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जरूरी खबर: 20 साल में पहली बार अमेरिका में फिर बढ़े इस रोग के मामले, भारतीय लोगों को भी अलर्ट रहने की सलाह

Fri, 30 Jun 2023 06:21 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Fri, 30 Jun 2023 06:21 PM IST
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Malaria detected US states for first time in 20 years, know risk factor and prevention of malaria
यूएस में मलेरिया के मामले - फोटो : iStock

दक्षिणी अमेरिका के कुछ स्टेट्स में इन दिनों मलेरिया के बढ़ते मामलों के लेकर लोगों को अलर्ट किया गया है। सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) की रिपोर्ट के मुताबिक पिछले दो महीनों में, संयुक्त राज्य अमेरिका में कम से कम पांच लोग (फ्लोरिडा में चार और टेक्सास में एक) मलेरिया से संक्रमित हुए हैं। 2003 के बाद से देश में स्थानीय रूप से रिपोर्ट किए गए मलेरिया के ये पहले ज्ञात मामले हैं। मलेरिया को अमेरिका में एंडेमिक मान लिया गया था, हालांकि एक बार फिर से इन मामलों की पुष्टि ने स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है। 



मेडिकल रिपोर्ट्स के मुताबिक मलेरिया के नए मामले प्लास्मोडियम विवैक्स पैरासाइट के कारण हुए, जो अन्य प्रजातियों की तुलना में गंभीर बीमारी का कारण नहीं बनती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने सभी लोगों को अलर्ट किया है और विशेष सावधानी बरतते रहने की सलाह दी है।

Malaria detected US states for first time in 20 years, know risk factor and prevention of malaria
मलेरिया का खतरा - फोटो : Pixabay

पांच मामलों को लेकर ही क्यों अफरा-तफरी?

अब सवाल यह है कि भारत में मलेरिया के मामले इतने सामान्य हैं तो आखिर अमेरिका में पांच मामले सामने आने के बाद इतनी चिंता क्यों? इसका प्रमुख कारण यह है कि संयुक्त राज्य अमेरिका ने दो दशकों पहले मलेरिया का उन्मूलन कर दिया था। सी.डी.सी. के अनुसार, कोविड-19 महामारी से पहले, संयुक्त राज्य अमेरिका में हर साल मलेरिया के लगभग 2,000 मामले सामने आते थे, जिनमें से लगभग सभी लोग विदेश में इस बीमारी से संक्रमित हुए थे।

हालांकि इस बार ये पांचों मामले स्थानीय तौर पर फैले हैं और रोगियों की कोई ट्रैवेल हिस्ट्री भी नहीं रही है।

Malaria detected US states for first time in 20 years, know risk factor and prevention of malaria
मच्छरों के कारण होती है मलेरिया - फोटो : iStock

भारत में मानसून में बढ़ जाते हैं मच्छर जनित रोग

वहीं भारत की बात करें तो यहां मलेरिया के मामले अधिक सामान्य हैं। साल 2022 में भारत में 45 हजार से अधिक मलेरिया के मामले रिपोर्ट किए गए थे, जबकि 2021 में करीब 1.6 लोगों में इस रोग की पुष्टि हुई थी। मलेरिया मुख्यरूप से परजीवी से होने वाली बीमारी है। यह परजीवी संक्रमित मच्छरों के काटने से मनुष्यों में फैलता है। जिन लोगों को मलेरिया होता है उन्हें आमतौर पर तेज बुखार और कंपकंपी वाली ठंड महसूस होती है।

मलेरिया के परिजीवी गर्म, उमस भरी और गीली जलवायु में ज्यादा बढ़ते हैं, यही कारण है कि भारत में मानसून के मौसम में इसका जोखिम अधिक देखा जाता रहा है।

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Malaria detected US states for first time in 20 years, know risk factor and prevention of malaria
मच्छरों के कारण होने वाली बीमारियां - फोटो : istock

मलेरिया के लक्षण और जोखिम

मलेरिया रोग की स्थिति में बुखार के साथ ठंड लगने, बेचैनी-सिरदर्द, उल्टी और दस्त के साथ पेट में दर्द, मांसपेशियों या जोड़ों में दर्द, थकान की समस्या होती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं,  चूंकि भारत में अब मानसून का सीजन शुरू हो गया है और बरसात के मौसम में मलेरिया का प्रकोप अधिक होता है। जल भराव और नमी वाले स्थान, मच्छरों के लिए उपयुक्त प्रजनन वातावरण प्रदान करते हैं। इसलिए सभी लोगों को मच्छरों से बचाव के उपाय करते रहने की आवश्यकता है।

बचाव के उपाय आपको अन्य मच्छर जनित अन्य रोगों जैसे डेंगू-चिकनगुनिया से सुरक्षित रखने में भी मदद करेंगे।

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मच्छरों के काटने से करें बचाव - फोटो : Istock

क्या है विशेषज्ञों की सलाह?

सीडीसी विशेषज्ञ कहते हैं, मच्छरों से बचाव के उपाय करते रहना बहुत आवश्यक है। इसके लिए जलजमाव न होने दें, मच्छर वाले स्थानों पर दवा का छिड़काव करें। लंबी और पूरी आस्तीन के कपड़े पहनें जिससे शरीर ढका रहे। मच्छरों को भगाने के लिए क्वाइल्स का प्रयोग कम करें, इससे नुकसान हो सकते हैं। रात में सोते समय मच्छरदानी लगाने को अधिक सुरक्षित उपाय माना जाता है।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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