग तीन वर्षों के अंतराल के बाद आयोजित किया गया है। इस रिपोर्ट के पहले हिस्से में देश के सिर्फ 22 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को ही शामिल किया गया है, जो देश की आबादी का लगभग आधा हिस्सा हैं। इसमें महाराष्ट्र, बिहार और पश्चिम बंगाल जैसे बड़े राज्य शामिल हैं, लेकिन इसमें देश का सबसे अधिक आबादी वाला राज्य उत्तर प्रदेश शामिल नहीं है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण की इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि देश के बच्चों में कुपोषण और मोटापा बढ़ा है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Pixabay
चूंकि इससे पहले 2015-16 में जारी की गई राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस) की चौथी रिपोर्ट में यह दावा किया गया था कि देश में बच्चों में कुपोषण कम हुआ है जबकि अब जारी की गई पांचवीं रिपोर्ट में इसके बढ़ने की बात कही गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, अपनी उम्र में सामान्य लंबाई से कम बच्चों की हिस्सेदारी 13 राज्यों में बढ़ी है जबकि अपनी लंबाई के हिसाब से कम वजन वाले बच्चों की हिस्सेदारी 12 राज्यों में बढ़ी है।
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पहले स्थान पर है बिहार
सर्वेक्षण की रिपोर्ट में बच्चों में कुपोषण और मोटापे के हिसाब से बिहार पहले स्थान पर है। अपनी आयु के हिसाब से कम ऊंचाई वाले बच्चों की हिस्सेदारी 2015-16 में 48.3 फीसदी थी जो अब 42.9 फीसदी हो गई है। वहीं गुजरात इस मामले में दूसरे स्थान जबकि कर्नाटक तीसरे स्थान पर है। गुजरात में यह हिस्सेदारी 39.0 फीसदी जबकि कर्नाटक में यह 35.4 फीसदी है।
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कम वजन वाले बच्चों के मामले में महाराष्ट्र पहले स्थान पर है। अपनी ऊंचाई के हिसाब से कम वजन वाले बच्चों की हिस्सेदारी जहां 2005-06 में 16.5 फीसदी थी, वहीं 2015-16 में 25.6 फीसदी हो गई जबकि अब 2019-20 में भी यह 25.6 फीसदी ही है। इस मामले में गुजरात दूसरे स्थान पर जबकि बिहार तीसरे स्थान पर है। गुजरात में यह हिस्सेदारी 25.1 फीसदी जबकि बिहार में यह 22.9 फीसदी है।
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रिपोर्ट के मुताबिक, कम वजन और अधिक वजन वाले बच्चों की हिस्सेदारी में भी बढ़ोतरी हुई है। जहां 16 राज्यों में कम वजन वाले बच्चों की संख्या बढ़ी है, तो वहीं 20 राज्यों में अधिक वजन वाले बच्चों की संख्या में इजाफा हुआ है। रिपोर्ट में यह यह भी कहा गया है कि देश में मोटापे और खून की कमी से जूझ रहे लोगों की संख्या में भी बढ़ोतरी हुई है।