दुनियाभर में कोरोना के ओमिक्रॉन वैरिएंट के संक्रमण के मामले तेजी से बढ़ते जा रहे हैं। ब्रिटेन जैसे देशों में कोरोना के कारण हालात दिन-ब-दिन खराब होते जा रहे हैं। भारत में भी अब तक इस वैरिएंट से संक्रमित 200 से अधिक लोगों की पहचान की जा चुकी है। अध्ययनों में बताया जा रहा है कि ओमिक्रॉन वैरिएंट में देखे गए म्यूटेशन इसे वैक्सीन से बनी प्रतिरक्षा को चकमा देने की क्षमता देते हैं। ऐसे में लोगों के मन में एक सवाल लगातार बना हुआ है कि क्या वैक्सीन की दो डोज ओमिक्रॉन से सुरक्षा देने में काफी हैं? क्या ओमिक्रॉन से बचाव के लिए नेजल वैक्सीन को असरदार माना जा सकता है?
अध्ययन: ओमिक्रॉन वैरिएंट पर इस तरह की वैक्सीन हो सकती है ज्यादा असरदार, रोक सकती है वायरस का प्रवेश
कारगर साबित हो सकती है नेजल वैक्सीन
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक सार्स-सीओवी-2 जैसे कई वायरस सामान्यतौर पर म्यूकोसा के माध्यम से शरीर में प्रवेश करते हैं। यह नाक में मौजूद एक ऊतक है। वायरस म्यूकोसल झिल्ली में मौजूद कोशिकाओं और अणुओं को संक्रमित करते हैं। ऐसे में नेजल शॉट के माध्यम से वायरस को शरीर में प्रवेश करने से पहले ही खत्म किया जा सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक इंट्रानेजल वैक्सीन शॉट इम्युनोग्लोबुलिन ए (IgA) का उत्पादन करते हैं, जो वायरस के प्रवेश की साइट यानी नाक में ही मजबूत प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया उत्पन्न करके वायरस को बढ़ने से रोक सकते हैं।
वायरस को बढ़ने से रोक सकती है नेजल वैक्सीन
वैज्ञानिकों का मानना है कि इम्युनोग्लोबुलिन ए (IgA), संक्रमण के प्रारंभिक चरण में ही वायरस के प्रबंधन और उसे नष्ट करने में अधिक प्रभावी हो सकता है। यह न केवल संक्रमण से लड़ने में सहायता करता है साथ ही संचरण को भी रोकता है। नाक के माध्यम से दिए जाने वाले टीके एक मजबूत और प्रभावी म्यूकोसल प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया उत्पन्न करते हैं। यह फेफड़ों को नुकसान पहुंचाने से बचाने में भी सहायक माना जाता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक इंजेक्शन या इंट्रामस्क्युलर टीकों को इंजेक्शन (सुइयों) की मदद से त्वचा में इंजेक्ट किया जाता है। जबकि पारंपरिक टीकों के विपरीत नेजल वैक्सीन म्यूकोसल झिल्ली में मौजूद वायरस को लक्षित करते हैं और यह नाक के माध्यम से दिए जाते हैं।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
अध्ययनों से पता चलता है कि नाक के टीके श्वसन वायरस के खिलाफ प्रभावी साबित हुए हैं। माना जा रहा है कि यह ओमिक्रॉन जैसे वेरिएंट्स को भी अप्रभावी करने की क्षमता रखते हैं।
चूहों पर नेजल वैक्सीन के असर को जानने के लिए एक अध्ययन किया गया। साइंस इम्यूनोलॉजी जर्नल में प्रकाशित इस अध्ययन में पाया गया कि नेजल वैक्सीन चूहों में श्वसन वायरस के खिलाफ काफी असरदार साबित हुए।
येल विश्वविद्यालय में इम्यूनोबायोलॉजी के प्रोफेसर अकीको इवासाकी का मानना है कि नाक के द्वारा दिए जाने वाले वैक्सीन ज्यादा प्रभावी हो सकते हैं। यह वायरस के शरीर में प्रवेश को ही रोक सकते हैं। संभव है कि कोरोना के नए वैरिएंट्स पर भी यह असरदार साबित हों, हालांकि इसके लिए अभी अध्ययन के प्रमाण की आवश्यकता है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से प्राप्त जानकारियों आधार पर तैयार किया गया है।
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