Sleep Deprivation Effects On Brain: नींद हमारे अच्छे शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए अनिवार्य प्रक्रिया है। अक्सर हम काम के दबाव या डिजिटल व्यस्तता के कारण अपनी नींद से समझौता कर लेते हैं, लेकिन विज्ञान कहता है कि अधूरी नींद हार्ट से जुड़ी बीमारी, डायबिटीज, मानसिक तनाव और कमजोर याददाश्त का कारण बन सकती है।
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Health Tips: उम्र के हिसाब से रोज कितनी देर की नींद लेनी चाहिए, जानें क्या कहती है स्टडी
Sat, 14 Mar 2026 08:26 PM IST
Shikhar Baranawal
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Shikhar Baranawal
Updated Sat, 14 Mar 2026 08:26 PM IST
सार
Sleep Hygiene For Better Rest: अच्छी नींद लेना हम सभी के जीवन का एक बुनियादी जरूरत है। अक्सर लोग काम के चक्कर में या मोबाइल स्क्रॉल करने के लिए अपनी नींद से समझौता कर लेते हैं। आइए इस लेख में जानते हैं कि उम्र के हिसाब से लोगों को कितनी देर सोना चाहिए।
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नींद की समस्या
- फोटो : Freepik.com
नींद की समस्या
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बच्चों और किशोरों के लिए नींद का महत्व
- बढ़ते बच्चों के लिए नींद किसी औषधि से कम नहीं है क्योंकि इसी दौरान शरीर में 'ग्रोथ हार्मोन' सबसे अधिक सक्रिय होते हैं।
- 6-13 वर्ष के बच्चों को कम से कम 9-11 घंटे और किशोरों (14-17 वर्ष) को 8-10 घंटे की नींद लेनी चाहिए।
- पर्याप्त नींद न लेने वाले बच्चों में एकाग्रता की कमी, चिड़चिड़ापन और सीखने की क्षमता में गिरावट देखने को मिलती है, जो उनके संपूर्ण विकास को प्रभावित करती है।
नींद
- फोटो : Freepik.com
वयस्कों और बुजुर्गों के लिए क्या है मानक?
- 18 से 64 वर्ष के वयस्कों के लिए 7 से 9 घंटे की नींद 'गोल्डन स्टैंडर्ड' मानी जाती है, जो मानसिक स्पष्टता के लिए जरूरी है।
- 65 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्गों के लिए स्लीप साइकिल थोड़ा छोटा हो जाता है, उन्हें औसतन 7-8 घंटे की नींद की आवश्यकता होती है।
- बुजुर्गों में गहरी नींद की कमी से अल्जाइमर और अन्य न्यूरोलॉजिकल समस्याओं का जोखिम बढ़ जाता है, इसलिए उन्हें नियमित स्लीप शेड्यूल का पालन करना चाहिए।
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Mobile Use
- फोटो : Adobe stock
नींद की कमी और अधिकता के दुष्प्रभाव
- लंबे समय तक 6 घंटे से कम सोने से मोटापे का खतरा बढ़ जाता है क्योंकि यह भूख को नियंत्रित करने वाले हार्मोन 'लेप्टिन' को बिगाड़ देता है।
- इसके विपरीत, जरूरत से ज्यादा सोना (9-10 घंटे से अधिक) भी डिप्रेशन और सुस्ती का कारण बन सकता है।
- हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक जो लोग रोजाना एक ही समय पर सोते और जागते हैं, उनका इम्यून सिस्टम (रोग प्रतिरोधक क्षमता) अनियमित नींद लेने वालों की तुलना में अधिक मजबूत होता है।
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sleep
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बेहतर नींद के लिए अपनाएं 'स्लीप हाइजीन'
अच्छी नींद सर्फ बिस्तर पर लेटने से नहीं आती, बल्कि इसके लिए सही 'स्लीप हाइजीन' का पालन करना जरूरी है। इसके लिए सोने से एक घंटे पहले मोबाइल और लैपटॉप से दूरी बना लें, क्योंकि इनसे निकलने वाली 'ब्लू लाइट' नींद के हार्मोन 'मेलाटोनिन' को प्रभावित करती है। एक शांत, अंधेरा और ठंडा कमरा गहरी नींद लाने में बड़ी भूमिका निभाता है।
स्रोत और संदर्भ
How Much Sleep Do You Really Need?
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
अच्छी नींद सर्फ बिस्तर पर लेटने से नहीं आती, बल्कि इसके लिए सही 'स्लीप हाइजीन' का पालन करना जरूरी है। इसके लिए सोने से एक घंटे पहले मोबाइल और लैपटॉप से दूरी बना लें, क्योंकि इनसे निकलने वाली 'ब्लू लाइट' नींद के हार्मोन 'मेलाटोनिन' को प्रभावित करती है। एक शांत, अंधेरा और ठंडा कमरा गहरी नींद लाने में बड़ी भूमिका निभाता है।
स्रोत और संदर्भ
How Much Sleep Do You Really Need?
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।