भारत सहित दुनिया के तमाम देशों में कोरोना के ओमिक्रॉन वैरिएंट का संक्रमण तेजी से बढ़ता जा रहा है। भारत में अब तक 14 राज्यों में संक्रमण फैल चुका है, वहीं 200 से ज्यादा लोगों में अब तक इसकी पहचान की जा चुकी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, कोरोना का यह वैरिएंट अब तक 77 देशों में रिपोर्ट किया जा चुका है और कोरोना के अन्य स्ट्रेनों की तुलना में यह काफी तेजी से फैल रहा है। इससे बचाव के लिए लोगों को लगातार प्रयास करते रहने की आवश्यकता है।
Omicron Variant: शरीर में दिखें ये लक्षण तो समझे आप हो गए हैं संक्रमित, वैज्ञानिकों ने चेताया
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रोगियों को हो रही है गले में खरोंच जैसी समस्या
डॉ रोच ने एक विज्ञप्ति में बताया कि ओमिक्रॉन संक्रमण के सबसे आम प्रारंभिक संकेत में रोगियों में स्क्रेची थ्रोट यानी कि गले में खरोंच जैसी स्थिति के बारे में पता चलता है। इसके साथ कुछ लोगों को बंद नाक और सूखी खांसी की समस्या भी हो सकती है। इनमें से अधिकतर लक्षण हल्के होते हैं, लेकिन उन्होंने जोर देकर कहा कि इसका मतलब यह नहीं है कि ओमिक्रॉन कम खतरनाक है। डॉ रोच कहते हैं, डेल्टा से संक्रमण के दौरान जहां लोगों को गले में खराश की समस्या हो रही थी, वहीं इस बार संक्रमितों को गले में खरोंच के साथ तेज दर्द का अनुभव हो रहा है, इन लक्षणों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।
ओमिक्रॉन के इन लक्षणों के बारे में भी जानिए
इससे पहले एक रिपोर्ट में दक्षिण अफ्रीका में कोरोना संक्रमितों का इलाज कर रही डॉक्टर एंजेलिक कोएत्ज़ी ने बताया था कि ओमिक्रॉन के ज्यादातर संक्रमितों को रात में बहुत अधिक पसीना आने की समस्या हो रही है। इसके अलावा डेल्टा संक्रमण की तरह इसमें भी रोगियों को गंभीर थकान और कमजोरी की समस्या देखने को मिल रही है। डॉक्टर एंजेलिक कहती हैं, दुनियाभर में कोरोना संक्रमितों का इलाज कर रहे डॉक्टरों को इन लक्षणों पर विशेष ध्यान रखने की आवश्यकता है।
पहले से भिन्न हैं कोरोना के लक्षण
ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में मेडिसिन के प्रोफेसर सर जॉन वेल ने एक रेडियो चैनल से बातचीत में बताया कि ओमिक्रॉन वैरिएंट से संक्रमित लोगों में जो लक्षण देखने को मिले हैं, वे पिछले वेरिएंट से कुछ भिन्न होते हैं। संक्रमितों में बंद नाक, गले में खराश, मायलगिया और लूज मोशन जैसे लक्षण भी देखे जा रहे हैं, जिनपर लोगों को विशेष ध्यान रखने की आवश्यकता है।
काफी संक्रामक है कोरोना का यह नया वैरिएंट
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक ओमिक्रॉन संक्रमितों में ज्यादातर लक्षण माइल्ड देखे जा रहे हैं, इसके गंभीर मामले फिलहाल नहीं देखे गए हैं, हालांकि ओमिक्रॉन को हल्के में लेने की गलती नहीं करनी चाहिए। यह वैरिएंट काफी अधिक संक्रामक है, ऐसे में इससे बचाव के उपाय करते रहना बहुत आवश्यक है। कुछ रिपोर्टस में दावा किया जा रहा है कि ओमिक्रॉन वैरिएंट, डेल्टा और मूल सार्स-सीओवी-2 वायरस की तुलना में लगभग 70 गुना अधिक तेजी से संक्रमण फैला सकता है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से प्राप्त जानकारियों आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।