Why do Babies Cry During Gas: छोटे बच्चों, खासकर नवजात शिशुओं में पेट में गैस और मरोड़ की समस्या बहुत आम है, जिसे लेकर अक्सर माता-पिता काफी परेशान हो जाते हैं। इसी विषय पर डॉक्टर माधवी भारद्वाज ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर किया है, जिसमें उन्होंने बताया है कि 15-20 दिन के बच्चों के पेट में जब गैस 'मूव' करती है, तो यह उनके लिए एक बिल्कुल नया अनुभव होता है।
Health tips: गैस से फूला रहता है बच्चे का पेट? पीडियाट्रिशियन से जानें इसका सही इलाज
Newborn Baby Gas Relief Tips: छोटे बच्चे जब असहज होते हैं तो अक्सर माता पिता बहुत टेंशन में आ जाते हैं। कई बार उनके शरीर में ऐंठन या मरोड़ के पीछे का कारण पेट में गैस बनना होता है। इसी विषय पर आइए इस लेख में बच्चों की डॉक्टर से विस्तार से जानते हैं।
कोलिक और बच्चे की प्रतिक्रिया को समझें
- डॉक्टर माधवी के अनुसार माता-पिता को यह समझना चाहिए कि कोलिक बच्चे के लिए सिर्फ एक नई शारीरिक संवेदना है।
- जब बच्चा 15 से 20 दिन का होता है, तो उसका शरीर पाचन की प्रक्रियाओं के प्रति जागरूक होने लगता है।
- गैस पास करते समय या शरीर को ऐंठते समय बच्चा डिस्कंफर्ट में जरूर होता है, लेकिन यह समय के साथ अपने आप ठीक होने वाली प्रक्रिया होती है।
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- अगर बच्चा गैस के कारण बहुत अधिक रो रहा है, तो आप उसकी नाभि के आस-पास हल्के हाथ से मसाज कर सकते हैं।
- इसके अलावा, बच्चे को पीठ के बल लिटाकर उसके पैरों से 'साइकिलिंग' जैसी एक्सरसाइज करवाना काफी फायदेमंद होता है।
- ये छोटे घरेलू उपाय पेट में फंसी गैस को बाहर निकालने में मदद करते हैं और बच्चे को तुरंत राहत देते हैं।
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- हालांकि कोलिक एक सामान्य प्रक्रिया है, लेकिन अगर इन घरेलू उपायों के बाद भी बच्चा लगातार असहज और बेचैन रहे, तो लापरवाही न करें।
- डॉक्टर सलाह देते हैं कि यदि बच्चा दूध पीना छोड़ दे या रोना बंद न करे, तो तुरंत नजदीकी बाल रोग विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए।
- बिना डॉक्टरी सलाह के बच्चे को बार-बार दवाइयां देना सही नहीं है, क्योंकि उसका शरीर अभी विकसित हो रहा है।
धैर्य और सही देखभाल है जरूरी
डॉक्टर माधवी के मुताबिक छोटे बच्चों की गैस की समस्या में दवाइयों से ज्यादा माता-पिता के धैर्य की आवश्यकता होती है। डॉक्टर के बताए इन आसान नुस्खों हल्की मसाज और पैरों की एक्सरसाइज से आप बच्चे के दर्द को कम कर सकते हैं। ध्यान रखें कि ऐसा सिर्फ 3 महीने तक रहता है। जैसे-जैसे बच्चा बड़ा होता है, उसका पाचन तंत्र मजबूत हो जाता है और वह इन शारीरिक बदलावों को स्वीकार करना सीख जाता है, जिससे समस्या खुद-ब-खुद खत्म होने लगती है।
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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