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बुखार में CBC रिपोर्ट कब देती है खतरे का सिग्नल? जानें कब मिलना चाहिए डॉक्टर से

Fri, 11 Sep 2026 03:13 PM IST
Shruti Gaur हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Shruti Gaur Updated Fri, 11 Sep 2026 03:13 PM IST
सार

CBC Report in Fever: बुखार में CBC में प्लेटलेट-WBC में बदलाव आम है, पर किन लक्षणों में तुरंत डॉक्टर के पास जाना चाहिए, आइए डॉक्टर से ही जानते हैं।

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importance of cbc report in fever cases points of danger in high fever
बुखार में CBC रिपोर्ट कब देती है खतरे का सिग्नल? - फोटो : AI
CBC Report in Fever: मानसून में बुखार आते ही लोग सबसे पहले वायरल या डेंगू समझकर दवा शुरू कर देते हैं। ज्यादातर मामलों में बुखार सामान्य संक्रमण से होता है और ठीक भी हो जाता है, लेकिन हर बार इसे हल्के में लेना सही नहीं। कई बार शरीर के अंदर कुछ और ही चल रहा होता है, जिसका पहला संकेत आपकी एक साधारण सी ब्लड रिपोर्ट दे देती है। वो है CBC यानी Complete Blood Count।


सीनियर कंसल्टेंट, हेमेटोलॉजी एवं बोन मैरो ट्रांसप्लांट डॉ. नरेंद्र अग्रवाल कहते हैं कि बुखार के साथ अगर CBC में प्लेटलेट, WBC या हीमोग्लोबिन में लगातार बदलाव दिख रहा है, तो यह सिर्फ संक्रमण नहीं, बल्कि किसी गंभीर रक्त विकार का शुरुआती लक्षण हो सकता है। ऐसे में एक रिपोर्ट देखकर घबराने के बजाय उसके पैटर्न को समझना और सही समय पर विशेषज्ञ से मिलना सबसे जरूरी है।
 
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बुखार में CBC रिपोर्ट कब देती है खतरे का सिग्नल? - फोटो : AI
बुखार में CBC क्यों जरूरी है?

CBC खून की सबसे बेसिक लेकिन सबसे महत्वपूर्ण जांच है। इसमें खून के तीन मुख्य कंपोनेंट देखे जाते हैं - हीमोग्लोबिन, व्हाइट ब्लड सेल्स (WBC) और प्लेटलेट्स।

बुखार या किसी भी इन्फेक्शन के दौरान इनकी संख्या में उतार-चढ़ाव आना आम है। इसलिए अगर रिपोर्ट में कोई एक आंकड़ा ऊपर-नीचे है, तो तुरंत डरने की जरूरत नहीं। डॉक्टर इसे मरीज के लक्षण, बुखार कितने दिन से है और शारीरिक जांच के साथ मिलाकर देखते हैं।

अक्सर डॉक्टर 2-3 दिन बाद दोबारा CBC कराने को कहते हैं, ताकि पता चल सके कि बदलाव अस्थायी है या लगातार बना हुआ है।

 
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बुखार में CBC रिपोर्ट कब देती है खतरे का सिग्नल? - फोटो : AI
CBC में डॉक्टर किन 3 चीजों को सबसे पहले देखते हैं?

प्लेटलेट काउंट:

प्लेटलेट्स खून को जमने में मदद करते हैं। डेंगू, वायरल फीवर में प्लेटलेट कम होना आम है। अगर इन्फेक्शन ठीक होते ही काउंट बढ़ने लगे तो चिंता नहीं, लेकिन अगर बुखार ठीक होने के बाद भी प्लेटलेट लगातार कम ही रहे, तो यह जांच का विषय है।

White Blood Cell Count (WBC):

WBC शरीर के सिपाही हैं। बैक्टीरियल इन्फेक्शन में ये बढ़ जाते हैं और कुछ वायरल में कम हो जाते हैं। लेकिन जब WBC काउंट 4000 से बहुत कम या 11,000 से बहुत ज्यादा हो और बिना किसी स्पष्ट कारण के कई रिपोर्ट में ऐसा ही आए, तो डॉक्टर अलर्ट हो जाते हैं।

Differential Count:

इसमें 5 तरह के WBC - Neutrophils, Lymphocytes, Monocytes, Eosinophils, Basophils का प्रतिशत देखा जाता है। इसका असामान्य पैटर्न बताता है कि इन्फेक्शन किस तरह का है या शरीर में कोई और प्रक्रिया चल रही है।

 
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बुखार में CBC रिपोर्ट कब देती है खतरे का सिग्नल? - फोटो : AI
कब हेमेटोलॉजिस्ट के पास जाना चाहिए?

डॉ. नरेंद्र अग्रवाल के अनुसार ये 6 रेड फ्लैग हैं -
  • WBC बहुत ज्यादा या बहुत कम और दोबारा जांच में भी वही स्थिति
  • प्लेटलेट काउंट में लगातार और महत्वपूर्ण गिरावट, जिसका कारण डेंगू न हो
  • CBC में एक साथ 2-3 चीजों में गड़बड़ी - जैसे हीमोग्लोबिन कम, WBC ज्यादा और प्लेटलेट कम
  • 2 हफ्ते से ज्यादा बुखार जिसका कारण सामान्य जांचों में पता न चल रहा हो
  • गर्दन, बगल या जांघ में लिम्फ नोड (गांठ) का बढ़ना और 2-3 हफ्ते बाद भी न घटना
  • बुखार के साथ कमजोरी, वजन कम होना, रात में पसीना आना

 
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बुखार में CBC रिपोर्ट कब देती है खतरे का सिग्नल? - फोटो : AI
डॉ. अग्रवाल साफ कहते हैं कि इनमें से कोई भी एक लक्षण सीधे तौर पर ब्लड कैंसर या गंभीर बीमारी नहीं है। हेमेटोलॉजिस्ट के पास भेजने का मतलब सिर्फ इतना है कि खून से जुड़ी गड़बड़ी को और बारीकी से समझने की जरूरत है। सही समय पर सलाह, सही जांच और रिपोर्ट को पूरी क्लीनिकल कंडीशन के साथ समझना ही आपको गंभीर बीमारी से बचा सकता है।


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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